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कबड्डी के दम पर सफलता की गाड़ी पर सवार हुआ स्टार परिवार
उर्वी मलवाणिया /  July 20, 2015

स्टार स्पोट्र्स प्रो कबड्डी लीग (पीकेएल) को उम्मीद से बेहतर सफलता मिली है। बीते शनिवार को बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन जैसे तमाम सितारों की मौजूदगी में शुरू हुए इसके दूसरे सीजन का दर्शक और विज्ञापनदाता बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। स्टार इंडिया नेटवर्क ने पिछले साल मुख्य प्रायोजन स्टार स्पोट्र्स ब्रांड को दिया था। यह इस साल भी लीग से जुड़ा हुआ है और करीब आठ प्रायोजक भी इस लीग से जुड़े हैं। सहायक प्रायोजकों में टीवीएस मोटर्स, वीआईपी फ्रेन्ची, बजाज इलेक्ट्रिकल्स और फ्लिपकार्ट आदि शामिल हैं। एफएमसीजी कंपनी ब्रिटानिया ने भी करार किया है। इस लीग को पिछले साल अप्रत्याशित सफलता मिली। डेढ़ महीने तक चली इस लीग को करीब 43.5 करोड़ दर्शक मिले।

स्टार स्पोट्र्स के प्रमुख नितिन कुकरेजा ने कहा, 'हम कबड्डी को फिर से जिंदा करने को लेकर प्रतिबद्ध हैं और इसे आज के संदर्भ में स्थापित करना चाहते हैं। सबसे बड़ा काम इस खेल को करोड़ों युवाओं और प्रशंसकों के लिए प्रासंगिक बनाना है। हमारा मकसद इस खेल को गुणवत्ता, प्रसारण और पहुंच के लिहाज से बड़ा और बेहतर बनाना है।' उन्होंने कहा, 'यह टूर्नामेंट स्टार नेटवर्क के आठ चैनलों पर उपलब्ध होगा, जबकि पिछले साल यह केवल तीन चैनलों पर ही उपलब्ध था।' पिछले साल ज्यादातर दर्शक हिंदी भाषा के चैनलों से आए थे। लेकिन इस  बार प्रसारक ने पांच भाषाओं-अंग्रेजी, हिंदी, कन्नड़, तेलुगू और मराठी के साथ अन्य क्षेत्रों में पैठ बनाने की योजना बनाई है। यह पूरे विश्व के 109 देशों में प्रसारण करेगा। पैकेजिंग में भी सुधार किया गया है। प्रत्येक टीम के लिए एनिमेटेड मैस्कट होंगे।

सफलता से जगा विश्वास,  लीग बनी मिसाल

दरअसल पीकेएल की सफलता से क्रिकेट से इतर खेलों में विश्वास बना है। एक स्पोट्र्स मार्केटिंग कंपनी बेसलाइन के सह-संस्थापक विशाल जैसन कहते हैं, 'आईपीएल की सफलता के बाद बहुत सी लीग जैसे इंडियन बैडमिंटन लीग (आईबीएल), इंडियन सुपर लीग (आईएसएल), प्रो कबड्डी लीग (पीकेएल) बनी हैं। इनके अलावा हर साल कई खेल आयोजन हो रहे हैं। भारत हर साल अंतरराष्ट्रीय स्तर के दो बैडमिंटन टूर्नामेंटों-इंडियन ओपन जीपी गोल्ड एवं इंडियन ओपन सुपर सीरीज, चेन्नई ओपन (एटीपी टूर्नामेंट) आदि की मेजबानी कर रहा है। ये काफी लोकप्रिय हैं।'

हालांकि हीरो हॉकी इंडिया लीग (वर्ष 2012 में शुरू) और आईबीएल लोगों का ध्यान खींचने में असफल रही हैं, जबकि पीकेएल और हीरो आईएसएल को भारी सफलता मिली है। पीकेएल के मामले में सभी भागीदारों ने पहले वर्ष धन कमाने पर नहीं बल्कि ब्रांड को स्थापित करने और संगठित करने पर ध्यान केंद्रित किया। वहीं आईएसएल में हीरो ने पहले वर्ष से ही तीन वर्षों के लिए मुख्य प्रायोजन के लिए 55-60 करोड़ रुपये का सौदा किया था। सहायक प्रायोजन की कीमत 4 से 6 करोड़ रुपये थी। ये दरें ऐसी हैं जो क्रिकेट से इतर खेल लीग पर विज्ञापनदाताओं को विचार करने पर मजबूर करती हैं। उदाहरण के लिए आईएसएल में मुख्य प्रायोजन के लिए हीरो जितनी राशि खर्च करती है, उसकी तुलना में आईपीएल में पेप्सी इससे चार गुना ज्यादा पैसा चुकाती है। इसी तरह आईपीएल में सहायक प्रायोजन की सालाना कीमत 25 से 30 करोड़ रुपये है। स्टार इंडिया ने आईपीएल में ऑनग्राउंड सहायक प्रायोजन के लिए करार किया है, जिसके लिए वह तीन वर्र्षों में 100 करोड़ रुपये चुकाएगी। जैसन कहते हैं, 'हालांकि भारत क्रिकेट के प्रति पे्रम वाला देश रहा है, लेकिन अन्य खेलों के प्रति आकर्षण बढ़ता जा रहा है।'

बढ़ी खिलाडिय़ों की संख्या, मिलेगा ज्यादा को मौका

इस बार हर टीम में खिलाडिय़ों की संख्या 14 से बढ़कर 25 हो गई है और वैश्विक स्तर भारत के निकट प्रतिद्वंद्वी ईरान के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी इस लीग से जुड़ रहे हैं। हर मैच लोकप्रिय कलाकार द्वारा राष्ट्र गान की प्रस्तुति के साथ शुरू होगा। बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन ने  इस साल का अभियान गीत 'ले पंगा' भी रिकॉर्ड किया है और इस टूर्नामेंट के दौरान उसे काफी बढ़ा चढ़ाकर दिखाया भी जा रहा है। स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए स्वच्छ भारत अभियान से गठजोड़ भी किया गया है।

ऐसी लीगों में ब्रांडों को किस चीज की तलाश होती है? मैक्सवेल इंडस्ट्रीज (वह कंपनी जिसके पास वीआईपी फ्रेंची ब्रांड है) के वाइस चेयरमैन और एमडी सुनील पथारे कहते हैं, 'क्रिकेट भारत में हमेशा एक धर्म रहेगा, लेकिन यह बहुत महंगा निवेश है। हमारे लिए कबड्डी पसंद इसलिए थी क्योंकि यह खेल काफी लोगों का ध्यान खींचने में सफल रहा है और इसकी लागत भी उचित है। हमने एक साल के लिए करार किया है, लेकिन अनुबंध को आगे बढ़ाने पर विचार भी कर रहे हैं।'

इन दिनों विज्ञापनदाताओं के पास प्रसारण माध्यमों पर ही विभिन्न खेलों के चयन का विकल्प है, बल्कि उनके पास मैदान पर विज्ञापन के भी विकल्प हैं। प्रत्येक लीग से फ्रैंचाइजी की संख्या बढ़ती है, जिससे उपलब्ध विकल्पों में भी इजाफा हो रहा है। सभी खेलों में साझेदारी के लिए कम से कम 45 से 50 टीमों के विकल्प मौजूद हैं। इसके अलावा पीकेएल और वल्र्ड कबड्डी लीग में किसी टीम की मुख्य प्रायोजक बनने पर हर साल करीब 50,00,000 रुपये लागत आती है, जबकि आईपीएल की प्रमुख टीमें मुख्य प्रायोजक बनने के लिए हर साल 25 करोड़ रुपये वसूल करती हैं। गौरतलब है कि वल्र्ड कबड्डी लीग एक अन्य कबड्डी टूर्नामेंट है, जिसमें भारत, कनाड़ा, ब्रिटेन और अमेरिका भाग लेते हैं। प्रो कबड्डी लीग की सफलता बहुत अच्छी रही है। लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि यह शुरुआती समय है और क्रिकेट से इतर खेलों को कुछ समय टिकट की दरें कम रखनी होंगी। हालांकि एक उद्योग के रूप में यह धारणा बनी है कि क्रिकेट से इतर खेल भी बिकते हैं। 

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