लुधियाना का साइकिल निर्माण उद्योग बुरे वक्त से गुजर रहा है।
कुछ समय पहले कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने साइकिल निर्माताओं को मुसीबत में डाल दिया था और अब वैश्विक मंदी की वजह से इस शहर के साइकिल उद्योग को होने वाले मुनाफे में लगातार गिरावट हो रही है।
लुधियाना में लगभग 4,000 साइकिल निर्माता हैं जिनमें से ज्यादातर लघु एवं मझोले उद्यमों की श्रेणियों में आते हैं। देश के कुल साइकिल उत्पादन में इन इकाइयों का योगदान 90 फीसदी का है। लेकिन मौजूदा समय में रुपये में गिरावट से इस उद्योग पर संकट मंडरा रहा है।
मौजूदा वित्तीय संकट ने लुधियाना में साइकिल निर्माताओं को उत्पादन में 40 फीसदी तक की कटौती करने के लिए विवश कर दिया है। यूनाइटेड साइकिल एंड साइकिल पाट्र्स मैन्युफेक्चरर्स एसोसिएशन (यूसीसीपीएमए) के पूर्व अध्यक्ष डीएस चावला ने कहा कि रुपये में तेजी से लुधियाना में साइकिल निर्यातकों का उत्साह बढ़ना चाहिए था, लेकिन दुर्भाग्यवश ऐसा नहीं हुआ।
भारतीय मुद्रा में गिरावट से लुधियाना में साइकिल निर्माताओं को निर्यात ऑर्डरों में गिरावट का सामना करना पड़ रहा है। साइकिल निर्माताओं पर संकट गहराता जा रहा है। चावला ने कहा कि मुद्रा में उतार-चढ़ाव के कारण ज्यादातर विदेशी खरीदारों ने अपने ऑर्डरों को ठंडे बस्ते में डाल दिया है, क्योंकि वे बाजार के स्थिर होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि निर्यात ऑर्डरों में कमी आने से साइकिल निर्माताओं का घाटा बढ़ कर 200 करोड़ रुपये पर पहुंच जाने की आशंका है। 2006 में भारत से साइकिल का निर्यात बाजार 800 करोड़ रुपये था। यह 2007 में घट कर 750 करोड़ हो गया था। लेकिन इस साल साइकिल निर्माता निर्यात बाजार में लगभग 500 करोड़ रुपये की कमी आने की आशंका जता रहे हैं।
चावला ने कहा कि निर्यात ऑर्डर घट रहे हैं। घरेलू बाजार में भी अधिक कीमतों के कारण खरीदार पूर्व में किए गए अपने ऑर्डर रद्द कर रहे हैं। इस साल के शुरू में जब इस्पात की कीमतें काफी अधिक थीं, ज्यादातर साइकिल निर्माताओं ने घरेलू मांग को पूरा करने के लिए अधिक लागत पर साइकिलों का निर्माण किया था।
लेकिन अब इस्पात की कीमतों में कमी आई है। ऐसे में घरेलू खरीदार कम कीमत पर साइकिल खरीदने को इच्छुक हैं। उन्होंने कहा कि लुधियाना में साइकिल उत्पादन में पहले ही लगभग 40 फीसदी की कमी आ चुकी है और साइकिल की मांग में गिरावट आने से अधिक उत्पादन की सभी संभावनाएं धमिल पड़ती जा रही हैं।
चावला ने कहा कि यह साइकिल निर्माताओं, खासकर एसएमई क्षेत्र, के लिए बुरा वक्त है और यदि ऐसे हालात जारी रहे तो कई साइकिल निर्माण इकाइयां या तो बंद हो जाएंगी या फिर अन्य व्यवसायों की तरफ आकर्षित हो जाएंगी।