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उत्तर भारतीयों के मसले पर राजनीति
सुशील मिश्र / मुंबई March 30, 2015

महाराष्टï्र में कोई बड़ा चुनाव सिर पर नहीं है और केवल विधानसभा की दो सीटों पर उपचुनाव और दो महानगरपालिकाओं के लिए चुनाव होने वाले हैं लेकिन राज्य की राजनीति में दूसरे प्रांत के लोगों का मसला एक बार फिर सर उठाने लगा है। चुनाव क्षेत्रों में उत्तर भारतीय मतदाताओं की अच्छी खासी तादाद होने के चलते सभी पार्टियां इन्हें अपने पाले में करने में जुटी हैं। कांग्रेस जहां खुद को उत्तर भारतीयों का सबसे बड़ा हितैषी साबित करने पर तुली है तो वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का कहना है कि दूसरे प्रांतों के लोगों के साथ भेदभाव करना कांग्रेस की फितरत रही है। 
इस बीच मुंबई भाजपा अध्यक्ष आशिष शेलार ने मुंबई में बढ़ती भीड़ को रोकने के लिए अलग बजट का प्रस्ताव लाने का सुझाव दिया। विपक्षी दल शेलार के बयान को राजनीतिक रंग देने में जुट गए हैं और वे एक सुर में शेलार का इस्तीफा मांगने पर अड़ गए हैं। मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष संजय निरुपम ने शेलार के बयान की निंदा करते हुए कहा कि दूसरे राज्यों के लोगों को महाराष्ट्र या मुंबई में आने से रोकने वाले किसी भी प्रस्ताव का वह विरोध कर रहे हैं क्योंकि हर भारतीय नागरिक को देश के किसी भी हिस्से मेंं जाकर अपनी अजीविका चलाने का अधिकार है। वहीं राष्टï्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) नेता छगन भुजबल ने कहा कि ऐसा कोई बजट बनाने की जरुरत नहीं है क्योंकि एक राज्य से दूसरे राज्य आने जाने और नौकरी पेशा करना लोगों का सामाजिक अधिकार है। 
भाजपा भी इस मामले में अपना पूरा बचाव कर रही है। पार्टी प्रवक्ता माधव भंडारी ने कहा कि दरअसल कांग्रेस हमेशा देश को तोडऩे की बात करती रही है, जबकि भाजपा सभी हिंदुस्तानियों को एक मानती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दल प्रांतीय कार्ड खेलकर उसका राजनीतिक लाभ लेना चाहते हैं लेकिन भाजपा के राज में यह संभव नहीं।
भाजपा इस मुद्दे पर बात करने से बच रही है तो कांग्रेस इसको बहस का मुद्दा बनाने की पूरी कोशिश में लगी हुई है। सोशल मीडिया में भी यह मसला कभी कभार जोर पकड़ता रहता है। पिछले साल हुए लोकसभा और विधानसभा चुनाव में कांग्रेस बुरी तरह हार गई। इस हार की सबसे बड़ी वजह उत्तर भारतीयों का कांग्रेस से मोहभंग होना माना जा रहा है।
उत्तर भारतीय मतदाता इन दोनों चुनावों में भाजपा खेमे में खड़ा नजर आया था। अब कांग्रेस नेता किसी तरह उत्तर भारतीयों को अपने साथ लाना चाह रहे है क्योंकि मुंबई और आसपास के इलाकों में उत्तर भारतीय मतदाता निर्णायक भूमिका अदा करने वाले साबित हो रहे हैं। यही वजह है कि कांग्रेस ने उत्तर भारतीय नेता संजय निरुपम को मुंबई कांग्रेस का अध्यक्ष भी बनाया है।

Keyword: Maharashtra, north indians, political parties,
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