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खत्म होगा भूमि अध्यादेश!
अर्चिस मोहन / नई दिल्ली March 20, 2015

विपक्ष के बढ़ते दबाव और पार्टी में भी असहमति के चलते नरेंद्र मोदी सरकार भूमि अधिग्रहण अध्यादेश की वैधता को समाप्त होने देने का मन बना सकती है।  5 अप्रैल को समाप्त हो रहे इस अध्यादेश की वैधता से पहले इस विषय पर अंतिम फैसला मंत्रिमंडल द्वारा लिया जाएगा। भूमि अधिग्रहण विधेयक के विरोध में एकजुट विपक्ष जो सरकार द्वारा अपनाए गए अध्यादेश का रुखों का विरोध करती नजर आ रही थी, इस फैसले को अपने जीत के रूप में देख रही है।
वहीं सरकार के रणनीतिकारों का कहना है कि विधेयक को समाप्त किया जाना फैसला एक अस्थायी उपाय होगा ताकि बजट सत्र के दूसरे हिस्से के दौरान राज्यसभा में विधेयक पेश किए जाने से पहले इससे जुड़े पक्षकारों से चर्चा की जा सके। बजट सत्र का दूसरा हिस्सा 20 अप्रैल से दोबारा शुरू होगा।
वहीं लोकसभा द्वारा विधेयक पारित किया जा चुका है। सरकार को उम्मीद है कि वह भूमि अधिग्रहण विधेयक में कुछ विपक्षी दलों को सहयोग जरूर हासिल कर लेगी। हालांकि सप्ताह के आंरभ में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता में सभी विपक्षी दलों ने संसद से राष्टï्रपति तक विरोध प्रदर्शन किया था। लेकिन सप्ताह के अंत तक विपक्षी एकता कुछ हल्की होती दिखाई दी। जब कुछ गैर कांग्रेसी दल और गैर-वाम दलों ने आज राज्यसभा में खनन व खनिज और कोयला विधेयक का समर्थन किया।
इसके पहले सरकार के वरिष्ठï रणनीतिकारों द्वारा यह सुझाव दिया गया था कि दोनों सदनों की संयुक्त बैठक बुलाने के विकल्प पर विचार किया जा सकता है। इस विकल्प का इस्तेमाल बहुत ही कम मौकों पर किया गया है। हालांकि सरकार के एक वरिष्ठï मंत्री का दावा है कि अध्यादेशों को पारित कराने के लिए सरकारें दर्जनों बार इस विकल्प को प्रयोग में करती रही है। संविधान के अनुच्छेद 123 के तहत सरकार अध्यादेश को तभी लागू कर सकती है जब संसद के दोनों सदन में सत्र नहीं चल रहा हो। केंद्र सरकार आर्थिक सुधारों में तेजी लाने के लिए दिसंबर अंत में और जनवरी माह की शुरुआत में करीब आधा दर्जन अध्यादेश लेकर आई थी।


जल्द आ सकती है नई दवा नीति
बीएस संवाददाता
हैदराबाद
केंद्र सरकार दवा उद्योगों में नवाचार और विकास को प्रोत्साहन देने की दिशा में जल्द ही कुछ कदमों की घोषणाएं कर सकती है। रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के तहत आने वाले औषधी विभाग के सचिव वी के सुब्बूराज ने कहा कि इन कदमों में नई दवा नीति की भी घोषणा हो सकती है साथ ही दवा क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देने वाले कदम भी शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि इन्हें एक महीने के भीतर घोषित किया जाएगा।
राष्टï्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (नाइपर) के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए सुब्बूराज ने कहा कि भारत, अब विश्व की औषधीय जरूरतों को पूरा करने की योजना तैयार कर रही है। उन्होंने बताया कि भारत से विश्व के करीब समस्त राष्टï्र में दवा का निर्यात किया जाता है। दवा उद्योग की प्रशंसा करते हुए वह बोले की यह आज देश की गौरवशाली और सफल इंडस्ट्री है, जो विश्व के करीब 220 देशों में दवा निर्यात कर रही है साथ ही करीब 60 फीसदी वैक्सीन का भारत में ही निर्माण में किया जाता है। अगले दस वर्षों की संभावनाओं पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी उम्मीद है कि यह उद्योग मौजूदा 2 लाख करोड़ रुपये के स्तर से करीब पांच गुना तक बढ़ जाएगा।
सुब्बूराज के मुताबिक विश्व के लिए बोझ बनी तमाम बीमारियों से भारत सबसे अधिक जूझ रहा है।  इसमें ह्रïदय संबंधी रोग, क्षय रोग, कैंसर, अंधापन और मानसिक  विकांलगता प्रमुख है। इस कारण आज घरेलू दवा उद्योग के सामने नवाचार और विकास संबंधी काफी अवसर मौजूद है।
भारत में 30 फीसदी ह्रïदय रोग, 25 फीसदी क्षय रोग, 12 फीसदी कैंसर, 25 फीसदी अंधापन और 25 फीसदी मानसिक विकलांगता के रोगी है। उन्होंने गुणवत्ता मानक के इतर नाइपर की समस्त मौजूदा क्षमताओं को बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। मोहाली के अतिरिक्त, अन्य केंद्रों में अजीब तरह को ठहराव देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि उद्योग जगत की जरूरत हजारों फार्मेसी स्नातकों की है लेकिन इन संस्थानों द्वारा हर वर्ष महज 600 छात्रों को ही निकाला जा रहा है। वह बोले की शोध कार्यों में मोहाली शीर्ष पर है, जहां दो नए ड्रग अणुओं को विकसित किया गया है।

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