एयर इंडिया से मिलेंगे 15,000 करोड़ रुपये!

Published by
बीएस संवाददाता
Last Updated- December 12, 2022 | 8:51 AM IST

सरकार को एयर इंडिया और उसकी सहायक इकाइयों एयर इंडिया एक्सप्रेस तथा एआईएसएटीएस की बिक्री से करीब 15,000 करोड़ रुपये मिल सकते हैं। बिक्री प्रक्रिया से जुड़े सरकारी अधिकारियों और बैंकरों ने इसकी जानकारी दी। इसका मतलब यह हुआ कि संभावित बोलीदाता कर्ज से दबी और पिछले कुछ वर्षों से घाटा उठा रही इस कंपनी के इक्विटी का मूल्य शून्य रखेंगे।
टाटा समूह को एयर इंडिया के अधिग्रहण की दौड़ में आगे माना जा रहा है। सरकार ने एयर इंडिया के मूल्यांकन परामर्शक के तौर पर आरबीएसए एडवाइजर्स को नियुक्त किया है। वित्तीय बोली मिलने के बाद मंत्रिसमूह द्वारा कंपनी के लिए आरक्षित मूल्य को अंतिम रूप दिया जाएगा।
बैंकरों ने कहा कि विमानन कंपनी का मूल्यांकन कम होने का कारण यह है कि बोलीदाता हवाईअड्डा स्लॉट और द्विपक्षीय अधिकारियों के लिए कोई कीमत देने को तैयार नहीं हैं। एक निवेश बैंकर ने कहा, ‘हीथ्रो जैसे कुछ वैश्विक हवाईअड्डों की तरह भारत में स्लॉट की खरीद-बिक्री नहीं होती है।’
मूल्यांकन कम होने का एक कारण यह भी है कि कंपनी के पास चौड़ी बॉडी वाले विमान जैसे बोइंग 787 और 777 हैं। इसके साथ ही पुरानी पीढ़ी के एयरबस 320 और बोइंग 737 विमान हैं। लेकिन महामारी के कारण हवाई यात्रा में आई कमी से इस पर असर पड़ा है।
बैंकर ने कहा, ‘बोलीदाताओं की योजना में एयर इंडिया के विमानों को बेचना और पट्टे वाले विमानों को वापस कर पैसे जुटाना भी शामिल है। लेकिन महामारी के कारण नए मालिक को इस तरह के विमानों की जरूरत नहीं होगी और पट्टा बाजार में भी इसका अच्छी कीमत नहीं मिलेगी।’
एयर इंडिया के बेड़े में 121 विमान शामिल हैं, जिनमें से 65 एयर इंडिया के हैं और एयर इंडिया एक्सप्रेस के पास 25 बोइंग 737 में से 10 उसके अपने और बाकी पट्टे पर लिए गए हैं।
फिच रेटिंग के  अनुसार 10 वर्ष पुराने चौड़ी बॉडी वाले बोइंग विमान जैसे 777 का बाजार मूल्य 27 प्रतिशत तक कम हो गया है, जबकि 10 वर्ष पुराने संकरी बॉडी वाले बोइंग 737 और एयरबस ए 320 विमानों का मूल्यांकन 16 प्रतिशत तक लुढ़क गया है। इस बारे में बैंकर ने कहा, ‘बोली जीतने वाले को संयम के साथ एक बड़ी रकम का निवेश करना होगा। इसकी वजह यह है कि देनदारियों का वहन करने के साथ ही कंपनी को नए सिरे से तैयार करना होगा। उस बोलीदाता को अत्याधुनिक विमान खरीदने के साथ ढांचागत सुविधाओं एवं सॉफ्टवेयर में सुधार करना होगा। यही वजह है कि बोलियां लगाने वाले विमानन कंपनी का मूल्यांकन इन जरूरतों के हिसाब से कर रहे हैं।’
अगर मूल्यांकन 15,000 करोड़ रुपये रहता है तो बिक्री से प्राप्त रकम कर्ज भुगतान के लिए काफी नहीं होगा। इसके लिए सरकार को बॉन्ड जारी करने के साथ अन्य साधनों के जरिये रकम जुटाने की जरूरत होगी और कंपनी की गैर-जरूरी परिसंपत्तियों बिक्री भी करनी होगी।
बोलीदाताओं को लुभाने के लिए सरकार ने कंपनी का 35,000 करोड़ रुपये का कर्ज अलग कर दिया है और नए बोलीदाता को 23,286 करोड़ रुपये कर्ज का ही वहन करना होगा। हालांकि बिक्री प्रक्रिया की जानकारी रखने वाले सरकारी अधिकारियों ने कहा कि एयर इंडिया बेचने का मुख्य मकसद भविष्य में नकद नुकसान उठाने से बचना है। वित्त वर्ष 2022 के बजट के अनुसार सरकार ने एयर इंडिया सहित सार्वजनिक क्षेत्र की दूसरी कंपनियों में हिस्सेदारी बिक्री से 1.75 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है। एक अधिकारी ने कहा कि एयर इंडिया विनिवेश को राजस्व के स्रोत के बजाय सुधार के कदम के तौर पर देखा जाना चाहिए।

First Published : February 3, 2021 | 11:23 PM IST