उप्र में छोटे उद्योगों ने गुणवत्ता के लिए मिलाया हाथ

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 09, 2022 | 10:41 PM IST

उद्योग निकाय ‘भारतीय उद्योग संगठन’ (आईआईए) और क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (क्यूसीआई) ने उत्तर प्रदेश में लघु एवं मझोले उद्योग की प्रतिस्पर्धा में सुधार लाने के लिए हाथ मिलाया है।


आईआईए के अध्यक्ष परवीन सदाना ने कहा, ‘हमने अंतरराष्ट्रीय निर्माण मानकों के आधार पर गुणवत्ता के मौजूदा और अपेक्षित स्तरों के बीच अंतर को पाटने के उद्देश्य से यह उपक्रम तैयार किया है।’

गुणवत्ता उत्पादन, रखरखाव की कार्य प्रणाली को ध्यान में रखते हुए संयुक्त अभ्यास की योजना को लेकर सदाना ने दिल्ली में क्यूसीआई महासचिव गिरधर गियानी से मुलाकात की है।

कोर्स मॉडयूल में क्वालिटी कंट्रोल टूल्स, टोटल प्रोडक्टिव मैंटेनेंस, आईटी आधारित आपूर्ति शृंखला प्रबंधन, क्वालिटी मैनेजमेंट स्टैंडड्र्स, मेट्रोलॉजी और मेजरमेंट एश्योरेंस, 5एस और कैजन एवं बेसिक लीन मैन्युफेक्चरिंग शामिल हैं।

ये सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय द्वारा शुरू किए गए नेशनल मैन्युफेक्चरिंग कॉम्पिटीटिवनेस कार्यक्रमों के घटक हैं। आईआईए अगले 4-6 महीनों के दौरान अपनी सभी शाखाओं में इन कार्यक्रमों का आयोजन करेगा।

सदाना ने कहा, ‘उद्योग के लिए इस बुरे वक्त में गुणवत्तापूर्ण उपकरणों और प्रौद्योगिकी के ज्ञान को बढ़ावा दिया जाना एमएसएमई के लिए बेहद प्रभावशाली है जो उन्हें उत्पादों और सेवाओं के उन्नयन में सक्षम बनाएगा। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्हें प्रतिस्पर्धा में डटे रहने में सहूलियत होगी।’

उत्तर प्रदेश में लगभग एक लाख लघु एवं मझोली इकाइयां हैं और लघु एवं मझोली इकाइयों के लिहाज से इस राज्य को भारत में चौथा स्थान हासिल है। राज्य के कुल औद्योगिक उत्पादन में एसएमई क्षेत्र का तकरीबन 60 फीसदी का योगदान है।

मौजूदा वित्तीय संकट का एसएमई इकाइयों खासकर अमेरिका और यूरोपीय बाजारों को निर्यात करने वाली इकाइयों पर विपरीत असर पड़ा है। उत्तर प्रदेश से जिन प्रमुख सामानों का निर्यात किया जाता है, उनमें चमड़े के सामान, कालीन, वस्त्र, कृषि उत्पाद, पीतल के बर्तन और वाहन कलपुर्जे शामिल हैं।

राज्य के प्रमुख एसएमई क्लस्टरों में खेल के सामान (मेरठ), कांच का कार्य (शिकोहाबाद फिरोजाबाद), लेदर फुटवियर (आगरा), मिट्टी के बर्तन (लखनऊ), ताला निर्माण (अलीगढ़), कालीन (भदोहीवाराणसी) आदि शामिल हैं।

First Published : January 21, 2009 | 9:27 PM IST