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एमसीएक्स शेयरधारकों की हिस्सेदारी बढ़ाए : एफएमसी
राजेश भयानी / मुंबई June 07, 2015

देश का सबसे बड़ा जिंस डेरिवेटिव एक्सचेंज मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) एक बार फिर से वायदा बाजार आयोग (एफएमसी) के निशाने पर है। इससे पहले आयोग ने नैशनल स्पॉट एक्सचेंज संकट के बाद एमसीएक्स के साथ यह सुनिश्चित करने के लिए कड़ाई बरती थी कि एक्सचेंज में फाइनैंशियल टेक्रोलॉजीज (एफटीआईएल) की कोई शेयरधारिता न बच जाए। अब एफएमसी ने एमसीएक्स से अपने निदेशक मंडल में शेयरधारकों का प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए कहा है। एमसीएक्स के निदेशक मंडल में 10 सदस्य हैं जिनमें छह स्वतंत्र निदेशक (आईडी) और तीन शेयरधारक निदेशक मौजूद हैं। इनमें से एक केनरा बैंक, एक नाबार्ड और तीसरे अजय कुमार हैं। इन तीन निदेशकों के पास कुल 4 फीसदी शेयरधारिता है, इसमें से तीन फीसदी हिस्सेदारी नाबार्ड के पास है। एफएमसी के नियमों के मुताबिक जिंस एक्सचेंजों को स्वतंत्र निदेशकों का प्रतिनिधित्व कम से कम 50 फीसदी बनाए रखना जरूरी है हालांकि शेयरधारक निदेशकों के संबंध में कोई शर्त नहीं है।

हालांकि तकनीकी कारणों से अकेले सबसे बड़े शेयरधारक को निदेशक मंडल में प्रतिनिधित्व नहीं दिया जा सकता है। इसलिए निदेशक मंडल में प्रतिनिधित्व उचित ढंग से नहीं हो पाता है। इस महीने की शुरुआत में एफएमसी ने एक्सचेंज की पसंद के प्रबंध निदेशक की नियुक्ति को भी यह कहकर ठुकरा दिया था कि नियुक्ति करने के लिए उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है। इस महीने होने वाली एमसीएक्स निदेशक मंडल की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा होगी। आमतौर पर निदेशक मंडल द्वारा बनाई गई समिति प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी के बारे में फैसला करती है लेकिन एफएमसी ने एक्सचेंज से समिति के सदस्यों के नाम पर अनुमति लेने के लिए कहा है। ऐसे मुश्किल मामले ऐसे समय में सामने आ रहे हैं जब एफएमसी का विलय सेबी के साथ होने जा रहा है।

पिछले साल एमसीएक्स पर एफटीआईएल की निकासी को लेकर जबरदस्त दबाव था। एफएमसी ने ऐसा होने तक किसी भी करार और नई योजनाओं को अनुमति देना बंद कर दिया था। इसी दौरान प्रबंध निदेशक और सीईओ पद पर मनोज वैश आए और तीन महीने में ही छोड़ गए। एफटीआईएल की निकासी के बाद एक्सचेंज को नए शेयरधारक मिल गए। इसके बाद इसके कारोबार और बाजार हिस्सेदारी में तेजी दर्ज की गई। हालांकि एक साल से बगैर प्रबंध निदेशक का गुजारा कर रहे एमसीएक्स के लिए एफएमसी-सेबी विलय के बाद मौजूदा स्टॉक एक्सचेंजों से मुकाबला करना खासा मुश्किल हो सकता है। इस बीच एमसीएक्स ने पूर्ववर्ती एमसीएक्स स्टॉक एक्सचेंज में हिस्सेदारी पांच फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दी गई।

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