चीनी खिलौनों के आयात से प्रतिंबध हटने से जहां कई खिलौना आयातकों की बल्ले-बल्ले हो गई है तो वहीं कई गम में डूबे नजर आ रहें है।
चीनी खिलौनों के आयात पर प्रतिबंध हटने से उन आयातकों को काफी आराम मिला है, जिनके आर्डर प्रतिंबध की वजह से अधर में लटक गये थे। लेकिन दूसरी तरफ आयात के लिए नए मानकों के जारी होने से आयातकों के लिए चीनी खिलौनों का आयात अब और भी टेड़ी खीर हो गया है।
टॉया एसोसिएशन ऑफ इंडिया (टीएआई) और खिलौना आयातकों के अनुसार चीन से आने वाले खिलौनों में लगभग 60 फीसदी खिलौने ऐसे है जो नए तय किये गये मानकों को पूरा नहीं कर पायेंगे।
ऐसे में प्रतिंबध हटने के बावजूद चीन से होने वाले खिलौना आयात उसी अनुपात में कम हो जायेगा। ऐसे में चीन से खिलौनों के आयात से जुडे क़ारोबारियों का कारोबार 30 से 40 फीसदी तक सीधे तौर पर प्रभावित होगा। गौरतलब है कि भारत की 4 हजार करोड़ रुपये की खिलौना इंडस्ट्री में चीनी खिलौनों की हिस्सेदारी करीब 40 फीसदी की है।
टीएआई के अध्यक्ष राजकुमार का कहना है कि’आयात के लिए भारत सरकार की तरफ से तय किये गये मानक अमेरिकी मानकों से ज्यादा समकक्ष है। जो पहले की अपेक्षा ज्यादा कड़े है। ऐसे में चीन से भारत को आयातित होने वाले खिलौनों की बहुत बड़ी खेप इन मानकों को पूरा नहीं कर पायेगी और प्रतिबंध हटने के बावजूद इन खिलौनों का आयात नहीं हो सकेगा। लेकिन तात्कालिक तौर पर प्रतिंबध हटने से उन आयातकों को सीधे तौर पर फायदा पहुंचा है, जिनके भुगतान हो चुके आर्डरों की पूर्ति प्रतिबंध लगने की वहज से लटक गई थी। ‘
नोएडा की डॉल्स एंड डॉल्स टॉया कंपनी के विजय गुप्ता बताते है कि ‘मेरी कंपनी ने 30 लाख रुपये का एक आर्डर चीनी खिलौनों के आयात के लिए दिया था। इसमें 15 लाख रुपये का भुगतान मैंने पहले ही कर दिया था। लेकिन प्रतिंबध लगने की वजह से मेरे आर्डर की आपूर्ति नहीं हो पा रही थी और चीनी कंपनी भुगतान राशि भी देने को तैयार नहीं थी। लेकिन अब प्रतिबंध हटने की वजह से मुझे कुछ आस बंधी है।’
गुस्सा भी है
चीनी खिलौनों पर आयात लगने से मौके का फायदा उठाने की आस रखने वाले खिलौना निर्मार्णकत्ता भी प्रतिबंध हटने से खासे नाराज लग रहे हैं। गाजियाबाद की खिलौना निर्माण करने वाली कंपनी गैलेक्सी टॉयस के आर पी सिंह बताते है कि ‘चीनी खिलौने पर प्रतिबंध लगने के बाद से भारतीय खिलौना बाजार मे अपनी पकड़ को मजबूत करने के भारतीय खिलाड़ियों के पास अच्छा मौका था।
इसके लिए कई खिलौना निर्मार्णकत्ताओं ने उत्पादन को बढ़ाने की योजना भी बनाई थी। कई निर्मार्णकत्ताओं ने बैंक से ऋण लेकर या स्ंवय की जमा पूंजी से उत्पादन बढ़ाने के लिए निवेश भी कर दिया था। लेकिन अब प्रतिबंध हटने की वजह से सब गुड़ गौबर होता नजर आ रहा है।’
वहीं टीएआई के अध्यक्ष राजकुमार का कहना है कि प्रतिबंध को हटे अभी 2 दिन ही हुए है। इसलिए इस पर किसी तरह की राय बनाना या अपनी कारोबारी योजना में किसी भी तरह का फेरबदल करना जल्द बाजी होगी।