फिर सुधर जाएगी स्टील की सेहत!

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 09, 2022 | 11:02 PM IST

स्टील कंपनियों को फिर से दिन बहुरने की उम्मीद नजर आ रही है। पिछले साल अक्टूबर से दिसंबर के दौरान मांग में जबर्दस्त कमी के चलते उत्पादन में कटौती करने वाली इन कंपनियों को फिर से मांग बढ़ने की आशा दिख रही है।


स्टील उद्योग के अलावा निर्यात पर काफी हद तक निर्भर रहने वाले लौह अयस्क उद्योग को भी हालात बेहतर होते नजर आ रहे हैं। वैसे कीमतों में तो इन कंपनियों ने कोई कटौती नहीं की है फिर भी बेहतर मांग की वजह से इनको बिक्री बढ़ने की उम्मीद है।

बिक्री बढ़ने से नकदी की समस्या से जूझ रही कंपनियों को काफी राहत मिलेगी। मांग में कमी के चलते स्टील उत्पादकों ने नवंबर में अपने उत्पादन में 25 फीसदी तक की कटौती कर दी थी।

देश की तीसरी सबसे बड़ी स्टील कंपनी जेएसडब्ल्यू स्टील के अध्यक्ष (बिक्री एवं विपणन) जयंत आचार्य का कहना है, ‘उपभोक्ता और उत्पादकों दोनों स्तरों पर मांग में सुधार नजर आ रहा है।

जब एक बार बिक्री बढ़ेगी तो फिर कीमतों के बारे में भी कुछ उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा जिनमें पिछली तिमाही में काफी कटौती की गई थी। हमारा उत्पादन फिर से बढ़कर सामान्य हो जाएगा जो नवंबर में काफी कम हो गया था।’

आचार्य ने कहा कि नवंबर में स्टील के आयात पर लगाए गए 5 फीसदी आयात शुल्क भी देसी स्टील उत्पादकों के लिए कुछ राहत वाला रहा है। हालांकि, उनका अभी भी यही मानना है कि आयात शुल्क अभी भी नाकाफी है और इसको बढ़ाकर 15 फीसदी तक करने की जरूरत है।

इस्पात इंडस्ट्रीज के उपाध्यक्ष और प्रबंध निदेशक विनोद मित्तल भी इस बात से सहमत थे। उन्होंने इस बारे में कहा, ‘उत्पादन में कटौती की वजह से भंडार खत्म हो रहा है और मांग फिर से बढ़ रही है। फिलहाल हम अपनी क्षमता का केवल 60 फीसदी ही उत्पादन कर रहे हैं जिसको जल्द ही बढ़ाकर 75 फीसदी तक किया जा सकता है।’


लौह अयस्क निर्यात दिसंबर 2007 में 98 लाख टन, दिसंबर 2008 में 1.36 करोड़ टन

अप्रैल-दिसंबर 2007 में आंकड़ा था 6.815 करोड़ टन, अप्रैल-दिसंबर 2008 में घटकर 6.447 करोड़ टन

First Published : January 23, 2009 | 11:39 PM IST