म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय सिर्फ रिटर्न देखना ही काफी नहीं होता है। फंड को चलाने और मैनेज करने में होने वाला खर्च भी निवेशक के लिए मायने रखता है। इसी खर्च को समझने के लिए अब बेस एक्सपेंस रेसियो यानी BER को देखा जाता है। यह म्यूचुअल फंड के खर्च से जुड़ा एक अहम आंकड़ा है।
SEBI के 2026 के नए नियमों के तहत म्यूचुअल फंड के खर्च से जुड़े नियमों में बदलाव किया गया है। अब बेस एक्सपेंस रेशियो में सरकारी और रेगुलेटरी चार्ज शामिल नहीं होंगे। इनमें सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT), कमोडिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (CTT), GST, स्टांप ड्यूटी, SEBI फीस और एक्सचेंज फीस जैसे चार्ज शामिल हैं। इन खर्चों को वास्तविक आधार पर अलग से लिया जा सकता है।
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BER और TER में क्या अंतर है?
आसान भाषा में समझें तो BER फंड के बेस खर्च को बताता है, जबकि TER यानी टोटल एक्सपेंस रेसियो म्यूचुअल फंड पर आने वाले कुल खर्च को दिखाता है। SEBI के नए नियमों के मुताबिक, TER में BER के अलावा ब्रोकरेज, ट्रेडिंग से जुड़े खर्च और दूसरे सरकारी व रेगुलेटरी चार्ज भी शामिल होंगे।
मान लीजिए किसी म्यूचुअल फंड का BER 1 फीसदी है। इसका मतलब है कि फंड का बेस खर्च सालाना 1 फीसदी है। हालांकि, निवेशक का कुल खर्च सिर्फ BER देखकर नहीं समझा जा सकता। ब्रोकरेज, ट्रांजैक्शन कॉस्ट और लागू सरकारी व रेगुलेटरी चार्ज भी कुल TER में शामिल हो सकते हैं।
म्यूचुअल फंड का यह खर्च निवेशक के बैंक खाते से अलग से नहीं काटा जाता। इन खर्चों का असर फंड की NAV यानी नेट एसेट वैल्यू पर पड़ता है। इसलिए किसी फंड में निवेश करते समय उसके खर्चों को देखना भी जरूरी होता है।
डायरेक्ट प्लान और रेगुलर प्लान में भी BER अलग हो सकता है। AMFI के मुताबिक, डायरेक्ट प्लान में डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़े खर्च और कमीशन शामिल नहीं होते। ऐसे प्लान से डिस्ट्रीब्यूशन कमीशन का पेमेंट भी नहीं किया जाता। इसी वजह से डायरेक्ट प्लान का खर्च आम तौर पर रेगुलर प्लान से अलग होता है।
निवेशक किसी म्यूचुअल फंड का BER, ब्रोकरेज कॉस्ट, ट्रांजैक्शन कॉस्ट और कुल TER देख सकते हैं। AMFI अपनी वेबसाइट पर इन आंकड़ों की रोजाना जानकारी देता है। इससे निवेशकों को अलग-अलग म्यूचुअल फंड स्कीम के खर्चों की तुलना करने में मदद मिलती है।