मायटास पर कस रहा शिकंजा

Published by
बीएस संवाददाता
Last Updated- December 09, 2022 | 10:16 PM IST

सत्यम प्रकरण को देखते हुए आंध्र प्रदेश का सिंचाई विभाग उन परियोजनाओं की समीक्षा कर रहा है, जिनसे किसी भी तरह मायटास इन्फ्रा जुड़ी है। राज्य के सिंचाई विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी।


अधिकारी ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘हमलोग चालू परियोजनाओं में संलग्न मायटास इन्फ्रा की क्षमताओं और वित्तीय मजबूती का आकलन कर रहे हैं। सत्यम प्रकरण सामने आने के चलते ऐसा किया जा रहा है।’

आंध्र प्रदेश सरकार ने 2004 से अब तक 14 हजार करोड़ रुपये की अनेक सिंचाई परियोजनाओं को मायटास इन्फ्रा के जिम्मे दे रखा है। सिंचाई विभाग जल्यागनम परियोजना को पूरा करने के लिए कंपनी को अब तक 1,800 करोड़ रुपये आबंटित कर चुका है।

मायटास इन्फ्रा संयुक्त उपक्रम के अपने सहयोगियों के साथ कुल 30 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाएं हासिल कर चुका है। सड़क, बंदरगाह, सिंचाई और रेल परियोजनाओं के विकास की अनेक परियोजनाओं पर यह समूह काम कर रहा है।

मेट्रो रेल की महत्वाकांक्षी परियोजना को ही लें जो 12 हजार करोड़ रुपये की परियोजना है और इसके निर्माण का दायित्व समूह के जिम्मे है। इसके अलावा, मछलीपत्तनम में 1,650 करोड़ रुपये की लागत से गहरे जलपोत लगाने का काम भी इसके जिम्मे है।

7,331 करोड़ रुपये की लागत से समूह प्रनहिता-चेवेल्ला लिफ्ट सिंचाई परियोजना पर भी काम कर रहा है। इसे चार चरण में पूरा किया जाना है।

नाम न छापने की शर्त पर एक ऑडिटिंग अधिकारी ने बताया, ‘सत्यम पर यह आरोप लगने के बाद कि कंपनी ने अपने खातों के धन का रुख मायटास कारोबार की ओर किया है, मायटास नाम से सूचीबद्ध 20 फर्मों की जांच शुरू करने जा रही है।

जमानत के लिए करना होगा इंतजार

जमानत की आस में लगे सत्यम के पूर्व अध्यक्ष बी रामलिंग राजू के अलावा उनके छोटे भाई बी रामाराजू और सत्यम के पूर्व मुख्य वित्तीय अधिकारी श्रीनिवास वाडलमानी को अभी और इंतजार करना पड़ेगा।

इन तीनों की जमानत याचिका पर अब 19 जनवरी को अगली सुनवाई होगा। बाजार नियामक सेबी और हैदराबाद पुलिस की याचिका पर भी 19 जनवरी को सुनर्वाई होगी।

First Published : January 16, 2009 | 11:25 PM IST