Editorial: हादसों के पीछे छिपे भ्रष्टाचार और लापरवाह शहरी शासन की कहानी
दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) 22 (14 विदेशी नागरिकों सहित) लोगों की मौत के बाद सक्रिय हो गया है। ये मौतें दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर में बेड ऐंड ब्रेकफास्ट (बीऐंडबी) होटल में आग लगने से हुई थीं। इससे जुड़ी सार्वजनिक स्मृति और आधिकारिक उत्साह जल्द ही कम हो जाएगा। लेकिन इस तरह की सिलसिलेवार त्रासदियों […]
आगे पढ़े
शास्त्री भवन को अलविदा: सत्ता के गलियारों की अनगिनत गाथाएं समेटे, खुले और जनसुलभ शासन की पहचान
लंबे समय से एक महत्त्वपूर्ण सरकारी इमारत रहा नई दिल्ली के राजेंद्र प्रसाद रोड पर मौजूद शास्त्री भवन जल्द ही ध्वस्त किए जाने के कगार पर पहुंच चुका है। हाल ही में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, इमारत के मुख्य भाग में पिछले 60 वर्षों से मौजूद प्रसिद्ध चित्रकार और वास्तुकार सतीश गुजराल के भित्ति-चित्रों […]
आगे पढ़े
क्या तेल संकट के दौर में भारत की महंगाई नियंत्रण नीति जरूरत से ज्यादा सख्त है?
इसमें संदेह नहीं कि भारत का मुद्रास्फीति को लक्षित करने वाला ढांचा मुद्रास्फीति घटाने में कामयाब रहा है। इसके पहले हमें लगातार उच्च मुद्रास्फीति का सामना करना पड़ता था, वास्तविक ब्याज दरें ऋणात्मक रहती थीं और वृहद आर्थिक मोर्चे पर अक्सर अस्थिरता रहती थी। मुद्रास्फीति की दर अक्सर दो अंकों के करीब रहती थी। इससे […]
आगे पढ़े
पेट्रोलियम मूल्य निर्धारण की उलझी पहेली: बाजार आधारित कीमतों को लागू करने में क्यों हिचक रही सरकार?
कितने लोगों को याद है कि सरकार ने वर्ष 2002 में पेट्रोलियम उत्पादों के लिए प्रशासित मूल्य निर्धारण तंत्र (एपीएम) खत्म कर दिया था और उसी वर्ष 1 अप्रैल से पेट्रोल एवं डीजल के लिए बाजार आधारित मूल्य निर्धारण का ऐलान किया था? तब से दो दशक गुजर जाने के बाद भी सरकार यह निर्णय […]
आगे पढ़े