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जल्द रीट पेश करेंगे डेवलपर्स
मानसी तनेजा / नई दिल्ली May 01, 2015

भारत में जल्द रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (रीट) पेश हो सकता है क्योंकि न्यूनतम वैकल्पिक कर से जुड़े नियमों में सरकार की तरफ से नरमी के बाद डेवलपर्स और निवेशक इसे लेकर काफी उत्साहित हैं। इस क्षेत्र पर नजर रखने वाले विश्लेषकों के मुताबिक, रीट की राह में सबसे बड़ी बाधा मैट थी और अब कई कंपनियां इस बाबत अपनी योजना की समीक्षा शुरू करेंगी, जो मैट समेत दूसरे कर मसले के चलते अटकी हुई थी। गुरुवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि रीट व इनवीट (इन्फ्रास्ट्रक्चर ऐंड रिटल एस्टेट ट्रस्ट्स) की यूनिट वाले एसपीवी में शेयरों के हस्तांतरण से अर्जित काल्पनिक लाभ पर मैट लागू नहीं होगा। देश की सबसे बड़ी रियल एस्टेट कंपनी डीएलएफ, के रहेजा, सुपरटेक, फीनिक्स मॉल्स और ब्लैकस्टोन समेत प्राइवेट इक्विटी कंपनियां रीट पेश करने की योजना बनाई थी, लेकिन कराधान के विभिन्न मसलों पर स्पष्टीकरण की प्रतीक्षा कर रही थीं।

रीट की स्थापना के समय एसपीवी के शेयर के बदले यूनिट के हस्तांतरण से होने वाले पूंजीगत लाभ व मैट का क्रियान्वयन निवेश के ऐसे उपकरण पेश करने में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक रही है। डीएलएफ समूह के सीएफओ अशोक त्यागी ने कहा, यह फैसला प्रमुख नीतिगत अवरोध को दूर करता है और ऐसे ट्रस्ट की स्थापना को मजबूती प्रदान करेगा। इसके अलावा प्रायोजक व निवेशकों को अन्य वित्तीय प्रोत्साहन पर पूंजीगत कर लाभ से छूट रियल एस्टेट ट्रस्ट्स को और ज्यादा उपयुक्त व आकर्षक बनाएगा। इस बाबत छूट की घोषणा हाल में की गई है। उन्होंने कहा, डीएलएफ पहले ही रीट पेश करने के इरादे की घोषणा कर चुकी है और इस साल वह पहला रीट पेश करने के लिए प्रतिबद्ध है, जो आवश्यक मंजूरी पर निर्भर करेगा।

नांगिया ऐंड कंपनी के पार्टनर राहुल जैन ने कहा, इस साल बजट में ऐसे लेनदेन पर पूंजीगत लाभ के बारे में स्पष्टीकरण दिया गया था, लेकिन मैट इस पर लागू था। ऐसे में इसका कोई मतलब नहीं था क्योंकि यह लाभ काल्पनिक था, क्योंकि इस लेनदेन के जरिए नकदी अर्जित होती है। संशोधन से रीट को बड़ी राहत मिलेगी क्योंकि कर तभी लागू होगा जब रीट के यूनिट बेचे जाएंगे। उन्हें उम्मीद है कि इस साल रीट पेश कर दिए जाएंगे। हालांकि उन्होंंने यह भी कहा कि लाभांश वितरण कर की समाप्ति रीट्स के लिए बेहतर होता।

जैन के मुताबिक, रीट्स के लिए एसपीवी की तरफ से दिए जाने वाले लाभांश पर 15 फीसदी डीडीटी लगेगा। रीट की तरफ से आय के वितरण पर स्थानीय यूनिटधारकों को 10 फीसदी टीडीएस देना होगा जबकि अप्रवासी यूनिटधारकों को 5 फीसदी। इसके अलावा ऐसी आय वैयक्तिक यूनिटधारकों के हाथों भी करयोग्य होगी। कम प्रतिफल पर कुल कर प्रभाव काफी ऊंची होगी, जो रीट में निवेश में बाधक के तौर पर सामने आ सकती है। सरकार रीट को डीडीटी के दायरे से बाहर रखने पर विचार कर सकती थी, खास तौर से तब जबकि रीट को अपनी पट्टा किराया आय का 90 फीसदी यूनिटधारकों को देना जरूरी है। रीट म्युचुअल फंड की तरह हैं, जिसे सूचीबद्ध कराया जा सकता है और स्टॉक एक्सचेंजों पर इसकी ट्रेडिंग हो सकती है। इन्हें अपनी आय का ज्यादातर हिस्सा लाभांश के तौर पर वितरित करना होता है।

Keyword: real estate, home, housing, reits,,
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