प्रतीकात्मक फोटो
F&O Trading Volume: अगस्त में डेरिवेटिव बाजार में रोजाना के औसत अनुबंध 23 फीसदी घटकर लगभग 22.4 करोड़ रह गए। यह पिछले 13 महीनों का निचला स्तर है। इक्विटी डेरिवेटिव सेगमेंट में कुल ट्रेडिंग गतिविधियां लगातार तीसरे महीने घटीं, जिसका कारण नियामकीय बदलाव, ज्यादा प्रतिभूति लेनदेन कर यानी एसटीटी और कोलेटरल की बढ़ी हुई जरूरतों, का पूरी तरह से लागू होना रहा।
नियामक ने अगस्त के पहले हफ्ते में क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (सीएएस) भी शुरू किया और बाजार अभी इस बदलाव के हिसाब से ढल रहा है। इसका ऑप्शंस ट्रेडिंग पर भारी असर हुआ है।
नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक नियामकीय दखल और अनुबंध के आकार में बदलाव की वजह से डेरिवेटिव टर्नओवर में कुल मिलाकर सुस्ती आई है। लेकिन इसके बावजूद इक्विटी डेरिवेटिव सेगमेंट में व्यक्तिगत निवेशकों की बाजार हिस्सेदारी बढ़ती रही है।
एक्सचेंज ने अपनी सितंबर की ‘मार्केट पल्स’ रिपोर्ट में बताया कि अगस्त 2026 में कुल इक्विटी डेरिवेटिव नोशनल टर्नओवर में व्यक्तिगत निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़कर 32.9 फीसदी हो गई, जो एक साल पहले इसी अवधि में 29.9 फीसदी रही थी।
आंकड़ों से पता चलता है कि जो ट्रेडर कैश और डेरिवेटिव (एफऐंडओ) दोनों में ट्रेड करते थे, वे अब डेरिवेटिव में ज्यादा दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं और इससे बाहर निकल रहे हैं। दूसरी ओर, सिर्फ डेरिवेटिव में ट्रेड करने वालों की संख्या बढ़ रही है। पिछले एक साल में यह संख्या 20 लाख से बढ़कर 21 लाख हो गई है।
2016 के बाद से ऐसा कोई साल नहीं रहा, जब यह संख्या घटी हो। इस अवधि में कैश-मार्केट में हिस्सा लेने वालों की संख्या बढ़कर 358.5 लाख हो गई। वहीं, दोनों सेगमेंट में ट्रेड करने वालों की संख्या 2024 के 88.8 लाख से घटकर 63.2 लाख रह गई।
अगस्त में एनएसई पर इक्विटी कैश और इक्विटी डेरिवेटिव, दोनों ही सेगमेंट में लगातार तीसरे महीने ट्रेडिंग गतिविधियों में गिरावट आई और डेरिवेटिव में यह गिरावट ज्यादा तेजी से हुई। अगस्त में इक्विटी कैश सेगमेंट में रोजाना औसत कारोबार (एडीटी) 0.6 फीसदी (मासिक आधार पर) घटकर 1.2 लाख करोड़ रुपये रह गया।
इक्विटी ऑप्शंस में प्रीमियम 45 महीने के निचले स्तर यानी 15.7 फीसदी गिरकर 42,332 करोड़ रुपये पर आ गया। अगस्त में इक्विटी फ्यूचर्स में भी गतिविधियां घटीं। इसका एडीटी मासिक आधार पर 9.9 फीसदी घटकर 1.22 लाख करोड़ रुपये रहा।
अगस्त में इक्विटी फ्यूचर्स का रोजाना औसत कारोबार (एडीटी) मासिक आधार पर 9.9 फीसदी और सालाना आधार पर 17.3 फीसदी गिरकर 1.22 लाख करोड़ रुपये रह गया, जो पिछले 33 महीनों का निचला स्तर है। इसी के साथ, इक्विटी ऑप्शंस प्रीमियम टर्नओवर में भी काफी कमी आई। यह तिमाही आधार पर 15.7 फीसदी और सालाना आधार पर 10.6 फीसदी गिरकर 42,332 करोड़ रुपये रह गया।
मोबाइल या टैबलेट से ट्रेडिंग करने की ओर झुकाव और तेज हुआ। अगस्त में कुल इंडेक्स फ्यूचर्स टर्नओवर में मोबाइल-आधारित ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म का हिस्सा 19.8 फीसदी रहा, जो एक साल पहले 16.4 फीसदी रहा था। इसके उलट, इंडेक्स फ्यूचर्स टर्नओवर में कोलोकेशन सुविधाओं का योगदान एक साल पहले के 44.3 फीसदी से घटकर 40.2 फीसदी रह गया।
इंडेक्स से जुड़े अनुबंधों में गिरावट खास तौर पर ज्यादा देखी गई। वॉल्यूम में कमी के बावजूद अक्टूबर 2024 के स्तर की तुलना में इंडेक्स फ्यूचर्स के लिए ट्रेड का औसत आकार 72 फीसदी बढ़कर 24.4 लाख रुपये हो गया, जबकि कुल इंडेक्स फ्यूचर्स की ट्रेडिंग वैल्यू 60 फीसदी गिरकर एक दशक से भी ज्यादा समय के सबसे निचले स्तर पर आ गई। इंडेक्स ऑप्शंस के लिए रोजाना औसत प्रीमियम ट्रेडिंग वैल्यू 43 फीसदी गिरा।