‘तेजस’ का तेज देख चकाचौंध हुईं आंखें

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 10, 2022 | 12:40 AM IST

बात तीन दिन पुरानी है, जब शनिवार को बेंगलुरु स्थित एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (एडीए) की सारी मशीनरी स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) तेजस के परीक्षण में लगी थी। तब मैं रनवे पर बैठ दो तेजस विमानों के प्रथम प्रदर्शन से पहले की तैयारियों को देख रहा था।
कई साल तक चले 1,000 घंटे के परीक्षण के बाद इस विमान के प्रदर्शन को हरी झंडी दी गई है। सबसे आगे खड़े तेजस में ग्रुप कैप्टन आर. त्यागी बैठे थे। तेजस को सैकड़ों किलोमीटर उड़ाने और जमीन के निशानों को अपना निशाना बनाने से पहले उन्हें तमाम औपचारिकताओं से गुजरना पड़ रहा था।
छह मिनट लंबी इस प्रक्रिया में विमान के इंजिन, उसके कंट्रोल और इलेक्ट्रॉनिक्स का गहन परीक्षण किया गया। उससे कुछ ही मीटर दूर नेवी के टेस्ट पायलट कैप्टन जयदीप मावलंकर दूसरे तेजस विमान में बैठे थे। उन्हें भी इसी प्रकार की औपचारिकताओं से गुजरना पड़ रहा था।
जयदीप को त्यागी के विमान के पीछे रहकर उनके विमान की हर गतिविधि का बारीक परीक्षण करना था। थोड़ी देर में दोनाें तेजस ने अपने इंजिन स्टार्ट किए। उड़ान के दौरान दोनों पायलटों को रेडियो से संदेश दिए जा रहे थे।
रनवे के आखिर में नैशनल फ्लाइट टेस्ट सेंटर का टेलीमीटरी सेंटर इस मिशन के हरेक क्षण को कैप्चर कर रहा था। हाईस्पीड डेटा लिंक के जरिए दोनों विमान से डेटा का सजीव संचरण हो रहा था। 11 क्रिटिकल एयरक्राफ्ट सिस्टम्स पर 11 इंजीनियरों का दल निगाह रखे हुए था।
इस टेस्ट के निदेशक के रूप में सीनियर फ्लाइट टेस्ट इंजीनियर दोनों विमानों पर निगाहें लगाए हुए थे। कोई गलती होने पर बगैर सेंकेंड गवाएं वे निर्देश देते जा रहे थे। 

उन्होंने बताया, ”ऐसे मिशन पर पायलट को अचूक एकाग्रता बनाए रखनी होती है। उसे लगातार इस बात पर निगाहें रखनी होती है कि उसका एयरक्राफ्ट सिस्टम्स क्या कर रहा है और बाहर क्या हो रहा है। उसकी सहायता के लिए हम उस पर निगाह रखते हैं और पायलट को रेडियो पर निर्देश देते हैं।”
जैसे ही दोनों तेजस रेंज पर पहुंचते हैं टेलीमीटरी सेंटर त्यागी को शस्त्र छोड़ने का आदेश देता है। उससे 70 मीटर दूर चल रहे कैप्टन मावलंकर सावधानी से त्यागी को बम छोड़ते हुए देख रहे थे। टेलीमीटरी सेंटर पर बार-बार रिप्ले दिखाया जा रहा था कि बम कितनी सावधानी से छोड़ा गया।
इस डेटा को कई दिनों तक देखा जाता है। बहरहाल, यह परीक्षण उड़ान सफल रहा। इसके बाद इन दोनों विमानों का एक और परीक्षण उड़ान किया गया और यह भी सफल रहा। 

(कल पढ़ें  एयरो इंडिया-2009 का उद्धाटन)

First Published : February 10, 2009 | 10:44 PM IST