कर्जा लिया, परेशानी किस बात की?

Published by
बीएस संवाददाता
Last Updated- December 10, 2022 | 6:54 PM IST

यूबी समूह के अध्यक्ष विजय माल्या को अपने 14000 करोड़ रुपये के समूह की कर्ज स्थिति का ब्योरा देने में 10 दिन का समय लग सकता है। माल्या से श्यामल मजूमदार की बातचीत के प्रमुख अंश-
यूबी समूह की बैलेंस शीट काफी अस्त व्यस्त है। क्या आप इसे लेकर चिंतित नहीं हैं?
लोग मेरे बारे में कहते हैं कि हमारी गति धीमी पड़ गई है, लेकिन मेरे पिछले रिकॉर्ड को देखिए। 1990 में मैंने मंगलूर  केमिकल्स को खरीदने के लिए 800 करोड़ रुपये कर्ज लिया था। बहुत सारे लोग कह रहे थे कि मैं बर्बाद हो जाऊंगा। लेकिन आज की तारीख में मंगलूर केमिकल्स लाभ कमाने वाली कंपनी है।
2000 में मैंने पांच शराब कंपनी को खरीदने के लिए कर्ज लिए। इस बार फिर लोग मेरी वित्तीय स्थिति को लेकर बोलने लगे। मैं मानता हूं कि मैंने उन लोगों को हर हमेशा गलत साबित किया है। इसलिए इस बार भी चिंता की कोई बात नहीं है। मैं अपने बैलेंस शीट को दुरुस्त कर लूंगा।
आप कैसे ये सब करेंगे?
जो लोग बिना कुछ सोचे बोलते रहते हैं, उन्हें यह पता नहीं होता कि शराब और बीयर का बाजार सालाना 20 फीसदी की दर से बढ़ रहा है। अगर आप हमारी आमदनी को देखें, तो उस हिसाब से कंपनी द्वारा लिया गया कर्ज काफी कम है। इसके अलावा ह्वाइटी ऐंड मैके है।
अधिग्रहण के लिए ली गई कर्ज दो किस्तों में चुकाई जाएगी। अभी पहली किस्त चुकाने के लिए भी मेरे पास पांच साल का समय है। इसलिए इसमें पेरशान होने की क्या बात है?
डियाजियो यूनाइटेड स्प्रिट्स की हिस्सेदारी खरीदने की जल्दी में नहीं है। ऐसे में आपकी योजना क्या है?
यूनाइटेड स्प्रिट्स की हिस्सेदारी खरीदने की दौड़ में कई कंपनियों की दिलचस्पी है। सच तो यह है कि हमारी कंपनी अच्छा मुनाफा कमा रही है और इन मूल्यवान कंपनी को बेचने की कोई जल्दी नहीं है।
आपकी मुख्य समस्या किंगफिशर एयरलाइंस है। इस कंपनी पर कर्ज भी काफी ज्यादा हो गया है?
विमानन कंपनी को अपनी जगह बनाने में कम से कम 5-6 साल लगते हैं। किंगफिशर ने साढ़े तीन साल में ही देश की सबसे बड़ी निजी विमानन कंपनी बन गई। यह बड़ी उपलब्धि है।
आप पीई के जरिए 40 करोड़ डॉलर जुटा रहे हैं?
हम विभिन्न निवेशकों से इस बारे में बात कर रहे हैं। यह बात सब जानते हैं, खासकर विदेशी निवेशक की किंगफिशर की क्षमता क्या है। ऐसे में कंपनी को वैल्यूएशन में किसी तरह की कोई परेशानी नहीं होगी। लेकिन घरेलू विमानन कंपनी में विदेशी हिस्सेदारी का मामला सरकार के रुख पर निर्भर करेगा।

First Published : March 4, 2009 | 7:59 PM IST