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स्वर्ण जमा पर करमुक्त ब्याज!
बीएस संवाददाता / मुंबई May 19, 2015

सरकार ने बजट में घोषित स्वर्ण मुद्रीकरण योजना के तहत बैंकों में सोना जमा करने और इस जमा पर मिलने वाले ब्याज पर आयकर, संपत्ति कर या पूंजीगत प्राप्ति कर से छूट का प्रस्ताव किया है। इस पहल के तहत मंगलवार को स्वर्ण मुद्रीकरण योजना का खाका पेश किया, जिसमें छोटे निवेशकों को आकर्षित करने का भी प्रयास किया गया है। दरअसल इस योजना में न्यूनतम 30 ग्राम सोना जमा कराने का प्रावधान किया गया है, जबकि मौजूदा स्वर्ण जमा योजना में कम से कम 500 ग्राम सोना जमा कराने की व्यवस्था है। वित्त मंत्रालय ने सभी हितधारक ों से योजना के मसौदे पर 2 जून तक राय मांगी है। योजना के मसौदे में ब्याज दर तय करने का निर्णय बैंकों पर छोड़ दिया गया है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इस पर 1 फीसदी के करीब ब्याज दिया जा सकता है और परिपक्वता राशि का भुगतान सोने के तौर पर किया जा सकता है।

मूलधन और ब्याज दोनों का भुगतान सोना जमा करने वालों को दिया जाएगा, जो सोने के मूल्य के बराबर होगा। उदाहरण के तौर पर अगर कोई ग्राहक 100 सोना जमा करता है और उसे 1 फीसदी ब्याज मिलता है तो 1 साल बाद परिपक्वता पर उसे 101 ग्राम सोना या उसका मूल्य मिलेगा। हालांकि जमाकर्ता के पास यह विकल्प भी होगा कि वह परिपक्वता पर सोना भी ले सकते हैं लेकिन इसका निर्णय उन्हें जमा करने के समय ही बताना होगा। इस योजना के तहत जमा होने वाले सोने के इस्तेमाल के लिए बैंकों को कई विकल्प दिए गए हैं, जिनमें सोना बेचकर विदेशी मुद्रा जुटा निर्यातकों-आयातकों को कर्ज देने, सोने को सिक्कों में ढालकर ग्राहकों को बेचने और आभूषण निर्माताओं को कर्ज देने में किया जा सकता है। बैंकों को घरेलू जिंस एक्सचेंजों में सोना खरीदने और बेचने की भी अनुमति होगी।

मौजूदा स्वर्ण जमा योजना में ये विकल्प नहीं हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक इस पहल का मकसद बैंकों को जमाकर्ताओं को ज्यादा से ज्यादा ब्याज देने के लिए प्रोत्साहित करना है। सरकार ने कहा कि इस योजना को शुरुआती दौर में चुनिंदा शहरों में ही पेश किया जाएगा। हालांकि समय के साथ इसका विस्तार अन्य शहरों में भी किया जाएगा। विश्व स्वर्ण परिषद के भारत में प्रबंध निदेशक सोमसुंदरम पीआर ने कहा, 'यह मसौदा व्यावहारिक प्रतीत होता है। एक बार प्रोत्साहन प्रारूप तैयार होने के बाद ग्राहक और अन्य लोग इसका लाभ उठा सकते हैं और घरों में पड़ा सोना भी बाहर निकल सकता है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को भी फायदा होगा।'

इस योजना का मकसद घरों और संस्थानों के पास बेकार जमा सोने को काम में लाना है, जिससे आभूषण क्षेत्र की आयात निर्भरता भी कम होगी। मसौदा प्रारूप में सोने की शुद्घता जांचने के लिए 350 हॉल मार्किंग केंद्र का प्रस्ताव है, जहां शुरुआती दौर में सोने की शुद्घता को एक्सआरएफ मशीन के जरिये 45 मिनट में परखा जाएगा और बाद में यहां ग्राहकों द्वारा लाए गए सोने को उनके सामने ही तीन से चार घंटे में पिघलाया जाएगा। इसके बाद अगर ग्राहक उसे बैंक में जमा कराना चाहें तो केंद्र शुद्घता और वजन प्रमाण पत्र जारी करेंगे इसके शुल्क का भुगतान बैंक द्वारा किया जाएगा। इनमें से आधो हॉलमार्किंग केंद्र ज्वैलरों द्वारा स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों द्वारा जारी प्रमाण पत्र के आधार पर बैंक ग्राहक का स्वर्ण बचत खाता खोलेंगे और सोना व ब्याज का भुगतान सोने की कीमत के आधार पर उसी खातें में जमा कराया जाएगा। ब्याज का भुगतान 30 या 60 दिनों में किया जाएगा। योजना की परिपक्वता अवधि 1 साल की होगी।

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