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अनुकूल वैश्विक माहौल को देखते हुए, विशेष रूप से अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ व्यापार करारों के चलते, आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के अनुसंधान प्रमुख पंकज पांडेय ने पुनीत वाधवा को ईमेल साक्षात्कार में बताया कि निवेशक मौजूदा स्तरों पर निवेश कर सकते हैं। संपादित अंश:
हम घरेलू शेयर बाजारों को लेकर सकारात्मक हैं क्योंकि भारत में कम मुद्रास्फीति, कम बॉन्ड यील्ड और बेहतर वृद्धि का आकर्षक जोड़ है। यह शेयर बाजारों के लिए सकारात्मक नजरिया है। इस समय प्रमुख चालक घरेलू आर्थिक स्थितियों का सुदृढ़ीकरण है, विशेष रूप से उपभोग-आधारित सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में वृद्धि और भारत-अमेरिका और भारत-यूरोपीय संघ के बीच व्यापार समझौतों के कारण टैरिफ संबंधी तनाव में कमी आना। एक अन्य सहायक कारक 2025-26 की तीसरी तिमाही में कंपनियों की अच्छी कमाई है।
वैश्विक बाजार में भारत के पक्ष में रुझान बदलने से हमें उम्मीद है कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों का प्रदर्शन बड़े शेयरों की तुलना में बेहतर रहेगा। पिछले दो दशकों के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि लगातार दो वर्षों तक स्मॉलकैप शेयरों में गिरावट की संभावना कम (14 फीसदी) है। 2025 में स्मॉलकैप इंडेक्स में करीब 6 फीसदी की गिरावट और अपने सर्वकालिक उच्च स्तर से करीब 13 फीसदी की गिरावट को देखते हुए 2026 में दो अंकों में रिटर्न के साथ तेजी फिर से शुरू होने की संभावना (86 फीसदी) ज्यादा है।
अनुकूल वैश्विक माहौल को देखते हुए, विशेष रूप से अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ भारत से संबंधित व्यापार समझौतों के चलते, निवेशक मौजूदा स्तर पर निवेश कर सकते हैं। ओवरवेट : पूंजीगत सामान, बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं और बीमा (बीएफएसआई), सूचना प्रौद्योगिकी, रियल एस्टेट। अंडरवेट : ऑटो व धातु
एसटीटी में वृद्धि केवल वायदा और विकल्प (एफऐंडओ) सेगमेंट तक सीमित है, जिसका मकसद सट्टेबाजी पर अंकुश लगाना है। चूंकि इक्विटी सेगमेंट में कोई बदलाव नहीं हुआ है, इसलिए हम निवेशकों के भरोसे पर किसी बड़े असर की संभावना नहीं देखते हैं। ब्रेक-ईवन स्तर अधिक होने के कारण हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडरों और स्कैल्पर्स को सबसे ज्यादा नुकसान होने की संभावना है। नए एसटीटी कीमत ढांचे के अनुरूप ढलने और उसी हिसाब से समायोजित होने में बाजारों को कुछ समय लगेगा। नए कर नियमों के लागू होने के बाद निकट भविष्य में वॉल्यूम में गिरावट आ सकती है। अपेक्षाकृत कम तरलता के कारण स्टॉक फ्यूचर पर इसका प्रभाव दूसरे एफऐंडओ सेगमेंट की तुलना में अधिक रहने की उम्मीद है।
उच्च प्रतिफल और नरम ब्याज दरों को देखते हुए डेट में निवेश आकर्षक लग रहा है। निवेशकों को अपने निश्चित आय निवेश को बनाए रखना चाहिए। हालांकि हम शेयरों को लेकर सकारात्मक हैं, मौजूदा स्तरों पर तटस्थ निवेश और बाजार में थोड़ी गिरावट आने पर चरणबद्ध निवेश करना ज्यादा संतुलित रणनीति हो सकती है। कीमती धातुओं में निवेश, विशेष रूप से मजबूत तेजी के बाद, लक्षित परिसंपत्ति आवंटन के निचले स्तर पर होना चाहिए
हमें उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2027 में कंपनियों की आय में दो अंकों में वृद्धि होगी और निफ्टी 50 की आय में सालाना आधार पर 16 फीसदी की वृद्धि का अनुमान है। वित्त वर्ष 2027 के बारे में अनुमान है कि बीएफएसआई सेगमेंट में मजबूत दो अंकों की आय वृद्धि हो सकती है, जो क्रेडिट की निरंतर रफ्तार, स्थिर परिसंपत्ति गुणवत्ता और परिसंपत्तियों पर बेहतर प्रतिफल से संभव होगी। पूंजीगत वस्तुएं बेहतर निष्पादन और पूंजीगत व्यय चक्र में पुनरुद्धार के कारण वृद्धि को और बढ़ावा दे सकती हैं। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की दर में कटौती के बाद मांग में निरंतर तेजी आने से ऑटो सेक्टर को लाभ मिलने की उम्मीद है।
हमें उम्मीद है कि 2026 में बीएफएसआई, आईटी, पूंजीगत वस्तुएं और रियल एस्टेट बेहतर प्रदर्शन करेंगे। बीएफएसआई : ऋण वृद्धि में सुधार, मजबूत परिसंपत्ति गुणवत्ता और ऐतिहासिक औसत के करीब मूल्यांकन आकर्षक जोखिम-लाभ अनुपात मुहैया कराते हैं, विशेष रूप से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में।
आईटी : तीव्र गिरावट के बाद मूल्यांकन में सुधार होता दिख रहा है और 2026 में वृद्धि में तेजी आने का अनुमान है। पूंजीगत वस्तुएं : नए प्रोजेक्टों और निविदाओं में तेजी से प्रगति 2026 में मजबूत ऑर्डर गतिविधियों का संकेत देती है।
रियल एस्टेट: वृद्धि की अपार संभावनाएं हैं। अगले पांच वर्षों में इस क्षेत्र का आकार तीन गुना हो सकता है।
निकट भविष्य में फेड के ब्याज दरों में कटौती करने की संभावना कम है। आगे का निर्णय लेने से पहले वह आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर बारीकी से नजर रखेगा। फेड अध्यक्ष जेरोम पॉवेल के उत्तराधिकारी के कार्यकाल के दूसरे भाग में ब्याज दरों में कटौती की ज्यादा संभावना है। भारत में आरबीआई द्वारा अगले छह से बारह महीनों तक बेंचमार्क रीपो दर में बदलाव नहीं करने की उम्मीद है।