वाहन निर्माण क्षेत्र में देश की दिग्गज कंपनी टाटा मोटर्स लिमिटेड के पुणे स्थिति वाणिज्यिक वाहन (सीवी) संयंत्र में पिछले दो महीनों के दौरान 12 दिन उत्पादन बंद रखने ।
और दूसरे प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनियों द्वारा उत्पादन घटाने से शहर के करीब 5,000 ऑटो सब्सिडरी इकाइयों में काम कर रहे 1,50,000 से अधिक कर्मचारियों को छंटनी का डर सताने लगा है।
प्रमुख सब्सिडरी इकाइयां कर्मचारियों की छंटनी का मन बना रही हैं जबकि 4,000 से अधिक अस्थायी कर्मचारियों को पहले ही नौकरी से निकाला जा चुका है।
पुणे, पिंपरी-छिंछवाड, तेलगांव, भोसारी, चाकन, रंजनगांव, पिरांगुट और भिगवान क्षेत्र में ऐसे करीब 700 ऑटो सब्सिडरी इकाइयां हैं जिनका महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम के अंतर्गत पंजीयन किया गया है। इन इकाइयों में करीब 7,000 स्थायी और अस्थायी कर्मचारी काम कर रहे हैं।
इनमें से कई सारी इकाइयां टाटा मोटर्स पर आश्रित हैं जबकि कुछ इकाइयां फोर्ड मोटर्स लिमिटेड और बजाज ऑटो लिमिटेड को भी कलपुर्जों की आपूर्ति करती हैं।
चालू वित्त वर्ष में टाटा मोटर्स 12 दिनों तक इकाई में काम बंद कर चुकी है और ऐसे में इन इकाइयों को उत्पादन में 30 फीसदी कटौती करनी पड़ी है।
यही वजह है कि आने वाले समय में नौकरियों में भारी कटौती की आशंका है।एमआईडीसी में पंजीकृत इकाइयों के अलावा भी पुणे क्षेत्र में 5,000 छोटी इकाइयां और वर्कशॉप हैं जो टाटा मोटर्स समेत दूसरी कार निर्माता कंपनियों को कलपुर्जे उपलब्ध कराती हैं। इन इकाइयों में करीब 80,000 मजदूर काम करते हैं।
जहां कुछ इकाइयों में काम की पाली को 8 घंटे से घटाकर 4 घंटे कर दिया गया है वहीं अधिकांश इकाइयों में 8 घंटे की एक ही पाली में काम चल रहा है। सैंडविक एशिया में करीब 1,300 कर्मचारी नियुक्त हैं और कंपनी ने हफ्ते में केवल पांच दिन काम करने का फैसला किया है।
वेनाज इंजीनियर्स प्राइवेट लिमिटेड के महाप्रबंधक (ऑटो कम्पोनेंट्स) के पी वेलायुद्धन ने बताया, ‘अब तक ऑटो सब्सिडरी इकाइयों में कुछ ही छंटनियां हुई हैं। अस्थायी कर्मचारियों को ही निकाला गया है। पर अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो भारी तादाद में लोगों को नौकरियों से हाथ धोना पड़ सकता है।’
वेनाज इंजीनियर्स ने पिछले दो महीने के दौरान ऑटो पुर्जे के उत्पादन में 17 फीसदी की कटौती की है। पर कंपनी का कहना है कि उसने अब तक किसी कर्मचारी को नौकरी से नहीं निकाला है।
पिंपरी-छिंछवाड छोटा उद्योग संगठन (पीसीएसआईए) के अध्यक्ष सुरेश महात्रे ने बताया कि ऑटो सब्सिडरी इकाइयों में काम कर रहे 1 लाख से अधिक कर्मचारियों पर छंटनी की तलवार लटक रही है जबकि 4,000 से अधिक कर्मचारियों को पहले ही बाहर का रास्ता दिखाया जा चुका है।
उन्होंने कहा, ‘हालात बहुत खराब हो चुके हैं। कच्चे माल की बढ़ती कीमतों और मांग में आई कमी से ऑटो सब्सिडरी इकाइयों की हालत खस्ता है। काफी हद तक टाटा मोटर्स और बजाज ऑटो पर हालात निर्भर करेंगे।’
रुकेगा उत्पादन का चक्का
पुणे में करीब 700 एमआईडीसी पंजीकृत सब्सिडरी इकाइयां हैं
कलपुर्जा बनाने वाली करीब 5,000 छोटी और मझौ ली इकाइयां हैं
1,50,000 कर्मियों पर लटकी छंटनी की तलवार
तीन महीनों में घटा है 30 से 40 फीसदी उत्पादन