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गुजरात की नई डेटा सेंटर नीति से पावर और सोलर सेक्टर में आएगा बूम? जानिए निवेशकों के लिए क्या है मौका

गुजरात की नई डेटा सेंटर नीति से 6 लाख करोड़ रुपये के निवेश का रास्ता खुल सकता है। जानिए सोलर, BESS और पावर सेक्टर पर इसका क्या असर पड़ सकता है

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बीएस वेब टीम   
Last Updated- July 15, 2026 | 11:35 AM IST

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के बढ़ते इस्तेमाल के साथ दुनिया भर में डेटा सेंटर की मांग तेजी से बढ़ रही है। भारत भी इस दौड़ में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। इसी कड़ी में गुजरात सरकार ने नई डेटा सेंटर नीति का ऐलान किया है। इस नीति के तहत राज्य में 7.5 गीगावाट क्षमता वाले डेटा सेंटर विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे करीब 6 लाख करोड़ रुपये का निवेश आने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि इससे सोलर ऊर्जा, बैटरी स्टोरेज और पावर सेक्टर की कई कंपनियों के लिए बड़े अवसर पैदा हो सकते हैं।

ब्रोकरेज हाउस नुवामा का मानना है कि इस नीति का सबसे बड़ा फायदा रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर को मिलेगा। खासतौर पर सोलर और बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) की मांग में तेज बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

डेटा सेंटर लगाने वालों को क्या मिलेगा?

गुजरात सरकार ने डेटा सेंटर कंपनियों को कई तरह की वित्तीय मदद देने का ऐलान किया है। नुवामा के मुताबिक, बिजली की लागत पर करीब 22 प्रतिशत तक परिचालन सहायता मिल सकती है। इसके अलावा कुछ परियोजनाओं को 5 प्रतिशत तक पूंजीगत सहायता का भी फायदा मिलेगा। सरकार 20 साल तक प्रति यूनिट बिजली पर 1 रुपये की सब्सिडी देगी। बिजली शुल्क की पूरी भरपाई की जाएगी। वहीं धोलेरा में बनने वाले डेटा सेंटर को अतिरिक्त पूंजीगत सहायता और एसजीएसटी की वापसी जैसी सुविधाएं भी मिलेंगी।

सोलर और बैटरी की मांग क्यों बढ़ेगी?

नई नीति के तहत हर डेटा सेंटर को अपनी कम से कम 51 प्रतिशत बिजली नवीकरणीय ऊर्जा से लेनी होगी। इसका मतलब है कि बड़े डेटा सेंटरों को सोलर प्लांट और बैटरी स्टोरेज सिस्टम लगाने होंगे या ऐसी बिजली खरीदनी होगी। नुवामा का कहना है कि यही शर्त आने वाले वर्षों में सोलर कंपनियों के लिए सबसे बड़ा अवसर बन सकती है। डेटा सेंटरों के बढ़ने से सोलर बिजली की मांग भी लगातार बढ़ेगी।

14 निवेशकों ने दिखाई रुचि

रिपोर्ट के मुताबिक, गुजरात सरकार ने बताया है कि अब तक 14 निवेशकों ने डेटा सेंटर लगाने में रुचि दिखाई है। इन कंपनियों की कुल मांग सरकार के 7.5 गीगावाट के लक्ष्य से लगभग दोगुनी बताई जा रही है। इससे संकेत मिलता है कि आने वाले समय में राज्य डेटा सेंटर हब बन सकता है।

किस सेक्टर को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा?

नुवामा का मानना है कि नए डेटा सेंटर बनने से पूरी बिजली सप्लाई चेन को फायदा होगा। इसमें बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन, वितरण, उपकरण बनाने वाली कंपनियां और बैटरी स्टोरेज से जुड़ी कंपनियां शामिल हैं। हालांकि रिपोर्ट के मुताबिक सबसे ज्यादा फायदा सोलर पीवी कंपनियों को मिल सकता है। ब्रोकरेज का कहना है कि इस समय सोलर पीवी सेक्टर का वैल्यूएशन दूसरे पावर सेक्टर की कंपनियों के मुकाबले अपेक्षाकृत कम है, जबकि कमाई की वृद्धि मजबूत रहने की उम्मीद है।

अगले 10 साल में तेजी से बढ़ सकती है सोलर की मांग

नुवामा का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026 से 2035 के बीच भारत में सोलर बिजली की मांग और सोलर क्षमता, दोनों में सालाना 21 से 22 प्रतिशत की औसत दर से बढ़ सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, इस बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह एआई डेटा सेंटर और ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाएं होंगी। ब्रोकरेज का अनुमान है कि भविष्य में सोलर बिजली की कुल मांग में होने वाली वृद्धि का आधे से ज्यादा हिस्सा केवल एआई डेटा सेंटर और ग्रीन हाइड्रोजन से आएगा।

निवेशकों के लिए क्या संकेत?

नुवामा का मानना है कि गुजरात की नई नीति से शुरुआती डेटा सेंटर परियोजनाओं की आर्थिक व्यवहार्यता बेहतर होगी और निवेशकों का भरोसा भी बढ़ेगा। अगर दूसरे राज्य भी इसी तरह की नीतियां लाते हैं, तो आने वाले वर्षों में भारत में डेटा सेंटर, सोलर ऊर्जा और बैटरी स्टोरेज सेक्टर में बड़े निवेश देखने को मिल सकते हैं।

(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)

First Published : July 15, 2026 | 11:35 AM IST