प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
Modular Health Insurance: आज के दौर में खराब लाइफस्टाइल और बढ़ता प्रदूषण लोगों को तेजी से बीमारियों की ओर धकेल रहा है। ऐसे में खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रखने के लिए हेल्थ इंश्योरेंस होना बेहद जरूरी हो गया है। लेकिन अक्सर लोग एक शिकायत करते हैं कि बाजार में मिलने वाली पारंपरिक बीमा पॉलिसियों में उन्हें उन चीजों के लिए भी प्रीमियम देना पड़ता है, जिनकी उन्हें कभी जरूरत ही नहीं होती। इसी समस्या को दूर करने के लिए इंश्योरेंस सेक्टर में एक नया और बेहद व्यावहारिक ट्रेंड तेजी से पकड़ रहा है, जिसे ‘मॉड्यूलर हेल्थ प्लान’ कहा जाता है। यह नया कॉन्सेप्ट हेल्थ इंश्योरेंस की दुनिया को पूरी तरह बदल रहा है और ग्राहकों को अपनी मर्जी के मुताबिक सुरक्षा चुनने की आजादी दे रहा है।
अगर आसान शब्दों में कहें तो मॉड्यूलर हेल्थ प्लान एक ऐसी बीमा पॉलिसी है जिसे ग्राहक अपनी जरूरत के हिसाब से खुद तैयार (कस्टमाइज) कर सकते हैं। यह पारंपरिक या ट्रेडिशनल इंश्योरेंस की तरह कोई रेडीमेड या पहले से तय पैकेज नहीं होता। इसे आप किसी रेस्टोरेंट के ‘मेन्यू कार्ड’ की तरह समझ सकते हैं, जहां आप अपनी पसंद की चीजें चुनकर अपनी थाली खुद सजाते हैं।
इस नए इंश्योरेंस ट्रेंड पर बात करते हुए विभवांगल अनुकूलकरा प्राइवेट लिमिटेड (Vibhavangal Anukulakara Pvt. Ltd.) के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर सिद्धार्थ मौर्या बताते हैं, “मॉड्यूलर हेल्थ इंश्योरेंस प्लान ऐसे इंश्योरेंस प्रोडक्ट हैं जो ग्राहकों को एक रेडीमेड पैकेज लेने के बजाय अपनी पसंद के हिसाब से कवरेज के जरूरी मॉड्यूल्स को चुनने और इंश्योरेंस को कस्टमाइज करने का मौका देते हैं।”
मैर्या कहते हैं कि पारंपरिक इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स में कवरेज और बेनिफिट्स पहले से तय होते हैं, जबकि मॉड्यूलर हेल्थ प्रोडक्ट्स एक मेन्यू की तरह होते हैं जिसमें कोई भी व्यक्ति मैटरनिटी कवरेज, क्रिटिकल इलनेस कवर, आउट-पेशेंट (OPD) सर्विसेज जैसे बेनिफिट्स जोड़ सकता है। यह एक ‘पर्सनलाइज्ड ऑप्शन’ देता है जिससे यह पक्का होता है कि लोगों को उस चीज के लिए पैसे नहीं देने पड़ेंगे जिसकी उसे बिल्कुल जरूरत नहीं है।
इसी बात को आगे बढ़ाते हुए स्क्वायर इंश्योरेंस के को-फाउंडर और CEO आकाश पारवाल कहते हैं, “मॉड्यूलर हेल्थ प्लान में ग्राहकों को अपनी जरूरत के हिसाब से हेल्थ इंश्योरेंस चुनने की आजादी मिलती है। आम हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियों में मिलने वाले फायदे पहले से तय होते हैं, लेकिन मॉड्यूलर प्लान में ग्राहक बेस हेल्थ कवर से शुरुआत कर सकते हैं और अपनी जरूरत के अनुसार OPD, मैटरनिटी, क्रिटिकल इलनेस, वेलनेस या पर्सनल एक्सीडेंट कवर जैसे अतिरिक्त बेनिफिट्स बाद में जोड़ सकते हैं।”
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अब तक हेल्थ इंश्योरेंस के बाजार में ‘वन-साइज-फिट्स-ऑल’ यानी सबके लिए एक जैसा नियम चलता आ रहा था। चाहे आपकी उम्र 25 साल हो या 50 साल, कंपनी ने जो पैकेज बना दिया, आपको वही लेना पड़ता था। लेकिन मॉड्यूलर प्लान ने ग्राहकों को इस मजबूरी से पूरी तरह आजाद कर दिया है। इसमें आपको अपनी उम्र, हेल्थ रिस्क और परिवार के हिसाब से पॉलिसी में बदलाव करने की पूरी छूट मिलती है।
इस पहलू पर सिद्धार्थ मौर्या कहते हैं, “मॉड्यूलर हेल्थ स्कीम्स की सबसे बड़ी खासियत इसका आसान होना है। इसमें पॉलिसीहोल्डर अपनी उम्र, स्वास्थ्य की स्थिति, परिवार की जरूरतों और आर्थिक हालात के हिसाब से हेल्थ इंश्योरेंस प्लान को अपनी जरूरत के मुताबिक तैयार कर सकते हैं। ग्राहक बेस कवर के साथ-साथ क्रिटिकल इलनेस कवर, मैटरनिटी बेनिफिट्स, हेल्थ वेलनेस प्रोग्राम, एक्सीडेंटल डेथ कवर, OPD बेनिफिट्स और ज्यादा सम इंश्योर्ड जैसे अतिरिक्त विकल्प भी चुन सकते हैं। कुछ बीमा कंपनियां डिडक्टिबल और को-पेमेंट की शर्तों में बदलाव की सुविधा भी देती हैं। इस वजह से लोग जीवन के अलग-अलग चरणों में बदलती मेडिकल जरूरतों के हिसाब से अपने इंश्योरेंस कवर को आसानी से ढाल सकते हैं।”
आकाश पारवाल भी इस बात से पूरी तरह सहमत हैं। वे कहते हैं, “ये प्लान लोगों के लिए दूसरे इंश्योरेंस प्लान से आसान हो सकते हैं। ग्राहक अपनी उम्र, पारिवारिक स्थिति, स्वास्थ्य जोखिमों और बजट के आधार पर कवरेज चुन सकते हैं, जिससे हेल्थ इंश्योरेंस एक ‘वन-साइज-फिट्स-ऑल’ प्रोडक्ट के बजाय अधिक पर्सनलाइज्ड हो जाता है।”
एक आम नौकरीपेशा या मिडिल क्लास आदमी के लिए हेल्थ इंश्योरेंस खरीदते समय सबसे बड़ी चिंता प्रीमियम का खर्च होता है। अक्सर लोग महंगे प्रीमियम से बचने के लिए या तो हेल्थ इंश्योरेंस लेने से ही पीछे हट जाते हैं या फिर कम कवरेज वाली पॉलिसी चुनते हैं। मॉड्यूलर प्लान इस समस्या का आसान हल देता है। इनमें लोग केवल उन्हीं सुविधाओं के लिए पेमेंट करते हैं जिनकी उन्हें वास्तव में जरूरत होती है, जिससे बजट और जरूरी कवरेज के बीच बेहतर संतुलन बनाना आसान हो जाता है।
इस संतुलन को समझाते हुए मौर्या कहते हैं, “मॉड्यूलर हेल्थ प्लान लोगों को कवरेज और प्रीमियम के खर्च के बीच सही संतुलन बनाने का मौका देते हैं। इसमें पूरे पैकेज के लिए पेमेंट करने की बजाय ग्राहक केवल उन्हीं सुविधाओं को चुन सकते हैं जिनकी उन्हें वास्तव में जरूरत है। इससे प्रीमियम पर खर्च किया गया पैसा ज्यादा प्रभावी तरीके से इस्तेमाल होता है। उदाहरण के तौर पर, एक युवा कामकाजी व्यक्ति मैटरनिटी कवर की जगह क्रिटिकल इलनेस कवर को प्राथमिकता दे सकता है, जबकि छोटे बच्चों वाले परिवार के लिए मैटरनिटी बेनिफिट्स ज्यादा उपयोगी हो सकते हैं।”
हालांकि, वे यह भी आगाह करते हैं कि सिर्फ प्रीमियम का खर्च कम रखने के लिए जरूरी कवरेज से समझौता नहीं करना चाहिए। ग्राहकों को प्लान चुनते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि कम प्रीमियम के चक्कर में उनका बीमा कवर इतना कम न हो जाए कि जरूरत पड़ने पर मेडिकल खर्चों को पूरा ही न कर सके। दूसरे शब्दों में, लागत बचाने की कोशिश में खुद को जरूरत से कम बीमित (अंडर-इंश्योर्ड) करना किसी समय नुकसानदायक भी साबित हो सकता है।
लागत और सामर्थ्य के पहलू पर आकाश कहते हैं, “मॉड्यूलर हेल्थ प्लान ग्राहकों को कवरेज और प्रीमियम के बीच बेहतर संतुलन बनाने में मदद करते हैं। इसमें लोगों को केवल उन्हीं सुविधाओं के लिए पेमेंट करना पड़ता है जिनकी उन्हें सच में जरूरत होती है। इससे जरूरी सुरक्षा बनाए रखते हुए प्रीमियम का खर्च नियंत्रित रखा जा सकता है। यही वजह है कि ऐसे प्लान पॉलिसीहोल्डर्स के लिए बेहतर वैल्यू और ज्यादा किफायती विकल्प साबित हो सकते हैं।”
वैसे तो मॉड्यूलर हेल्थ प्लान हर उन लोगों के लिए सबसे बेहतर है जो अपने पैसों की सही कीमत चाहता है, लेकिन कुछ खास वर्ग ऐसे हैं जिनके लिए यह किसी वरदान से कम नहीं हैं। जिनकी जरूरतें वक्त और उम्र के साथ तेजी से बदलती हैं, उन्हें इससे सबसे ज्यादा फायदा होता है।
सिद्धार्थ मौर्या बताते हैं, “मॉड्यूलर हेल्थ प्लान का सबसे बड़ा फायदा यह है कि ये उन ग्राहकों की जरूरतों को पूरा करते हैं जिनकी मेडिकल जरूरत उम्र, जीवन के पड़ाव और पारिवारिक स्थिति पर बहुत अधिक निर्भर करती हैं। युवा प्रोफेशनल्स, पहली बार इंश्योरेंस खरीदने वाले लोग, न्यूक्लियर फैमिली और जो लोग सेल्फ-एम्प्लॉयड (खुद का काम करने वाले) हैं, वे अक्सर मॉड्यूलर हेल्थ प्लान की वर्सेटैलिटी से फायदा उठाते हैं। इस तरह के प्लान उन ग्राहकों के लिए भी मददगार हैं जो एक किफायती प्लान की तलाश में हैं और बाद में इसमें और अधिक बेनिफिट्स जोड़ना चाहते हैं। गर्भवती महिलाएं, पुरानी बीमारियों से पीड़ित लोग और क्रिटिकल इलनेस आदि के लिए भी लोग मॉड्यूलर हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी का फायदा ले सकते हैं।”
भले ही मॉड्यूलर हेल्थ प्लान आपको असीमित आजादी देते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आंखें बंद करके कोई भी मॉड्यूल चुन लिया जाए। एक समझदार ग्राहक की तरह आपको कुछ बेहद तकनीकी और जरूरी बातों को अच्छे से जांच-परख लेना चाहिए ताकि क्लेम के वक्त कोई परेशानी न आए।
सिद्धार्थ मौर्या का कहना है कि मॉड्यूलर हेल्थ प्लान चुनने से पहले ग्राहकों को अपनी मौजूदा और भविष्य की स्वास्थ्य जरूरतों, मेडिकल हिस्ट्री और लाइफस्टाइल से जुड़े जोखिमों का सही आकलन करना चाहिए। उन्हें यह भी देखना चाहिए कि वे किस तरह के कवरेज का प्रीमियम आराम से चुका सकते हैं। इसके अलावा, यह समझना जरूरी है कि पॉलिसी में कौन-से फायदे पहले से शामिल हैं और किन अतिरिक्त सुविधाओं के लिए अलग से प्रीमियम देना पड़ेगा। ग्राहकों को एक्सक्लूजन (क्या कवर नहीं है), वेटिंग पीरियड, सब-लिमिट, क्लेम सेटलमेंट का अनुभव, नेटवर्क हॉस्पिटल्स और पॉलिसी रिन्यूअल की शर्तों जैसी बातों पर भी ध्यान देना चाहिए।
साथ ही, किसी भी अतिरिक्त मॉड्यूल की कीमत और उससे मिलने वाले वास्तविक फायदे की तुलना करना भी जरूरी है, ताकि सही फैसला लिया जा सके।
इसी मुद्दे पर आकाश पारवाल भी कुछ अहम बातों पर ध्यान देने की सलाह देते हैं। उनका कहना है कि किसी भी मॉड्यूलर हेल्थ प्लान को चुनने से पहले ग्राहकों को बेस कवरेज, वेटिंग पीरियड, पॉलिसी में शामिल नहीं की गई स्थितियों (एक्सक्लूशन्स), नेटवर्क हॉस्पिटल्स, क्लेम सर्विस की गुणवत्ता और मौजूद ऐड-ऑन सुविधाओं के वास्तविक फायदे का अच्छी तरह आकलन कर लेना चाहिए।
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भारत में स्वास्थ्य को लेकर चिंताएं और जागरूकता दोनों बढ़ी हैं। लोग अब अधिक जागरूक हो रहे हैं और अपनी गाढ़ी कमाई को सही जगह निवेश करना चाहते हैं। यही वजह है कि आने वाले समय में कस्टमाइज्ड प्लान्स की मांग बहुत ज्यादा बढ़ने वाली है।
भारत के तेजी से बढ़ते हेल्थ इंश्योरेंस बाजार का एक बड़ा आंकड़ा साझा करते हुए आकाश पारवाल कहते हैं, “भारत का हेल्थ इंश्योरेंस मार्केट तेजी से आगे बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम 1 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है, जो स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर बढ़ती जागरूकता और मांग को दिखाता है। बढ़ती मेडिकल महंगाई और पर्सनलाइज्ड सॉल्यूशंस की बढ़ती जरूरत के बीच मॉड्यूलर हेल्थ प्लान्स को अच्छा रिस्पॉन्स मिलने की उम्मीद है। हेल्थ इंश्योरेंस का भविष्य डिजिटल, फ्लेक्सिबल और ग्राहक-केंद्रित प्रोडक्ट्स की ओर बढ़ता दिख रहा है, जो लोगों को अपनी बदलती जरूरतों के अनुसार कवरेज चुनने की सुविधा देते हैं।”