मंदी में भी अवसर तलाश रही हैं परिधान इकाइयां

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 10, 2022 | 12:52 AM IST

आर्थिक मंदी के बावजूद पश्चिम बंगाल में परिधान एवं वस्त्र निर्माता मौजूदा वर्ष में विस्तार और निवेश की योजनाएं बना रहे हैं। इन छोटी कंपनियों का मानना है कि इस खराब समय में उत्पादन में इजाफा कर उपयुक्त कारोबारी दौर के लिए बेहतर तैयारी की जा सकती है।
लगभग 50 करोड़ रुपये की पूंजी वाली परिधान कंपनी टर्टल लिमिटेड पश्चिम बंगाल में ट्राउजर निर्माण इकाई की स्थापना पर लगभग 85 लाख रुपये का निवेश कर रही है। पुरुषों के परिधान तैयार करने वाली टर्टल यह इकाई राज्य में अपनी मौजूदा इकाई के पास में ही स्थापित कर रही है।
टर्टल के निदेशक अमित लाडसरिया कहते हैं, ‘हम अपने फैक्टरी क्षेत्र को बढ़ा कर 50,000 वर्ग फुट करने के लिए 85 लाख रुपये खर्च कर रहे हैं। हम एक अलग ट्राउजर निर्माण इकाई स्थापित कर रहे हैं जो शुरू में हर महीने 10,000 ट्राउजर तैयार करेगी। अब तक ट्राउजर निर्माण कार्य आउटसोर्सिंग के जरिये कराया जाता रहा है।’
उन्होंने कहा, ‘2009-10 में हमारी कुल सालाना क्षमता 20 लाख शर्ट और ट्राउजर हो जाएगी जो पिछले साल की तुलना में 30 फीसदी अधिक है।’ कंपनी 20,000 वर्ग फुट के आकार वाला एक नया माल गोदाम भी तैयार कर रही है जिसके साथ ही इस साल के अंत तक इसका कुल गोदाम क्षेत्र 55,000 वर्ग फुट हो जाएगा।
टर्टल इस साल 15 नए स्टोर भी खोल रही है जिसके साथ ही इसके स्टोरों की संख्या बढ़ कर 50 हो जाएगी। कंपनी अपने कार्यालय के लिए 30 और लोगाें एवं अपनी फैक्टरी के लिए लगभग 70 लोगों को नौकरी पर रखने की भी योजना बना रही है।
इसी तरह 500 करोड़ रुपये के कारोबार वाली सिल्क फैब्रिक निर्यातक ईस्टर्न सिल्क राज्य में अपनी इकाई में वेलवेट और जैकवर्ड फैब्रिक का उत्पादन बढ़ाने के लिए 80 करोड़ रुपये का निवेश कर रही है। कंपनी मूल्य वर्धित और फैशन उत्पादों में पैठ बनाने की कोशिश कर रही है।
कंपनी को उम्मीद है कि इस निवेश से उसकी बिक्री में 10-15 फीसदी का इजाफा हो जाएगा। ईस्टर्न सिल्क रेशम के धागे, फैब्रिक्स, फैशनेबल कपड़ों, हैंडलूम फैब्रिक, बेल्ट और कशीदाकारी कपड़ों के निर्माण में लगी हुई है।
कंपनी इस निवेश के जरिये स्वचालित करघों की उत्पादन क्षमता मौजूदा 2.5 लाख मीटर से बढ़ा कर 18.5 लाख मीटर प्रति वर्ष करना चाहती है। 

ईस्टर्न सिल्क के अध्यक्ष जी वेंकटेश ने कहा, ‘बेंगलुरु संयंत्र में निवेश किया जा रहा है और मई 2009 से उत्पादन शुरू हो जाने की संभावना है। हमने हाई-ऐंड फर्नीशिंग रेंज में भी प्रवेश करने की योजना बनाई है।’
वेंकटेश के मुताबिक, ‘2010 से अर्थव्यवस्था में सुधार शुरू होने की उम्मीद है और हम चाहते हैं कि जब मंदी समाप्त हो जाए और बूम की स्थिति आए तो हम मांग को आसानी से पूरा कर सकें। इसी जरूरत को ध्यान में रख कर हम मौजूदा समय में निवेश कर रहे हैं।’
वेस्ट बंगाल गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स ऐंड डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष चांद मल लोढा ने कहा कि बुनियादी ढांचा का अभाव और कच्चे माल की अनुपलब्धता पश्चिम बंगाल में गारमेंट उद्योग के विकास के दो प्रमुख अवरोधक हैं।
वर्ष 2007-08 में राज्य में रेडीमेड वस्त्रों का कारोबार 12,000 करोड़ रुपये का था। लगभग 60 फीसदी कच्चे माल की खरीद स्थानीय बाजार से की गई थी जबकि 40 फीसदी माल अन्य राज्यों से आयात किया गया था।
डीलर्स एसोसिएशन के सचिव विजय करीवाला कहते हैं, ‘आयात के उच्च अनुपात की वजह से कच्चे माल की लागत काफी अधिक है। इसी कारण तैयार सामानों की कीमत बढ़ रही है।’

First Published : February 12, 2009 | 10:33 PM IST