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अगले 5 साल में टूट सकते हैं गर्मी के सारे रिकॉर्ड, UN रिपोर्ट ने बढ़ाई दुनिया की चिंता

2015 के पेरिस जलवायु समझौते में दुनिया के देशों ने यह कोशिश करने का वादा किया था कि वैश्विक तापमान में वृद्धि 1.5 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा न हो

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एजेंसियां   
Last Updated- May 28, 2026 | 2:37 PM IST

Climate Change UN Report: संयुक्त राष्ट्र की मौसम एजेंसी और ब्रिटेन के मौसम विभाग ‘मेट ऑफिस’ की नई रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि आने वाले पांच सालों में दुनिया का औसत तापमान रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, आर्कटिक क्षेत्र में तापमान दुनिया के बाकी हिस्सों की तुलना में कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगले पांच वर्षों में वैश्विक औसत तापमान औद्योगिक क्रांति से पहले के स्तर यानी 1850-1900 के औसत से 1.3 डिग्री सेल्सियस से 1.9 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा रह सकता है। ब्रिटेन के मेट ऑफिस की वैज्ञानिक मेलिसा सीब्रुक ने कहा कि अब इसके साफ संकेत मिल रहे हैं कि पृथ्वी लगातार गर्म हो रही है और वैश्विक तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है।

Climate Change: 1.5 डिग्री सीमा पार होने का बढ़ा खतरा

2015 के पेरिस जलवायु समझौते में दुनिया के देशों ने यह कोशिश करने का वादा किया था कि वैश्विक तापमान में वृद्धि 1.5 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा न हो। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस सीमा के पार जाने पर बाढ़, सूखा, हीटवेव और तूफान जैसी चरम मौसम घटनाएं और ज्यादा खतरनाक हो सकती हैं।

नई रिपोर्ट में कहा गया है कि 2026 से 2030 के बीच कम से कम एक साल ऐसा हो सकता है जब वैश्विक तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा को पार कर जाए।

इसके अलावा रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगले पांच सालों में कोई एक साल 2024 से भी ज्यादा गर्म हो सकता है। 2024 अब तक का सबसे गर्म साल माना गया था, जब पहली बार वैश्विक तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया था। हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि किसी एक साल के लिए 1.5 डिग्री सीमा पार होने का मतलब यह नहीं है कि पेरिस समझौता पूरी तरह असफल हो गया है। यह लक्ष्य 20 साल के औसत तापमान पर आधारित है। लेकिन विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि दुनिया जितनी तेजी से गर्म हो रही है, इस सीमा के बार-बार पार होने की संभावना उतनी ही बढ़ती जाएगी।

मेलिसा सीब्रुक ने कहा कि विज्ञान साफ तौर पर बता रहा है कि 1.5 डिग्री लक्ष्य को बचाने का समय तेजी से खत्म हो रहा है।

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आर्कटिक में Climate Change का सबसे ज्यादा असर

रिपोर्ट के मुताबिक, अगले पांच सालों में उत्तरी गोलार्ध के आर्कटिक क्षेत्र में सर्दियों का तापमान वैश्विक औसत से साढ़े तीन गुना ज्यादा तेजी से बढ़ सकता है। यहां तापमान 1991-2020 के औसत से करीब 2.8 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहने का अनुमान है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि आर्कटिक में बढ़ती गर्मी के कारण समुद्री बर्फ तेजी से पिघलेगी। बारेंट्स सागर, बेरिंग सागर और ओखोटस्क सागर में मार्च महीने के दौरान बर्फ पिघलने की संभावना जताई गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि आर्कटिक में तेजी से बढ़ती गर्मी दुनिया के मौसम तंत्र को भी प्रभावित कर सकती है, जिससे कई देशों में ज्यादा गंभीर मौसम घटनाएं देखने को मिल सकती हैं।

कई क्षेत्रों में ज्यादा बारिश, कहीं सूखे का खतरा

रिपोर्ट के अनुसार, अगले पांच वर्षों में उत्तरी गोलार्ध के कई हिस्सों में सर्दियों के दौरान ज्यादा बारिश हो सकती है। उत्तरी यूरोप, अलास्का, साइबेरिया और साहेल क्षेत्र में मई से सितंबर के बीच अधिक बारिश का अनुमान है। इसके उलट अमेजन क्षेत्र में इस दौरान सूखे जैसी स्थिति बन सकती है।

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एल नीनो बढ़ा सकता है गर्मी

रिपोर्ट में इस साल सर्दियों के दौरान मजबूत एल नीनो बनने की संभावना भी जताई गई है, जो 2027 तक जारी रह सकता है। एल नीनो प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्र की सतह के तापमान के बढ़ने की स्थिति होती है। इसका असर पूरी दुनिया के मौसम पर पड़ता है और इससे वैश्विक तापमान और बढ़ सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर मजबूत एल नीनो विकसित होता है, तो आने वाले वर्षों में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी देखने को मिल सकती है। (रॉयटर्स के इनपुट के साथ)

First Published : May 28, 2026 | 2:31 PM IST