बिजनेस स्टैंडर्ड - हस्तियों को जिम्मेदार ठहराना मुश्किल
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हस्तियों को जिम्मेदार ठहराना मुश्किल
सुदीप्त दे /  June 07, 2015

भोजन की जांच करने वाले अधिकारियों द्वारा नेस्ले के मैगी ब्रांड के इंस्टैंट नूडल्स पर नकेल कसे जाने के बाद से पूरे देश में इस सवाल को लेकर बहस जारी है कि क्या भारत में विज्ञापन करने वाली हस्तियां विनिर्माता या सेवाप्रदाता की गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार हैं या नहीं। कानून के जानकार भी इस मामले पर बंटे हुए नजर आ रहे हैं। हालांकि ज्यादातर कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इन हस्तियों को कानून के कुछ निश्चित प्रावधानों के तहत जिम्मेदार ठहरा भी दिया जाता है तो भी अदालत में यह साबित करना मुश्किल हो जाएगा कि विज्ञापन किसी को नुकसान पहुंचाने की मंशा से किया गया है। कानूनी जानकारों का कहना है कि एक ब्रांड ऐंबेसडर के अधिकार और जिम्मेदारियों का उल्लेख विज्ञापन करने वाले और कंपनी के बीच हुए करार में होता है। निशीथ देसाई एसोसिएट्स की पार्टनर गौरी गोखले का कहना है, 'यह संभव है कि विज्ञापन करने वाले को विज्ञापन एजेंसी ने चुना हो, न कि कंपनी ने, ऐसे में करार की शर्तें अलग होंगी। इसके अलावा यह भी संभव है कि विज्ञापन करने वाले और कंपनी के बीच कोई संबंध हो ही नहीं।'

अद्वय लीगल प्वांइटï्स के मैनेजिंग पार्टनर रमेश वैद्यनाथन का कहना है कि यह बहुत ही सामान्य प्रक्रिया है कि ब्रांड मालिक और ब्रांड का विज्ञापन करने वाले दोनों ही पक्ष एक दूसरे को करार संबंधी जिम्मेदारी का बोध कराते हैं। वैद्यनाथन ने कहा, 'हस्तियों की जिम्मेदारी प्रतिस्पर्धी उत्पादों का विज्ञापन न करने तक प्रतिबंधित होती है जबकि ब्रांड के मालिक उत्पाद की गुणवत्ता के बारे में उपयुक्त जानकारी मुहैया कराते हैं। हस्तियां खुद को किसी भी तरह की सामाजिक जिम्मेदारी से बचाने के लिए ब्रांड मालिकों से जमकर पैसा वसूलती हैं।' भारतीय दंड संहिता के तहत हानिकारक या अनुचित भोजन बेचने वाले या बेचने की पेशकश करने वाले किसी भी व्यक्ति को अगर यह पता है कि खाद्य पदार्थ हानिकारक था तो उस पर मुकदमा चलाया जा सकता है।

क्या है प्रावधान

मैगी के मामले में विज्ञापन करने वाली हस्तियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 270 (जीवन के लिए खतरनाक बीमारी का संक्रमण फैलाने का गलत काम), धारा 273 (नकली खाद्य पदार्थ या पेय पदार्थ की बिक्री), धारा 276 (किसी और दवा के नाम पर किसी अन्य दवा को बेचना) और 420 (बेईमानी और धोखेबाजी) के तहत आपराधिक जवाबदेही का मामला दर्ज किया गया है। वैद्यनाथन ने कहा, 'सामान्य तौर पर कानून को पढऩे पर पता चलेगा धारा 420 और 276 के तहत दायर किया गया मामला अदालत में साबित नहीं हो पाएगा क्योंकि ये संपत्ति को लेकर धोखेबाजी और किसी अन्य दवा के नाम पर दूसरी दवा को बेचे जाने से संबंधित हैं जबकि यहां मामला ऐसा नहीं है। दो अन्य धाराओं के तहत दर्ज किए गए मामले में यह साबित करना जरूरी है कि आरोपी ने स्पष्टï मंशा के साथ ऐसा किया है, इस मामले में यह साबित करना मुश्किल दिखाई देता है।'

कितनी जवाबदेही

हालांकि भारतीय कानून विज्ञापन करने वालों की जवाबदेही पर शांत हैं, खाद्य संरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 (एफएसएसए) में स्पष्टï रूप से कहा गया है कि किसी खाद्य पदार्थ को गलत ढंग से पेश करने या खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता या प्रकृति के बारे में गलत जानकारी देने वाले विज्ञापन से जुड़े किसी भी व्यक्ति पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। कानूनी जानकारों का कहना है कि अगर कोई मौद्रिक जुर्माना लगाया जाता है तो उसकी भरपाई ब्रांड मालिक द्वारा मुहैया कराए जाने वाले करार संबंधी मुआवजे से कर ली जाती है। गोखले के मुताबिक कोई भी एक विज्ञापन में चीजों को गलत ढंग से पेश किए जाने के खिलाफ स्वविनियमित संस्था भारतीय विज्ञापन मानक परिषद (एएससीआई) पर शिकायत दर्ज करा सकता है। एएससीआई विज्ञापन पर बदलाव या उसे रोकने का निर्देश दे सकता है। गोखले का कहना है, 'ऐसे विज्ञापनों को ईमानदारी, जवाबदेही, निष्पक्षता और सभ्यता के आधार पर परखा जाता है। हालांकि निर्देश बाध्यकारी नहीं हैं लेकिन उद्योग आमतौर पर इनका पालन करता है।' कानूनी फर्म निशीथ देसाई एसोसिएट्स के एम एस अनंत का कहना है कि उपभोक्ता कानून के तहत विज्ञापन करने वाले खिलाफ दावा कर सकते हैं लेकिन भारत में ऐसा कोई उदाहरण देखने को नहीं मिलता है। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत एक कारोबारी या सेवाप्रदाता सेवा की गुणवत्ता या स्तर में कटौती करने, गैर वाजिब प्रक्रियाओं या किसी भी अन्य गड़बड़ी के लिए अभियोजित किया जा सकता है। उन्होंने कहा, 'हालांकि कोई भी विज्ञापन करने वाले को अभियोजित करता है।'

अंतरराष्ट्रीय पहलू

अमेरिका में प्रतिस्पर्धा कानून विनियामक फेडरल टे्रड कमीशन (एफटीसी) के पास जानी मानी हस्तियों द्वारा किए जाने वाले विज्ञापनों के लिए उपयुक्त दिशा निर्देश उपलब्ध हैं। एफटीसी ने विज्ञापन करने वाले लोगों के लिए मानक तय किए हैं, साथ ही उनकी जवाबदेही की शर्त भी तय है। गोखले विस्तार से बताते हैं, 'अगर विज्ञापन करने वाली हस्ती वास्तव में उत्पाद का प्रयोग करती है या उसकी खूबियों पर भरोसा करती है तो विज्ञापनों को 'भरोसा करने के लिए अच्छे कारण' परीक्षण के तहत परखा जाता है। अगर वे इस परीक्षण में असफल रहते हैं तो उन हस्तियों की जवाबदेही बनती है।' हालांकि वैद्यनाथन बताते हैं कि अभी तक ऐसे किसी मामले में किसी आपराधिक जवाबदेही का मामला सामने नहीं आया है और सिर्फ सामाजिक उत्तरदायित्व ही बनता है। यूरोप में खुद से लागू की गई आचार संहिता के तहत हस्तियां दवाओं, चिकित्सकीय उपचारों, तंबाकू और एल्कोहल का विज्ञापन करने से बचती हैं। चीन में इन हस्तियों को विभिन्न उत्पादों के लिए जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की गई। उदाहरण के लिए एक रसायनमुक्त शैंपू का विज्ञापन करने के लिए जैकी चेन को भी अभियोजित करने की कोशिश शुरू की गई थी जिसमें कैंसर को बढ़ावा देने वाली सामग्रियां होने का आरोप था। गोखले ने कहा, 'चीन में गलत और भ्रामक गतिविधियों का परीक्षण करने की सुविधा नहीं है और विज्ञापन करने वालों के खिलाफ दाखिल किए गए मामले खारिज हो जाते हैं क्योंकि विज्ञापन करने वाले और उत्पाद या कंपनी के बीच कोई वैध संबंध
नहीं है।'

कानून में बदलाव करना

कानूनी विशेषज्ञ और उपभोक्ता अधिकारों की लड़ाई लडऩे वालों का कहना है कि उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम के तहत गठित केंद्रीय उपभोक्ता सुरक्षा परिषद ने पिछले साल कोच्चि में हुई एक बैठक में भ्रामक विज्ञापनों के लिए जानी मानी हस्तियों सहित विभिन्न पक्षों की जवाबदेही से निपटने की रणनीति की जरूरत पर बल दिया था। उसने इस मामले की देखरेख के लिए एक उप समिति भी बनाई थी। हालांकि इस उप समिति ने कोई सुझाव नहीं दिए और अब तक उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम में कोई बदलाव नहीं किए गए हैं। हालांकि कई कानूनी जानकारों का मानना है कि विज्ञापन करने वाली जानी मानी हस्तियों के अधिकार और जवाबदेही को तय करने के लिए सरकार को मौजूदा कानूनों में फेरबदल करने की जरूरत है।

सतर्कता पर जोर

कानूनी फर्म इकनॉमिक लॉ पार्टनर में सहायक पार्टनर अमित व्यास जैसे कई लोग हस्तियों को कानून के दायरे में लाने को जरूरी नहीं समझते हैं। वह कहते हैं, 'उत्पादों की गुणवत्ता में गिरावट के लिए ब्रांड ऐंबेसडरों को व्यक्तिगत तौर पर जिम्मेदार ठहराना बहुत ही अजीब लगता है। अगर ब्रांड ऐंबेसडर जिस ब्रांड का विज्ञापन करता है, उसके पास जरूरी मंजूरियां या अनुमतियां हों तो उन्हें उत्पाद या सेवा की गुणवत्ता में गिरावट के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है।' ब्रांड ऐंबेसडर की वैधानिक जवाबदेही को लेकर चल रही मौजूदा बहस से एक बात जो होनी तय है वह यह कि ब्रांडों के लिए प्रचार करने के काम में अब पहले के मुकाबले कहीं अधिक सतर्कता बरती जाएगी।

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