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गिरावट के बाद सस्ते हुए IT stocks, क्या अब खरीदारी का समय? ब्रोकरेज ने बताए टॉप पिक

एआई को लेकर आशंकाओं से आईटी शेयरों में गिरावट, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार डिजिटल आधुनिकीकरण और एआई निवेश से मांग बनी रह सकती है; चुनिंदा मिडकैप में अवसर

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देवव्रत वाजपेयी   
Last Updated- March 02, 2026 | 2:15 PM IST

हाल के महीनों में आईटी सेवाओं, इंजीनियरिंग और सॉफ्टवेयर कंपनियों के शेयर गिरे हैं। लेकिन चॉइस इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की रिपोर्ट कहती है कि यह गिरावट कारोबार में अचानक कमजोरी की वजह से नहीं है। असल में निवेशकों को डर है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के कारण आगे चलकर इन कंपनियों की विकास दर कम हो सकती है। इसलिए शेयरों की कीमतों में कमी आई है। रिपोर्ट के मुताबिक बाजार यह मानकर चल रहा है कि एआई से भविष्य में आईटी सेवाओं की मांग घट सकती है। लेकिन सच्चाई यह है कि कंपनियां एआई को एकदम से नहीं अपनाएंगी। इसमें समय लगेगा और काफी निवेश भी करना होगा।

AI से पहले बड़े निवेश की जरूरत

रिपोर्ट के अनुसार एआई को बड़े स्तर पर अपनाने से पहले कंपनियों को काफी तैयारी करनी होगी। उन्हें अपने सिस्टम क्लाउड पर ले जाने होंगे, डेटा को बेहतर बनाना होगा और पुराने सिस्टम को आधुनिक करना होगा। इस सब पर भारी खर्च आएगा और यह प्रक्रिया कई साल चल सकती है।

इस दौरान आईटी सेवाओं की मांग बनी रह सकती है और कुल बाजार का आकार भी बढ़ सकता है।

हालांकि आगे चलकर एआई से काम की रफ्तार बढ़ेगी, जिससे पारंपरिक मेहनत आधारित कमाई मॉडल पर दबाव आ सकता है। उद्योग के अनुमान के मुताबिक अगले 2 से 3 साल में राजस्व वृद्धि पर 2 से 3 प्रतिशत तक असर पड़ सकता है। इसका ज्यादा असर उन सेवाओं पर होगा जो सीधे मानव श्रम पर निर्भर हैं।

कारोबार मॉडल में बदलाव

रिपोर्ट कहती है कि एआई आने के बाद आईटी कंपनियों का काम करने और पैसा कमाने का तरीका बदल रहा है। पहले कंपनियां घंटों और कर्मचारियों की संख्या के हिसाब से पैसा लेती थीं। अब वे काम के नतीजे के आधार पर शुल्क लेने की ओर बढ़ रही हैं। इसका मतलब है कि ज्यादा लोग रखना ही ज्यादा कमाई की गारंटी नहीं रहेगा। यह बदलाव खासकर मध्यम आकार की कंपनियों के लिए अच्छा हो सकता है, क्योंकि उनका खर्च कम होता है और वे जल्दी फैसले ले सकती हैं।

मार्जिन पर असर सीमित

चॉइस इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज का कहना है कि एआई से कमाई पर कुछ दबाव आ सकता है, लेकिन अभी और अगले कुछ समय तक कंपनियों का मुनाफा स्थिर रह सकता है। ऑटोमेशन, खर्च में कटौती और बेहतर प्रबंधन की मदद से कंपनियां अपना लाभ बचाए रख सकती हैं। हालांकि सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग और ग्राहक सहायता जैसी सेवाओं पर एआई का असर ज्यादा पड़ सकता है। वहीं इंफ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट और जटिल प्रोजेक्ट पर इसका असर कम हो सकता है।

चुनिंदा मिडकैप और स्मॉलकैप में अवसर

रिपोर्ट के मुताबिक हाल की गिरावट के बाद कई अच्छी मिडकैप और स्मॉलकैप आईटी कंपनियों के शेयर अब आकर्षक दाम पर मिल रहे हैं। अगले 12 से 18 महीनों में इनमें अच्छा जोखिम और रिटर्न का मौका बन सकता है। चॉइस इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने लंबी अवधि के निवेश के लिए कोफोर्ज, पर्सिस्टेंट सिस्टम्स, हैप्पीएस्ट माइंड्स और केपीआईटी टेक्नोलॉजीज को टॉप पिक बताया है।

डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।

First Published : March 2, 2026 | 2:15 PM IST