वर्चुअल एजीएम में उपस्थिति अधिक, प्रस्तुति कम

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 14, 2022 | 11:47 PM IST

मौजूदा वैश्विक महामारी के दौर में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये होने वाले कंपनियों की वार्षिक आम बैठक (एजीएम) में अधिक से अधिक शेयरधारक भाग ले रहे हैं। लेकिन विडंबना यह है कि एजीएम में भाग लेने वाले शेयरधारकों की संख्या बढऩे के बावजूद उनका प्रतिनिधित्व कम ही दिखता है।
बिजनेस स्टैंडर्ड ने सेंसेक्स में शामिल 30 कंपनियों के लिए एजीएम में शेयरधारकों की उपस्थिति की जांच की। उनमें से 24 कंपनियों के आंकड़े उपलब्ध थे क्योंकि कुछ कंपनियों की वार्षिक आम बैठक होना अभी बाकी है। इन कंपनियों के एजीएम में प्रतिभागियों की संख्या में औसतन 54 फीसदी की वृद्धि देखी गई। हालांकि कुल शेयरधारिता के प्रतिशत में प्रतिभागियों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई। पिछले साल कुल शेयरधारकों के मुकाबले उनकी तादाद 0.08 फीसदी रही थी जो घटकर इस साल घटकर 0.06 फीसदी रह गई।  यह गिरावट मुख्य तौर पर शेयरधारतिा आधार में वृद्धि के कारण दिखी। सेंसेस कंपनियों के शेयर आधार में औसतन 1,60,000 की वृद्धि हुई है। दिसंबर 2019 के बाद करीब 50 लाख नए निवेशक खाते खुले हैं क्योंकि लॉकडाउन के दौरान काफी खुदरा निवेशकों ने बाजार में खरीद-फरोख्त करना शुरू कर दिया था।
नमूने में शामिल कपनियों के एजीएम में प्रतिभागियों की कुल संख्या 18,189 से बढ़कर 3,18,461 हो गई। इसमें कुछ शेयरधारकों का दोहराव भी शामिल हो सकता है क्योंकि कुछ शेयरधारक विभिन्न कंपनियों में समान हो सकते हैं। इसके अलावा नमूनों पर करीबी नजर डालने से पता चलता है कि इनमें से अधिकतर शेयरधारक एक कंपनी से हैं। आरआईएल ने बताया है कि 2019 में उसके एजीएम में 1,237 लोगों ने भाग लिया था जबकि 2020 के वर्चुअल एजीएम में उनकी संख्या बढ़कर 3,08,000 हो गई।
आईआईएएस के संस्थापक एवं एमडी अमित टंडन ने कहा कि पिछले साल के मुकाबले इस साल शेयरधारकों की आम बैठक में काफी उपस्थिति दिखी जिससे पता चलता है कि कंपनी के प्रस्तावों पर निवेशक किस प्रकार मतदान करते हैं। उन्होंने कहा कि कंपनी के प्रबंधन से बातचीत में दिलचस्पी रखने वालों में सभी नए निवेशक ही शामिल नहीं थे। टंडन ने कहा, ‘केवल वही लोग इसमें शामिल होंगे जो अधिक गंभीर हैं।’
निफ्टी500 सूचकांक की कंपनियों ने सितंबर 2020 में 311 बैठकें निर्धारित की हैं। जबकि सितंबर 2019 में यह संख्या महज 122 थी। आईआईएएस के आंकड़ों से पता चलता है कि अगस्त, जुलाई और जून में कम बैठकें हुईं।
घरेलू प्रॉक्सी सलाहकार फर्म इनगवर्न रिसर्च सर्विसेज के संस्थापक एवं एमडी श्रीराम सुब्रमण्यन के अनुसार, आगे एक ऐसे हाइब्रिड मॉडल का चलन बढ़ सकता है जहां वर्चुअल और फिजिकल दोनों तरीके से बैठकों का आयोजन किया जाएगा। इससे फिजिकल तौर पर मौजूद निवेशकों को प्रबंधन के साथ सीधी बातचीत के लिए बेहतर अवसर मिल सकेगा। जबकि वर्चुअल माध्यम उन लोगों को बैठक में शामिल होने का विकल्प उपलब्ध कराएगा जो बाहर हैं। सुब्रमण्यन ने कहा, ‘बुनियादी तौर पर इससे गतिरोध दूर होगा।’
फिजिकल एजीएम को पूरी तरह खत्म करना और केवल वर्चुअल माध्यम पर निर्भर रहने से कंपनी प्रबंधन का अधिक नियंत्रण कायम हो सकता है। सुब्रमण्यन ने कहा कि कंपनियां पहले ही प्रश्न पूछकर असुविधाजनक विषयों से बच सकती हैं। इसके अलावा वे असंतुष्ट शेयरधारकों की भागीदारी में भी बाधा डाल सकती हैं क्योंकि प्रौद्योगिकी प्लेटफॉर्म पर उनका ही नियंत्रण होगा।
सेंसेक्स में शामिल जिन कंपनियों के एजीएम में शेयरधारकों की भागीदारी में वृद्धि दर्ज की गई उनमें टाटा कंसल्टैंसी सर्विसेज (टीसीएस) और महिंद्रा ऐंड महिंद्रा (एमऐंडएम) शामिल हैं। टीसीएस के मामले में उपस्थिति पिछले साल 0.05 फीसदी रही थी जो बढ़कर इस साल 0.11 फीसदी हो गई। इसी प्रकार एमऐंडम के मामले में उपस्थिति पिछले साल 0.08 फीसदी रही थी जो बढ़कर इस साल 0.19 फीसदी हो गई।
महिंद्रा ऐंड महिंद्रा के प्रवक्ता ने कहा, ‘वर्चुअल प्लेटफॉर्म के कारण जगह की बाधा पूरी तरह खत्म हो गई। वर्चुअल प्लेटफॉर्म की प्रौद्योगिकी अब कहीं अधिक सरल और उपयोगकर्ताओं के अनुकूल है जिससे अधिक से अधिक शेयरधारकों की भागीदारी सुनिश्चित हुई।’ टीसीएस और रिलायंस ने इस बाबत जानकारी के लिए भेजे गए ईमेल का कोई जवाब नहीं दिया।

First Published : September 28, 2020 | 11:29 PM IST