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राजस्व भरपाई योजना पर भरोसा
बीएस संवाददाता / कोलकाता July 31, 2015

आईटीसी के चेयरमैन वाईसी देवेश्वर ने आज कहा कि सिगरेट कारोबार पर नियामकीय दबाव को कम करने के लिए कंपनी की बैक-अप योजना का फायदा जल्द मिलने लगेगा। कंपनी की सालाना आम बैठक को संबोधित करते हुए देवेश्वर ने कहा, 'कई साल पहले बैक-अप योजना शुरू की गई थी और अब जल्द ही उसका फायदा मिलने लगेगा।' सिगरेट कारोबार पर सख्त नियमन और एफएमसीजी क्षेत्र में कमजोर मांग के कारण चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में आईटीसी का प्रदर्शन दमदार नहीं रहा। कंपनी के कुल राजस्व में करीब 48 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाले सिगरेट कारोबार में तिमाही के दौरान लाभप्रदता में सुधार हुआ लेकिन बिक्री में गिरावट दर्ज की गई।

शेयरधारकों द्वारा यह पूछे जाने पर कि कंपनी रिटर्न के मुकाबले अपने गैर-सिगरेट एफएमसीजी कारोबार में अधिक निवेश कर रही है, देवेश्वर ने कहा कि बाजार हिस्सेदारी हासिल करने और नए उत्पाद उताने के लिए खर्च किए जा रहे हैं। पिछले वित्त वर्ष के दौरान आईटीसी ने जूस कारोबार में कदम रखा था। देवेश्वर ने ई-कॉमर्स कंपनियों का उदाहरण देते हुए कहा कि बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए ई-कॉमर्स कंपनियां काफी नकदी खर्च कर रही हैं। उन्होंने कहा, 'कंपनी के मूल्य को न केवल उसके मुनाफे से आंका जाता है बल्कि भविष्य के लिए उसकी दृष्टिï का भी काफी प्रभाव होता है।'

अपने संबोधन के आरंभ में देवेश्वर ने बताया कि गैर-सिगरेट कारोबार से कंपनी को करीब 59 फीसदी राजस्व प्राप्त होता है। आईटीसी के गैर-सिगरेट कारोबार से प्राप्त राजस्व 1996 के बाद 17 गुना बढ़कर वित्त वर्ष 2015 में 23,500 करोड़ रुपये हो गया। जून तिमाही में कंपनी के गैर-सिगरेट कारोबार (पैकेटबंद खाद्य पदार्थ, परिधान, शिक्षा एवं व्यक्तिगत देखभाल संबंाधी उत्पाद) से प्राप्त राजस्व पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 12.2 फीसदी बढ़कर 2,171 करोड़ रुपये हो गया। आईटीसी ने कहा कि उसके गैर-सिगरेट कारोबार में अहम हिस्सेदारी रखने वाला खाद्य वस्तुओं के कारोबार में उल्लेखनी सुधार दर्ज किया गया है।

आईटीसी ने अपने एफएमसीजी कारोबार को अगले 15 साल में बढ़ाकर 1 लाख करोड़ रुपये करने के लिए एक महत्त्वाकांक्षी योजना बनाई है। देवेश्वर ने कहा कि कंपनी भविष्य में एफएमसीजी के हर क्षेत्र में अपनी मौजूदगी दर्ज करना चाहती है। उन्होंने कहा, 'सफलता मिलने पर हम हर उस क्षेत्र में प्रवेश करेंगे जिसे एफएमसीजी कहा जा सकता है।' एक शेयरधारक ने पूछा कि क्या आईटीसी को पीऐंडजी या हिंदुस्तान यूनिलीवर (एचयूएल) की तरह सैनिटैरी नैपकिन कारोबार में उतरना चाहिए, आईटीसी के चेयरमैन ने कहा कि अन्य बहुराष्टï्रीय कंपनियों के विपरीत आईटीसी के सभी ब्रांड पूरी तरह घरेलू होंगे। बहरहाल, सिगरेट पर सरकार द्वारा कर बढ़ाए जाने पर आईटीसी के चेयरमैन जमकर बोले। उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष के दौरान सरकारी खजाने में आईटीसी का योगदान बढ़कर 27,000 करोड़ रुपये हो चुका है। लेकिन सिगरेट कारोबार पर नियामकीय सख्ती के कारण कंपनी का कारोबार प्रभावित हुआ है जो उचित नहीं है।

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