बिजनेस स?टैंडर?ड - रीट से पीछे हटी ब्लैकस्टोन
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रीट से पीछे हटी ब्लैकस्टोन
राघवेंद्र कामत / मुंबई April 23, 2015

केंद्र सरकार ने भले ही रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट (रीट) लाने वालों को रियायतें देने का फैसला कर लिया है, लेकिन कंपनियां रीट पेश करने से हिचक रही हैं। कर से जुड़ी दिक्कतें होने की वजह से कंपनियां फिलहाल इसमें हाथ नहीं डाल रही हैं। इस फेहरिस्त में पहला नाम ब्लैकस्टौन और एंबेसी के साझे उपक्रम का है, जिसने देश में 2 अरब डॉलर का रीट सूचीबद्घ कराने की अपनी योजना मुल्तवी कर दी है।

निजी इक्विटी फर्म ब्लैकस्टोन और रियल एस्टेट समूह एंबेसी के इस साझे उपक्रम के पास दफ्तरों के लिए करीब 2.7 करोड़ वर्ग फुट जगह मौजूद है और उससे रकम कमाने के लिए उसने रीट लाने की योजना बनाई थी। एंबेसी ऑफिस पाक्र्स के मुख्य कार्याधिकारी मार्क हॉलैंड ने कहा, 'हमने कर ढांचे की वजह से अपनी योजना पर विराम लगा दिया, जिसने इसकी चमक मंद कर दी है।'

रीट रियल एस्टेट म्युचुअल फंड की तरह है, जिसका एक्सचेंज पर कारोबार होता है। अमेरिका, ब्रिटेन और सिंगापुर जैसे देशों में यह काफी लोकप्रिय है। हॉलैंड ने बताया, 'हम रकम जुटाने के लिए विभिन्न विकल्प तलाश रहे हैं। इसमें विदेश में सूचीबद्घ कराना, निवेशकों द्वारा निजी निवेश और वाणिज्यिक मॉर्गेज आधारित प्रतिभूतियों (सीएमबीएस) जैसे विकल्प शामिल हैं।' उन्होंने बताया कि चूंकि रीट पारदर्शी और बेहतर ढांचे वाला माध्यम होता है, इसलिए यह काफी आकर्षक होता है। खबरों के अनुसार साझा उपक्रम इस साल जून में रीट पेश करने और बाद में उसे सूचीबद्घ कराने की योजना बना चुका था। रीट के तहत आने वाली कुछ प्रमुख परियोजनाओं में बेंगलूरु में एंबेसी टेक विलेज (जहां फ्लिपकार्ट ने हाल में लंबी अवधि के लिए पट्टïा लिया है), पुणे में एंबेसी टेक जोन, बेंगलूरु में ही मान्यता बिजनेस पार्क और एंबेसी गोल्फ लिंक्स जैसी परियोजनाएं शामिल हैं।

बिज़नेस स्टैंडर्ड ने पिछले दिनों ही खबर दी थी कि ब्लैकस्टोन और देश की प्रमुख रियल एस्टेट कंपनी डीएलएफ के बीच एक सौदा रीट से संबंधित कर प्रावधानों की वजह से अटक सकता है। उद्योग जगत के सूत्रों के अनुसार कराधान से जुड़े मसलों के चलते बड़ी कंपनियों में से कोई भी रीट्स पेश करने के बारे में नहीं सोच रही है। डीएलएफ, फीनिक्स मिल्स, के रहेजा कॉर्प जैसे प्रॉपर्टी डेवलपर्स उन कंपनियों में शुमार हैं, जो रीट्स के जरिये अपनी परिसंपत्तियों को भुनाने की संभावनाएं तलाश रही थीं।

सरकार ने रीट्स पेश करने के लिए केंद्रीय बजट में कुछ रियायतों का ऐलान किया था। लेकिन रियल एस्टेट कंपनियां और कर विशेषज्ञों को लगता है कि न्यूनतम वैकल्पिक कर (मैट) और लाभांश वितरण कर (डीडीटी) के मसले पर स्पष्टïता नहीं होने से रीट्स के रास्ते में रोड़े अटक सकते हैं। केपीएमजी में कर सेवाओं के सह-प्रमुख पुनीत शाह ने बताया कि भारत में दो बार मैट का भुगतान करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री ने बजट में जिस रियायत का ऐलान किया, उसके कोई मायने नहीं रह गए क्योंकि मैट दो बार देना होगा। सबसे पहले शेयरों को रीट में भेजने पर मैट वसूला जाएगा और उसके बाद रीट की इकाइयां बेचने पर भी मैट वसूला जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि मंत्री ने स्टांप ड्यूटी को लेकर स्पष्टï रुख पेश नहीं किया, जो कि राज्य का विषय है।

Keyword: black stone, reit, real estate,,
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