इक्विटी बाजार में बार-बार होने वाले उतार-चढ़ाव के बावजूद प्रमुख श्रेणियों की ज्यादातर ऐक्टिव इक्विटी योजनाएं पिछले एक साल में अपने बेंचमार्क से ज्यादा रिटर्न देने में कामयाब रहीं। इससे निवेशकों को कुछ राहत मिली।
मुख्य श्रेणियों में स्मॉलकैप फंड अपने बेंचमार्क के मुकाबले सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले फंडों के तौर पर उभरे। इनमें सबसे ज्यादा निवेश खाते भी हैं। वैल्यू रिसर्च के आंकड़ों के मुताबिक 30 में से 24 योजनाओं ने एक साल की अवधि में निफ्टी स्मॉलकैप 250 ने टोटल रिटर्न इंडेक्स (टीआरआई) से बेहतर प्रदर्शन किया। फ्लेक्सीकैप फंडों ने भी काफी अच्छा प्रदर्शन किया।
आंकड़ों से पता चला कि 22 मई को समाप्त एक साल की अवधि में 40 में से 28 फ्लेक्सीकैप योजनाओं ने निफ्टी 500 टीआरआई को पीछे छोड़ दिया। लंबी अवधि में बेहतर प्रदर्शन का अनुपात और भी मजबूत रहा। इसमें 35 में से 26 योजनाओं ने तीन साल की अवधि में बेहतर प्रदर्शन किया।
हालांकि, लार्जकैप फंडों ने बाजार की दूसरी श्रेणियों के मुकाबले थोड़ा कमजोर प्रदर्शन किया। एक साल की अवधि में सिर्फ आधी योजनाएं ही बेहतर प्रदर्शन कर पाईं। मिडकैप फंडों का उम्दा प्रदर्शन अनुपात भी कम रहा, जो लगभग 57 फीसदी था। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐक्टिव योजनाओं का अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन, खासकर स्मॉलकैप सेगमेंट में, बाजार की बेहतर स्थिति और ज्यादा उतार-चढ़ाव के बीच बेहतर शेयर चुनने के ज्यादा मौकों की वजह से हुआ।
आनंद राठी वेल्थ के संयुक्त सीईओ फ़िरोज अजीज ने कहा, स्मॉलकैप ऐसा सेगमेंट है जहां शेयर चुनने की भूमिका बहुत अहम होती है और जिन फंड मैनेजरों के पोर्टफ़ोलियो फोकस्ड होते हैं और जिनके पास मजबूत भरोसे वाले शेयर होते हैं, वे बेंचमार्क इंडेक्स के मुकाबले काफी ज्यादा रिटर्न यानी अल्फा दे पाए हैं। फोनपे म्युचुअल फंड के प्रमुख नीलेश नाइक ने इस बेहतर प्रदर्शन का श्रेय बाजार में आई तेज गिरावट के बाद अच्छी गुणवत्ता वाले स्मॉलकैप शेयरों में हुई रिकवरी को दिया।
उन्होंने कहा, लगभग एक साल पहले स्मॉलकैप फंडों में काफी गिरावट देखने को मिली थी। वित्त वर्ष 25 की आखिरी तिमाही में निफ्टी स्मॉलकैप 250 टीआरआई लगभग 15 फीसदी नीचे था, जबकि निफ्टी 50 टीआरआई लगभग स्थिर रहा। ऐसी गिरावट के दौरान मजबूत फंडामेंटल्स वाले अच्छे शेयर भी नीचे गिर जाते हैं। लेकिन हालात सामान्य होने पर वे आम तौर पर फिर से ऊपर आ जाते हैं।
उन्होंने कहा, पिछले एक साल में स्मॉल कैप शेयरों में उतार-चढ़ाव बना रहा। फिर भी उनमें पॉइंट-टू-पॉइंट रिकवरी देखने को मिली है। नतीजतन, मजबूत फंडामेंटल पर फोकस करने वाले कई ऐक्टिव स्मॉल कैप फंड अपने बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन करने में कामयाब रहे हैं। निवेश के लिए ज्यादा विकल्पों की उपलब्धता ने स्मॉल-कैप सेगमेंट में अल्फा बनाने में भी मदद की है।
इक्विरस वेल्थ के प्रबंध निदेशक और बिजनेस प्रमुख अंकुर पुंज ने कहा, ऐक्टिव स्मॉल-कैप फंड सिर्फ 250 शेयरों वाले इंडेक्स तक ही सीमित नहीं होते बल्कि वे निवेश के लिए बहुत बड़े दायरे का फायदा उठा सकते हैं। इनमें लार्ज-कैप और मिड-कैप भी शामिल हैं। इससे उन्हें बाजार के विस्तार और लार्ज-कैप शेयरों की मज़बूती दोनों से लाभ उठाने में मदद मिली है। इन्फ्रा, फार्मा, हेल्थकेयर और बैंकिंग/फाइनैंशियल सर्विसेज के कुछ क्षेत्रों में हासिल सेक्टर-विशेष अल्फा ने भी चुनिंदा योजनाओं के बेहतर प्रदर्शन में योगदान दिया है।
बैंकिंग और आईटी जैसे बड़े सेक्टरों में कमजोरी के कारण लार्जकैप योजनाओं को ज्यादा मुश्किल हालात का सामना करना पड़ा। अजीज ने कहा, दूसरी ओर लार्जकैप फंडों को ज्यादा मुश्किल माहौल का सामना करना पड़ा है क्योंकि बैंकिंग और आईटी जैसे सेक्टर, जिनका लार्जकैप इंडेक्स में काफी ज्यादा भार होता होता है, ने पिछले एक साल में उम्मीद से कमजोर प्रदर्शन के दौर देखे हैं।