सत्यम कंप्यूटर सर्विसेज के तूफान में घिरे जहाज को बचाने की जिम्मेदारी उसमें सवार कारोबारी कप्तानों के ही हाथ में आ सकती है।
सरकार ने भी कंपनी के नए निदेशक मंडल को सुझाव दिया है कि वह कंपनी के अधिकारियों को ही मुख्य कार्य अधिकारी (सीईओ) और मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) के ओहदों पर बिठाए।
कंपनी मामलों के मंत्री प्रेमचंद गुप्ता ने आज कहा, ‘मैंने निजी तौर पर इस बात की सिफारिश की है। हमारा मानना है कि किसी बाहरी व्यक्ति को हालात समझने में काफी वक्त लग सकता है और फि लहाल हमारे पास गंवाने के लिए वक्त नहीं है।
इसलिए किसी ऐसे व्यक्ति को ही कमान सौंपनी चाहिए जो सत्यम और उसके ग्राहकों को अच्छी तरह से समझता हो। इसके लिए कोई अंदरूनी व्यक्ति ही सबसे मुफीद साबित हो सकता है।’
दरअसल, इस तरह की खबरों का बाजार गर्म था कि विप्रो के पूर्व वाइस चेयरमैन और वैश्विक सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं के सीईओ रह चुके विवेक पॉल खस्ताहाल सत्यम की डूबती नैया की कमान संभालने जा रहे हैं।
सूत्रों का कहना है कि पॉल को इसके लिए काफी आकर्षक पैकेज दिए जाने की बात भी चल रही थी। यहां तक कि उन्हें कंपनी के 5 फीसदी शेयर देने की पेशकश भी गई थी।
इन अफवाहों के बीच गुप्ता का बयान दर्शाता है कि सत्यम को पटरी पर लाने के लिए सरकार उसके किसी ‘अपने’ पर ही भरोसा करने को तैयार है। हालांकि गुप्ता ने पॉल के बाबत कहा, ‘यह मीडिया के दिमाग की उपज है।’
सत्यम मामले में सरकारी कदमों से संतुष्ट गुप्ता ने कहा, ‘हमने हर मोर्चे पर सही कदम उठाया है। इस मामले में दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। अगर ऑडिट करने वाली प्राइसवाटरहाउस भी दोषी पाई गई तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा तकरीबन 45 बैंकों की तरफ भी संदेह की उंगली उठी है।’
सत्यम की मौजूदा चिंताजनक हालत से गुप्ता ज्यादा चिंतित नहीं हैं। उन्होंने कहा, ‘सत्यम के पास काफी परिसंपत्ति है। कुशल कर्मचारी और अच्छे ग्राहक हैं। हमें उम्मीद है कि मुश्किल वक्त में कर्मचारी अपनी कंपनी का साथ देंगे।
मैं सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों से अपील करता हूं कि वे सत्यम के ग्राहकों को तोड़ने की होड़ में न लगें क्योंकि अगर सत्यम ढह जाती है तो यह पूरे आईटी क्षेत्र की क्षति होगी। ‘
धन जुटाने के लिए बैठक कल
सत्यम की डांवाडोल हालत से बौखलाए कर्मचारियों और निवेशकों को ढाढस बंधाने की नया निदेशक मंडल भरसक कोशिश कर रहा है। निदेशक मंडल की इसके लिए कल बैठक होगी, जिसमें कारोबार चलाने के लिए धन जुटाने पर विचार होगा।
निदेशक मंडल में शामिल तरुण दास ने कहा है कि कंपनी के कर्मचारियों, ग्राहकों और निवेशकों के हितों की हिफाजत करना उनकी पहली प्राथमिकता होगी। निदेशक मंडल की दूसरी बैठक से ऐन पहले दास को उसमें शामिल किया गया है।
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मायटास से रूठ गई एमएमटीसी
बी रामलिंग राजू के बड़े बेटे बी तेजा राजू की अगुआई वाले मायटास समूह को भी सत्यम की कारगुजारियों की सजा भुगतनी पड़ रही है। मायटास समूह और सरकारी कंपनी एमएमटीसी में एक विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) स्थापित करने के लिए एक विशेष उद्देश्य कंपनी बनाने के लिए साझीदारी हुई थी।
लेकिन सत्यम प्रकरण के बाद हुई मायटास की फजीहत को देखकर एमएमटीसी ने इससे अपने हाथ खींच लिए हैं। एमएमटीसी के निदेशक मंडल की बैठक में इस बारे में फैसला लिया गया।
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आईटी कंपनियों से अपील, न तोड़ें सत्यम के ग्राहक
45 बैंकों की भी चल रही पड़ताल