बिजनेस स्टैंडर्ड - मोबाइल बैंकिंग की सुरक्षा का नक्शा
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मोबाइल बैंकिंग की सुरक्षा का नक्शा
तिनेश भसीन /  05 31, 2015

तकनीक ने बैंकिंग को बहुत तेज और सुविधाजनक बना दिया है। ग्राहकों के लिए इसे और आसान बनाने के लिए कई बैंकों ने हाल में ग्राहकों को सोशल मीडिया के जरिये भी धन प्रेषण की पेशकश की है। इसी महीने ऐक्सिस बैंक ने मल्टी सोशल पेमेंट ऐप पिंगपे पेश किया, जो ग्राहकों को फेसबुक, व्हाट्सऐप, ट्विटर, एसएमएस या ईमेल की संपर्क सूची में मौजूद व्यक्ति को रकम भेजने की सुविधा देता है। कोटक महिंद्रा बैंक ने केपे और आईसीआईसीआई बैंक ने पॉकेट्स के जरिये ऐसी पेशकश की है। 

सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार जितनी मोबाइल ऐप के इस्तेमाल में तेजी आएगी उतनी ही तेजी से खराब ऐप और साइबर अपराधों के मामले भी बढ़ेंगे। अप्रैल में भारतीय रिजर्व बैंक को व्हाट्सऐप पर बताए जा रहे एक मोबाइल ऐप्लिकेशन के बारे में चेतावनी जारी करनी पड़ी थी। आरबीआई के चिह्नï वाले इस ऐप के बारे में दावा किया गया था कि ग्राहक महज इस सॉफ्टवेयर के जरिये अपने सभी बैंक खातों पर नजर रख सकेंगे। क्विक हील टेक्नोलॉजिज के मुख्य तकनीक अधिकारी और सह-संस्थापक संजय काटकर बताते हैं, 'आज की तारीख में लैपटॉप /डेस्कटॉप पर नेट बैंकिंग सर्विसेज के बजाय मोबाइल ऐप्स ज्यादा सुरक्षित हैं। ऐसा इसलिए नहीं कि ऐप्स बहुत सुरक्षित होते हैं बल्कि इसलिए कि अभी तक हैकरों और साइबर अपराधियों का ध्यान मोबाइल ऐप्स पर नहीं गया है।' वह बताते हैं कि मोबाइल ऐप्स के जरिये अभी बहुत अधिक संख्या में लोग बैंकिंग का काम नहीं करते हैं, जबकि नेट बैंकिंग से लेनदेन करने वालों की तादाद बहुत अधिक है। आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार 58.9 करोड़ बैंक खाताधारकों में से महज 2.2 करोड़ ग्राहक ही मोबाइल बैंकिंग ऐप्स का उपयोग करते हैं।

हालांकि बैंकों ने अपने ऐप्स को काफी सुरक्षित बनाया है और वे फर्जी लेनदेन रोकने के लिए दोतरफा सत्यापन का इस्तेमाल करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी परिस्थितियों में सुरक्षा में सबसे बड़ी चूक डेटा चोरी के तौर पर होती है, जिस पर बैंकों का कोई जोर नहीं होता है। जब लोग गूगल प्ले स्टोर या ऐपल ऐप स्टोर के अतिरिक्त किसी असत्यापित स्रोत से ऐप डाउनलोड करते हैं या फिर उनके स्मार्टफोन में मौजूद ऐप्स उन्हें किसी थर्ड पार्टी वेबसाइट पर लेकर जाते हैं तो साइबर अपराधी मैलिशियस ऐप्स प्लांट कर देते हैं। काटकर कहते हैं, 'मैलिशियस ऐप्स स्क्रीन शॉट्स ले सकते हें और यूजर द्वारा प्रविष्ट की जाने वाली जानकारी रिकॉर्ड कर लेते हैं। इसके अतिरिक्त वे बैंकिंग ऐप्स में भी कमियों का लाभ उठाते हैं।' इस डेटा का उपयोग बाद में जाल में फंसाने या पैसा चुराने के लिए किया जा सकता है।

2015 की पहली तिमाही के लिए क्विक हील क्वार्टरली थ्रेट रिपोर्ट के अनुसार पिछले कुछ महीनों में ऐंड्रॉयड मोबाइल बैंकिंग ऐप्स पर मैलवेयर हमले हो रहे हैं। जैसे ऐंड्रॉयड रोबा ही लें, इस मैलवेयर को बैंकिंग ट्रोजन के नाम से भी जाना जाता है और यह दिखने में बेहद विश्वसनीय ऐप भी लगता है लेकिन इसे विशेष तौर पर वित्तीय एवं निजी जानकारी जैसे के्रडिट कार्ड की जानकारी, ऑनलाइन बैंकिंग लॉगइन व निजी जानकारी चुराने के लिए बनाया जाता है।

आप भी इनके शिकार नहीं बनें, यह सुनिश्चित करने के लिए आप गैर-आधिकारिक वेबसाइटों से ऐप्स डाउनलोड करने से परहेज करें। कोटक महिंद्रा बैंक के कार्यकारी उपाध्यक्ष (डिजिटल गतिविधियां) दीपक शर्मा कहते हैं, 'यूजरों को सिर्फ गूगल प्ले स्टोर और ऐपल ऐप स्टोर से ही डाउनलोड करना चाहिए क्योंकि इनसे मैलिशियस ऐप्स को नियमित तौर पर हटाया जाता है।' वह यूजरों को सलाह देते हैं कि वे उन सॉफ्टवेयर और ऐप्स बनाने वालों के बारे में जांच पड़ताल जरूर कर लें जिन्हें हाल में लॉन्च किया गया है और जिनके बहुत कम यूजर हैं।

एक बार कोई साइबर अपराधी आपके सोशल मीडिया अकाउंट में सेंध लगा लें तो भी उसे आपके बैंक खाते की जानकारी नहीं मिलेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि यूजरों को इसकी पहुंच सुरक्षित रखनी चाहिए। ज्यादातर लोग सेशन पूरा होने पर भी अपने सोशल मीडिया अकाउंट से लॉग आउट नहीं करते हैं। इसलिए जरूरी है कि अपना अकाउंट सुरक्षित रखने के लिए हमेशा लॉग इन नहीं रहे। ऐक्सिस बैंक के प्रमुख (खुदरा ऋण और भुगतान) जयराम श्रीधरन कहते हैं कि अनाधिकृत एक्सेस से बचने के लिए फोन को भी पासवर्ड से सुरक्षित करने की जरूरत है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि मौजूदा ऐप्स आपको किसी थर्ड पार्टी वेबसाइट पर लेकर नहीं जाए इसके लिए स्मार्टफोन पर सिक्योरिटी सॉफ्टवेयर जरूर डाउनलोड कर लें।

Keyword: mobile banking, social media, whatsapp, twitter, RBI,,
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