जीएसएम मोबाइल सेवाओं की महारथी कंपनी वोडाफोन को आज उच्चतम न्यायालय से भी कोई राहत नहीं मिली।
न्यायालय ने 200 करोड़ डॉलर के आयकर के मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और इस मामले में बंबई उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा है। न्यायालय ने मामले को आयकर विभाग के सुपुर्द कर दिया है।
हचीसन एस्सार की खरीद से जुड़े इस मामले में न्यायमूर्ति एस बी सिन्हा और एम के सिन्हा की खंडपीठ ने वोडाफोन की विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई करते हुए कंपनी को आदेश दिया कि वह आयकर विभाग के कारण बताओ नोटिस का जवाब दे।
उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में फैसला करने का अधिकार आयकर विभाग को दे दिया है और यह भी कहा है कि अगर वोडाफोन विभाग के फैसले ने नाखुश होती है तो वह सीधे उच्च न्यायालय में अपील कर सकती है।
मालूम हो कि हचीसन एस्सार में वोडाफोन ने फरवरी 2007 में 11.1 अरब डॉलर की रकम से 67 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी थी।
इस मामले में आयकर विभाग ने दूसरे देश में हचीसन एस्सार के अधिग्रहण के मामले में वोडाफोन को 200 करोड़ डॉलर बतौर कैपिटल गेन टैक्स भरने का नोटिस थमा दिया। यहीं से मामले ने तूल पकड़ लिया।
वोडाफोन ने इस मामले में अदालत का दरवाजा खटखटाया। बंबई उच्च न्यायालय से भी कंपनी को मायूसी मिली थी और अब यही हाल देश की सर्वोच्च अदालत में रहा।
इस मामले में वोडाफोन का लगातार कहना है कि कैपिटल गेन टैक्स उसको अदा करना पड़ता है जो कंपनी को बेचता है न कि उसे जो उसे खरीदता है। इसलिए टैक्स अदा करने की जिम्मेदारी उसकी नहीं है।
वोडाफोन को आयकर विभाग की ओर से मिला था 200 करोड़ डॉलर का कैपिटल गेन टैक्स अदा करने का नोटिस
हचीसन एस्सार से हिस्सेदारी खरीदने पर टैक्स
कंपनी ने किया विरोध
लेकिन बम्बई हाईकोर्ट सख्त