आरआईएल ने जुटाया 1.4 अरब डॉलर का विदेशी कर्ज

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 14, 2022 | 8:29 PM IST

देश की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपने मौजूदा विदेशी ऋणों के पूर्व भुगतान के लिए 1.4 अरब डॉलर जुटाए हैं। कंपनी ने पिछले सप्ताह इस सौदे के लिए करीब 14 अंतरराष्ट्रीय बैंकों के साथ हस्ताक्षर किए। आरआईएल जुटाई जाने वाली रकम का इस्तेमाल अपनी सहायक रिलायंस होल्डिंग यूएसए के ऋणों के पूर्व भुगतान में करेगी।
इससे आरआईएल इस साल भारतीय कंपनियों में अंतरराष्ट्रीय बैंकों से सबसे अधिक ऋण जुटाने वाली कंपनी बन जाएगी। इस घटनाक्रम से जुड़े एक बैंक अधिकारी ने कहा कि भारतीय स्टेट बैंक, सिटी बैंक, बार्कलेज और डीबीएस बैंक समेत कुछ बड़े बैंक कंपनी की धन जुटाने की प्रक्रिया में शामिल हुए। इस इंस्ट्रुमेंट की कीमत लिबोर से 95 आधार अंक अधिक रखी गई है। आरआईएल के प्रवक्ता ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
अब तक के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक आरआईएल ने इस कैलेंडर वर्ष में ऋण बाजारों से 3.7 अरब डॉलर जुटाए हैं। कंपनी ने यह रकम मुख्य रूप से अपने पुराने ऋणों को चुकाने के लिए जुटाई है। कंपनी ने विदेशी ऋण बाजारों से वर्ष 2017 में रिकॉर्ड 6.1 अरब डॉलर जुटाए थे। कंपनी ने अपनी दूरसंचार और खुदरा इकाइयों में हिस्सेदारी बेचकर भी 25 अरब डॉलर जुटाए हैं। इन इकाइयों में हिस्सेदारी विश्व की कुछ सबसे बड़ी निजी इक्विटी कंपनियों और फेसबुक एवं गूगल जैसी दिग्गज तकनीकी कंपनियों ने खरीदी है। बैंक अधिकारी ने कहा, ‘आरआईएल ने अपने दूरसंचार एवं खुदरा उपक्रमों के लिए धन जुटाने के अलावा रूस की सिबूर के साथ अपने संयुक्त उपक्रम के जरिये भी ऋण बाजार से पैसा जुटाया है ताकि भारत में सिंथेटिक रबर का उत्पादन शुरू किया जा सके।’
भारत में राइट इश्यू और परिसंपत्तियों की बिक्री से जुटाई गई अब तक की सर्वाधिक पूंजी का पूरा इस्तेमाल कर्ज और अन्य देनदारियों को चुकाने में किया गया। कंपनी ने सितंबर तिमाही के नतीजों में कहा कि इस साल 30 सितंबर तक 1,46,723 करोड़ रुपये की आवक का इस्तेमाल ऋणों के पूर्व भुगतान में किया गया और कम ब्याज दरों के लाभ का पूरा असर आगामी तिमाहियों में दिखेगा।
उन्होंने कहा कि आरआईएल की क्रेडिट रेटिंग भारतीय कंपनियों में सबसे अच्छी है, इसलिए बैंक कंपनी को ऋण देने को तैयार हैं। भारतीय कंपनियों के लिए धन जुटाना एक पसंदीदा इंस्ट्रुमेंट के रूप में उभरा है क्योंकि बेहतर रेटिंग वाली कंपनियों के लिए इसकी लागत कम और उपलब्धता आसान है। आरआईएल जैसी कंपनियों को बड़ी आमदनी विदेशी मुद्रा में होती है। ऐसी कंपनियों के लिए विदेशी मुद्रा बाजारों में उतार-चढ़ाव एक बड़ी चिंता नहीं है क्योंकि उनकी विदेशी मुद्रा आमदनी डॉलर के मूल्य में भारी बढ़ोतरी के खिलाफ एक स्वाभाविक हेजिंग का काम करती है।

First Published : December 7, 2020 | 10:58 PM IST