कोविड टीके को लेकर कंपनियों की बढ़ती चुनौती

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 12, 2022 | 9:20 AM IST

देश में काम कर रही बहुराष्ट्रीय कंपनियां और देश की दिग्गज कंपनियां एक नई तरह की चुनौती से जूझ रहे हैं। नई चुनौती यह है कि अगर उनके कर्मचारी पहले की तरह नियमित रूप से दफ्तर आने पर कोविड-19 टीका लेने से इनकार करते हैं तब वैसी स्थिति से कैसे निपटा जाए।
प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों वाले एक शीर्ष यूरोपीय कारोबार समूह ने राष्ट्रीय उद्योग संगठनों के साथ-साथ यूरोपीय संघ निकायों के जरिये सरकार से संपर्क करने की योजना बनाई है और सरकार से इस मुद्दे पर दिशानिर्देश देने का अनुरोध किया गया है। इस बातचीत में शामिल एक यूरोपीय कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी का कहना है, ‘हमने इस मुद्दे पर मिलजुल कर विचार-विमर्श किया है और हम सरकार से दिशानिर्देश लेने की योजना बना रहे हैं। हालांकि हम इस बात को समझते हैं कि इस पर कोई भी चर्चा पहले दौर के परीक्षण खत्म होने के बाद ही होगी।’
एचआर कंपनियां जो अपने ग्राहकों को सलाह देती हैं, उनका कहना है कि नौकरी के आधार पर अलग-अलग तरह की कंपनियों के लिए रणनीति भी अलग होगी। टीमलीज के सह संस्थापक और कार्यकारी अध्यक्ष रितुपर्णा चक्रवर्ती कहती हैं, ‘हम उम्मीद करते हैं कि कंपनियां अलग दृष्टिकोण के साथ काम करेंगी। जिन कंपनियों में दूर रहकर भी काम किया जा सकता है, वहां कोई दिक्कत या बदलाव की जरूरत नहीं होगी। जिन नौकरियों में साथ मिलकर काम करने की जरूरत होगी वहां नई भर्ती के साथ-साथ मौजूदा कर्मचारियों को भी टीका लेने का आदेश दिया जा सकता है।’
चक्रवर्ती का कहना है, ‘कंपनियां टीकाकरण के पहले चरण के परिणाम देखने के लिए इसका इंतजार कर रही होंगी जो मार्च के अंत तक साफ तौर पर नजर आएंगे। इसके बाद ही जब दूसरे चरण का टीकाकरण शुरू होगा तब कंपनियां फैसला लेंगी। कई कंपनियां अपने कर्मचारियों के लिए टीके की थोक खरीद करने की संभावनाएं पहले से ही तलाश कर रही हैं। हालांकि निजी क्षेत्र को टीका बेचने पर सरकार ने प्रतिबंध लगाए हैं। प्रतिबंध हटाए जाने के बाद ही कंपनियां टीके की खरीद कर पाएंगी।’  
हालांकि सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि टीका लेने का विकल्प पूरी तरह से स्वैच्छिक है। वहीं कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि कंपनियां अपने कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए बदलावों को शामिल कर सकती हैं। लुथरा ऐंड लुथरा पार्टनर्स में अधिकारी संजीव कुमार कहते हैं, ‘कर्मचारी और नियोक्ता के बीच रोजगार एक निजी संपर्क का जरिया है और शर्तों को नियोक्ता के द्वारा बदला जा सकता है और इसे स्वीकार करने की जरूरत होगी। हालांकि यह देखना भी लाजिमी होगा कि इन शर्तों को लागू करने का इरादा वैध है या नहीं। इस मामले में कंपनी अपने कर्मचारियों की सुरक्षा का स्पष्ट इरादा रखती है। मिसाल के तौर पर कंपनियों में किसी नए कर्मचारी की भर्ती से पहले स्वास्थ्य जांच अनिवार्य है।’    
फिर भी कई अन्य कंपनियों का कहना है कि वे सामाजिक दूरी के सख्त नियमों का पालन करते हुए पिछले आठ-नौ महीने से अपनी फैक्ट्रियां चला रही हैं और यह कारगर रहा है। ऐसे में वे अपनी फैक्टरियों के कामगारों को टीका लेने के लिए प्रोत्साहित करेंगी लेकिन वे इसे अनिवार्य बनाने के पक्ष में नहीं हैं। निप्पॉन पेंट्स इंडिया के अध्यक्ष शरद मल्होत्रा बताते हैं, ‘हमारे कामगार पिछले आठ नौ महीनों से कारखानों में बिना कोई टीका लगाए काम कर रहे हैं। हम उन्हीं मानदंडों का पालन करते रहेंगे जैसे कि घर जाने वाले कामगारों और प्रयोगशालाओं में काम करने वाले लोगों का समय-समय पर आरटीपीसीआर परीक्षण करना। फिलहाल मुझे टीके को अनिवार्य बनाने की शर्त लागू करना जरूरी नहीं लगता है।’ 

First Published : January 24, 2021 | 11:50 PM IST