विभिन्न कंपनियों के प्रवर्तकों ने शेयरों को गिरवी रख कर जुटाए गए धन का क्या और कैसे इस्तेमाल किया, अब इसकी परतें खुलने लगी हैं। ज्यादातर प्रवर्तकों ने पूंजी और सावधि ऋण उगाहने के लिए शेयरों का इस्तेमाल बतौर जमानत किया है।
फरवरी 2006 में जर्मनी का एमएचएम समूह, जो ह्यूबर समूह के नाम से भी जाना जाता है, ने वापी (गुजरात) स्थित स्याही निर्माता कंपनी माइक्रो इंक्स में 70.5 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के लिए 1,300 करोड़ रुपये खर्च किए थे।
एमएचएम होल्डिंग्स ने 3 फरवरी को शेयर बाजार को बताया कि उसने कंपनी की अपनी सारी हिस्सेदारी गिरवी रख दी है। माइक्रो इंक्स के प्रबंध निदेशक अश्वनी भारद्वाज ने बताया, ‘कंपनी के सारे शेयर ह्यूबर समूह ने जमानत के तौर पर गिरवी रख दी है, ताकि अधिग्रहण के लिए धन जुटाया जा सके।’
हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बैंक इन शेयरों को बेच नहीं सकता। एशियन पेंट्स के प्रवर्तकों अश्विन दानी और अश्विन चौकसी ने अपनी कंपनियों में हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए एशियन पेंट्स के शेयरों को गिरवी रख रहे हैं।
दानी और चौकसी ने एशियन पेंट्स के 14.98 फीसदी शेयर कंपनी की मौजूदा 40 फीसदी हिस्सेदारी को बढ़ाकर 50 फीसदी करने के लिए गिरवी रख दिए हैं।