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UPI पर 0.02% MDR की जगह लग सकता है 5 रुपये का एकसमान शुल्क, शेयर ब्रोकरों को मिलेगी बड़ी राहत

पूंजी बाजार में UPI पेमेंट पर 300 रुपये तक MDR चार्ज की जगह 5 रुपये का फ्लैट शुल्क तय करने का प्रस्ताव सेबी के विचाराधीन है

प्रतीकात्मक तस्वीर

पूंजी बाजार में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के माध्यम से होने वाले लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) 0.02 फीसदी के बजाय 5 रुपये प्रति लेनदेन शुल्क तय किया जा सकता है। वर्तमान में इसकी अ​धिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है। शेयर ब्रोकरों द्वारा इस पर चिंता जताई गई थी।

सूत्रों के अनुसार प्रस्तावित बदलाव के लिए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) से औपचारिक प्रस्ताव की जरूरत होगी, उसके बाद भारतीय रिजर्व बैंक (अरबीआई) और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) से मंजूरी लेनी होगी। यह बदलाव बिल भुगतान और बीमा प्रीमियम के लिए यूपीआई के माध्यम से पहले से उपयोग की जा रही एकसमान शुल्क संरचना के अनुरूप होगा।

घटनाक्रम के जानकार एक व्यक्ति ने कहा, ‘शेयर ब्रोकरों की मांग है कि पूंजी बाजार के लिए यूपीआई लेनदेन पर 5 रुपये का एकसमान शुल्क लगे। जब बाजार नियामक की तरफ से औपचारिक प्रस्ताव आएगा तो आरबीआई और सरकार की मंजूरी मिलने के बाद इसे अ​धिसूचित किया जा सकता है। यह यूपीआई के जरिये बीमा प्रीमियम के भुगतान के लिए लगने वाले शुल्क की तरह होगा।’

इस बारे में जानकारी के लिए सेबी और एनपीसीआई को ईमेल भेजे गए मगर खबर ​लिखे जाने तक जवाब नहीं आया। एमडीआर वह शुल्क है जो व्यापारी डिजिटल भुगतान स्वीकार करने की सुविधा प्रदान करने के लिए अपने बैंक या भुगतान सेवा प्रदाता को देता है।

सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने कहा था कि बाजार नियामक यूपीआई के माध्यम से बड़ी रकम के भुगतान के लिए नई एमडीआर व्यवस्था पर शेयर ब्रोकरों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर विचार करेगा।

पूंजी बाजार के लिए एमडीआर को लेनदेन मूल्य के 0.02 फीसदी तक निर्धारित किया गया है, जिसमें म्युचुअल फंड, प्रतिभूतियों, शेयर ब्रोकरों, डीलरों और निवेश सलाहकारों को किए गए भुगतान के लिए 300 रुपये की अ​धिकतम सीमा है। एमडीआर शुल्क 15 अक्टूबर से प्रभावी होगा।

उक्त शख्स ने कहा, ‘कुल मिलाकर उद्योग को सालाना लगभग 125 करोड़ रुपये का भुगतान करना पड़ता। भारत में अधिकांश शेयर ब्रोकरों के पास सुदृढ़ व्यवसाय मॉडल है और वे इन लागत को वहन करने में सक्षम हैं।’

आंकड़ों के अनुसार अकेले अगस्त में शेयर ब्रोकर और डीलरों की श्रेणी में 8.41 करोड़ से अधिक यूपीआई लेनदेन दर्ज किए गए, जिनका कुल मूल्य 63,667.21 करोड़ रुपये था। एमडीआर ढांचे के सार्वजनिक होने के बाद ब्रोकर संगठनों ने सेबी को अपनी चिंताओं के बारे में लिखा था और परिचालन लागत में वृद्धि की समस्या को हल करने के लिए सक्रियता से चर्चा कर रहे हैं।

जीरोधा के संस्थापक नितिन कामत ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘मुझे लगता है कि एमडीआर ठीक है। यह ग्राहकों द्वारा लेनदेन किए बिना पैसा हस्तांतरण करने की समस्या का समाधान नहीं करता है लेकिन 300 रुपये की उच्च सीमा के बजाय यह एकसमान 5 या 10 रुपये प्रति लेनदेन उचित होगा।’

शेयर ब्रोकरों ने एमडीआर शुल्क पर चिंता जताई थी क्योंकि सेबी के नियम के मुताबिक ब्रोकरों को समय-समय पर ग्राहकों का बचा हुआ पैसा उन्हें वापस करना होता है। सेबी ने यह नियम इसलिए बनाया था ताकि ब्रोकर इस पैसे का गलत इस्तेमाल न कर सकें।

पूंजी बाजार लेनदेन के लिए यूपीआई एमडीआर ढांचे को एकसमान शुल्क में बदलने का फैसला ऐसे समय में हो रहा है जब कई अन्य श्रेणी में भी इसी तरह की शुल्क संरचना लागू है। 

First Published - सितंबर 18, 2026 | 10:52 PM IST

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