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धोनी ब्रांड की चमक पड़ेगी फीकी?
उर्वी मलवाणिया /  August 04, 2015

अब वह कोई दूसरे विवाद में नहीं पडऩा चाहते हैं। शायद इसीलिए पिछले हफ्ते सुरेश रैना अपने कप्तान की छत्रछाया से बाहर निकले और उन्होंने रीति स्पोट्र्स को अलविदा कह दिया। अब उन्होंने आईओएस स्पोट्र्स एंटरटेनमेंट के साथ तीन साल का करार 35 करोड़ रुपये में किया है। देश में रैना एक ऐसे क्रिकेट सितारे हैं जिनकी मार्केटिंग बेहद कम हुई है। उनके नए टैलेंट मैनेजर का कहना है कि वे उन्हें एक विश्वसनीय ब्रांड के तौर पर पेश करेंगे। इसका अंदाजा अब कोई भी लगा सकता है कि विज्ञापन की दुनिया में वह किसकी जगह लेने की संभावनाएं तलाश रहे हैं। जी हां, उस शख्स का नाम है महेंद्र सिंह धोनी जो खेल की दुनिया की तरफ से विज्ञापन लीग में शीर्ष पायदान पर बने हुए हैं।

लेकिन विवादों में फंसे रहने, हार और ब्रांड अनुबंध के नवीकरण (अगले एक साल के दौरान) का दौर आने के साथ ही क्या ब्रांड धोनी के मूल्यांकन में गिरावट आएगी? एक स्पोट्र्स मार्केटिंग कंपनी बेसलाइन वेंचर्स के सह संस्थापक और निदेशक विशाल जैसन का कहना है, 'धोनी के विज्ञापन करार की वैल्यू में कोई बड़ी गिरावट नहीं होनी चाहिए क्योंकि वह अब भी भारत के एक दिवसीय मैच के लिए कप्तान हैं और क्रिकेटर के तौर पर उनकी स्वीकार्यता भी ज्यादा है। उनकी तरह ज्यादा लोग नहीं हैं जो उनकी तरह अनुकूल फॉर्म की बराबरी कर सकें।'

भारतीय टीम के कप्तान के तौर पर एम एस धोनी का रिकॉर्ड क्रिकेट के सभी तीनों प्रारूप में बेहद उल्लेखनीय है। इसी वजह से विज्ञापनदाताओं ने अपने ब्रांड के लिए उन्हें तवज्जो दी। लेकिन घोटाले और खराब प्रदर्शन ने उनकी इस योग्यता पर सवालिया निशान लगा दिए। कुछ ब्रांड विशेषज्ञों का यह मानना है कि धोनी एक ऐसे ब्रांड हैं जिनकी चमक अब फीकी पड़ रही है। वह अपने प्रदर्शन में गिरावट, चेन्नई सुपर किंग्स और रीति स्पोट्र्स के मालिकाना हक से जुड़े विवाद के तिहरे हमले को झेलने में सक्षम नहीं हो सकते हैं। एक सेलिब्रिटी प्रबंधक का कहना है, 'धोनी का बेहतर दौर गुजर गया है और यह भी सच है कि कुछ क्रिकेटरों ने अपनी जिंदगी में एक बार से अधिक बार शीर्ष पर पहुंचे हैं लेकिन धोनी के मामले में ऐसा नहीं हो सकता है। उनके हिस्से में ब्रांड की तादाद घट रही है और अब यह 23 से घटकर 15 ही रह गई है।'

वर्ष 2012 में आईसीसी क्रिकेट विश्व कप 2011 में जीत के बाद महेंद्र सिंह धोनी करीब 22 ब्रांडों का चेहरा थे और उन्होंने एक साल में 9-12 करोड़ रुपये के बीच में मांग की। जानकार पेशेवरों का कहना है कि ब्रांड की तादाद कम होकर करीब 15 ब्रांड तक सिमट गई है। हालांकि वह अब भी अपनी टीम के सहयोगियों के मुकाबले ब्रांड की तादाद और फीस लेने के लिहाज से शीर्ष स्तर पर है।

हालांकि ब्रांड विज्ञापन की तादाद में कमी, लोकप्रियता कम होने का कोई पैमाना नहीं है। सचिन तेंडुलकर और सौरभ गांगुली जब अपने खेल में बुलंदियों पर थे तब उनके पास कुछ ही ब्रांड थे। कुछ विशेषज्ञों के मुताबिक ब्रांड वैसा चेहरा चाहते हैं जो लोगों की नजरों में बना हुआ हो और खेल के मैदान में उसका प्रदर्शन अच्छा हो। कप्तान के तौर पर धोनी का चेहरा लोकप्रिय है और प्रदर्शन भी कोई बड़ा मुद्दा नहीं है।

हालांकि किसी ब्रांड के लिए छवि ही सबसे अहम होती है। एक ब्रांड प्रबंधक कहते हैं, 'उनका प्रदर्शन ब्रांड के लिए लंबे समय तक फायदेमंद होगा लेकिन विवादों की वजह से उनकी विश्वसनीयता पर असर पड़ सकता है। तेंडुलकर की छवि पर कोई दाग नहीं था और धोनी के मामले में कोई भी ऐसा ब्रांड उन्हें तरजीह नहीं देगा जिनके ब्रांड के लिए विश्वसनीयता अहम हो।'

अब ब्रांडों के लिए विराट कोहली भी एक विकल्प हैं। उनके ब्रांड विज्ञापन और कारोबारी उद्यम को बंटी साजदे के नेतृत्व में कॉर्नरस्टोन स्पोट्र्स ऐंड एंटरटेनमेंट देखती है और फिलहाल उनके खाते में 10 ब्रांड विज्ञापन करार जुड़े हुए हैं और वह एक साल के लिए 8 से 10 करोड़ रुपये लेते हैं। हालांकि कोहली की छवि धोनी से काफी अलग है। साजदे ने बिज़नेस स्टैंडर्ड के साथ पहले हुई अपनी बातचीत में कहा था कि कोहली वैसे ब्रांड का चयन करते हैं जो युवाओं को अपील करती हो। उन्होंने फास्टट्रैक (युवाओं के लिए टाइटन की घडिय़ों, बैग और सन ग्लास का एक उप-ब्रांड) के साथ अपनी शुरुआत की और फिलहाल वह ओकली, मैटेल, एडिडास, विक्स, एमआरएफ और ऑडी जैसे ब्रांड का चेहरा हैं।

एक ब्रांड सलाहकार कहते हैं, 'धोनी और कोहली युवाओं के लिए आदर्श हैं लेकिन जनता के बीच में धोनी की अपील अच्छी खासी है। कोहली को वैसे ब्रांड ज्यादा तरजीह देते हैं जो शहरी क्षेत्रों में महत्त्वाकांक्षी युवाओं को लक्षित करते हैं। धोनी की अपील गैर-शहरी क्षेत्रों में भी है।' उनका मानना है कि धोनी की अपील सभी वर्गों में समान रूप से है लेकिन ऐसा मुमकिन है कि उनके मूल्यांकन में थोड़ी कमी आए। वह बताते हैं, 'हमने यह देखा कि शिखर धवन ने धोनी की जगह ली और फैशन बिग बाजार में कुछ साल पहले ही उसका चेहरा बन गए। ऐसे में इसकी पूरी गुंजाइश बन सकती है।'

साफतौर पर ब्रांड धोनी एक चौराहे पर खड़े हैं। जैसन कहते हैं, 'धोनी की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह अपनी बढ़ती उम्र के साथ अपना फॉर्म बरकरार रखें। टेस्ट मैच को छोड़कर एकदिवसीय मैच पर पूरा जोर दिए जाने की वजह से शारीरिक और मानसिक तौर पर उनका बोझ कम हुआ है। कुछ सालों तक वह ऊंचे स्तर पर प्रतिस्पद्र्धा करने की बेहतर स्थिति में है।' लेकिन धोनी और उनकी छवि प्रबंधकों को कुछ चीजें तय करनी पड़ेंगी।

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