चूड़ियों की खनकार पर मंदी की मार

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 10, 2022 | 12:01 AM IST

फिरोजाबाद शहर चूड़ियों के लिए मशहूर रहा है। लेकिन यदि इस शहर के चूड़ी निर्माताओं को केरोसिन की आपूर्ति को नियमित नहीं किया जाता है तो यह व्यवसाय जल्द ही पटरी से उतर सकता है।
केरोसिन का इस्तेमाल चूड़ियों के निर्माण में लगी सोल्डरिंग यूनिट यानी टांका इकाइयों में किया जाता है। ये टांका इकाइयां रंगीन कांच को चूड़ियों के रूप में जोड़ने का काम करती हैं। 1992 तक चूड़ी इकाइयों को एक औद्योगिक कोटे के तहत केरोसिन प्राप्त होता था।
लेकिन बिना कोई कारण बताए सरकार ने इसे बंद करा दिया और तब से इस उद्योग के लिए केरोसिन कोटे की मांग अधर में लटकी हुई है। कांच उद्योग के सूत्रों का कहना है कि चूड़ी निर्माण और इससे जुड़ी बेकिंग इकाइयां ईंधन के रूप में लकड़ी या कोयला का भी इस्तेमाल कर सकती हैं, लेकिन इस निर्माण प्रक्रिया से जुड़ी सोल्डरिंग इकाइयां केरोसिन की उपलब्धता पर निर्भर हैं। 
औसतन रूप से प्रत्येक श्रमिक 8-10 घंटे की एक शिफ्ट में लगभग 2,000 से अधिक चूड़ियों को जोड़ता है और इस प्रक्रिया के लिए केरोसिन लैम्प को लगातार जलाए रखने की जरूरत होती है।
हालांकि इनमें से ज्यादातर इकाइयां कालाबाजारी के जरिये ईंधन की व्यवस्था करने में सक्षम हैं, लेकिन इसकी कीमत 35-40 रुपये प्रति लीटर है जो बाजार की सामान्य कीमत से लगभग दो-तीन गुना है। 140-150 सोल्डरिंग इकाइयों के लिए अनुमानित रूप से रोजाना 25 किलोलीटर केरोसिन की जरूरत पड़ती है।
ईंधन पर तेजी से बढ़ते अतिरिक्त खर्च की वजह से यह उद्योग मुश्किल में फंसता जा रहा है। पिछले एक दशक में लगभग 35 इकाइयां पहले ही बंद हो चुकी हैं। इकाइयों के अस्तित्व को बचाए रखने के लिए फिरोजाबाद जिला प्रशासन ने राज्य सरकार से अनुरोध किया है कि वह चूड़ी निर्माण में लगी इकाइयों को हर महीने 500 किलोलीटर केरोसिन का औद्योगिक कोटा लागू करे। इन इकाइयों में फिरोजाबाद और अन्य शहरों के लगभग 150,000 लोग जुड़े हुए हैं।
जिला औद्योगिक केंद्र, फिरोजाबाद के महाप्रबंधक सुधीर कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि जिलाधीश अमित गुप्ता ने औद्योगिक कोटा तय किए जाने के लिए मुख्य सचिव (लघु एवं मझोले उद्योग) बी. राजगोपालन को एक पत्र लिखा है। इस अनुरोध पत्र में ईंधन के अभाव में इस उद्योग को जिन मुश्किलों से जूझना पड़ रहा है, उनका जिक्र किया गया है।
उन्होंने कहा कि ईंधन की किल्लत को लेकर पिछले महीने उद्योग बंधु की बैठक में भी इस मुद्दे पर चर्चा की गई थी। इसके बाद जिले के आपूर्ति अधिकारी को भी केरोसिन की आपूर्ति सुनिश्चित करने के संबंध में पेट्रोलियम कंपनियों से बातचीत शुरू करने का निर्देश दिया गया था।
हालांकि यह आपूर्ति थोड़ा महंगी होने की संभावना है। इकाइयों को इस आपूर्ति के जरिये 32 रुपये प्रति लीटर की कीमत रेंज में केरोसिन उपलब्ध कराए जाने की उम्मीद है।

First Published : February 5, 2009 | 1:43 PM IST