भारत की सबसे बड़ी दवा निर्माता कंपनी रैनबैक्सी लैबोरेटरीज स्कॉटलैंड की सरकार को दूसरी कंपनियों के साथ कीमतों में धोखेबाजी के आरोप के मामले का अदालत के बाहर निपटारा करने के लिए तैयार हो गई है,
जिसके तहत कंपनी इस मामले में हुए नुकसान की भरपाई करेगी। स्कॉटलैंड की सरकार की वेबसाइट पर जारी एक वक्तव्य के मुताबिक रैनबैक्सी स्कॉटलैंड की सरकार को 1,057,500 पाउंड या लगभग 7.5 करोड़ रुपये बतौर हर्जाना देने को तैयार हो गई है।
फरवरी 2005 में स्कॉटलैंड की सरकार इंग्लैंड में रैनबैक्सी और क्लोनमेल हेल्थकेयर, जेनेरिक्स यूके, गोल्डशील्ड और नॉर्टन जैसी दूसरी कंपनियों के खिलाफ जेनेरिक वारफैरिन, रैनिटीडाइन, पेंसिलिन आधारित दवाओं की आपूर्ति के लिए मूल्य संघ बनाने का आरोप लगाते हुए अदालतों में पहुंची थी।
दूसरी चार कंपनियों ने पहले ही इस मुद्दे को सरकार के साथ लगभग 59 लाख पाउंड बतौर मुआवजा देने की बात को स्वीकार करते हुए खत्म कर दिया था।
स्कॉटलैंड की सरकार के एक वक्तव्य में कहा गया है, ‘रैनबैक्सी (यूके) लिमिटेड बिना किसी देनदारी की स्वीकृति के साथ पूर्ण और अंतिम आधार पर 1,057,500 पाउंड बतौर जुर्माना किलिंस और रैनिटीडाइन की आपूर्ति से जुड़े हुए दीवानी दावों के निपाटरे में देने को तैयार है।
कंपनी पर यह भी आरोप थे कि वह दूसरी कंपनियों के साथ मिलकर कुछ जेनेरिक दवाओं के लिए मूल्य निर्धारण की व्यवस्था भी कर रही थी और इस मामले में वे सरकार की मदद को भी तैयार हैं।’
रैनबैक्सी के प्रवक्ता ने इस मामले पर कुछ भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। स्वास्थ्य एवं सेहत के केंद्रीय सचिव निकोला स्टरजियोन का कहना है, ‘रैनबैक्सी के साथ निपटारे का स्वागत है। खासतौर पर मैं काफी खुश हूं कि वे दीवानी दावों में आगे भी हमारी मदद करेंगे।’
कुछ महीने पहले रैनबैक्सी ब्रिटेन की एक अदालत के सामने इंग्लैंड में इसी तरह के मामलों के लिए पेश हुई थी। पांच कंपनियों जिनमें रैनबैक्सी भी शामिल थी को इंग्लैंड के स्वास्थ्य विभाग ने 1996-2000 के बीच एंटीबायोटिक दवाओं की आपूर्ति के लिए मूल्य संघ बनाने के आरोप में अभियुक्त ठहराया था।
उस समय कंपनियों ने 3.5 करोड़ पाउंड बतौर मुआवजा दिया था और उन्होंने फैसला किया था कि वे ब्रिटेन सरकार के गंभीर जालसाजी के लिए विभाग (एसएफओ) की आगे चलने वाली जांच-पड़ताल में सहायता भी करेंगी।