सिप्ला हुई रैनबैक्सी से आगे

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 09, 2022 | 4:30 PM IST

फार्मा क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों में नंबर एक के स्थान पर काबिज होने की होड़ लगी हुई है।


इस होड़ में दवा उद्यमी वाई के हमीद की कंपनी सिप्ला ने देश की सबसे बड़ी फार्मा कंपनी रैनबैक्सी लैबोरेट्रीज को घरेलू दवा बाजार में पछाड दिया है।

सिप्ला बाजार में कई नई दवाएं उतारकर दाइची सांक्यो के अधिकार वाली रैनबैक्सी से काफी आगे निकल गई है। सिप्ला घरेलू बाजार में फिलहाल कई बीमारियों के इलाज के लिए लगभग 1085 ब्रांड बाजार में बेचती हैं। जबकि रैनबैक्सी भारतीय बाजार में केवल 729 दवाएं ही बेचती हैं।

इसी कारण सिप्ला ने 33,000 करोड़ रुपये की कीमत वाले फार्मा बाजार में अपना नंबर एक स्थान फिर से हासिल कर लिया है। ओआरजी-आईएमएस की ओर से जारी किए गए 2008 (नवंबर तक) के आंकड़ों के अनुसार सिप्ला की भारतीय दवा बाजार में 5.32 फीसदी हिस्सेदारी है।

जबकि रैनबैक्सी की बाजार में 5.08 फीसदी हिस्सेदारी ही है। यह संस्था देश की फार्मा कंपनियों की बिक्री के आंकड़े महीने जुटाती है, जिसमें 3,000 स्टॉकिस्ट और डॉक्टरों से प्राप्त आंकड़ों से तय किए जाते हैं।

सिप्ला ने मई 2007 में नंबर एक के स्थान पर काबिज होने के लिए रैनबैक्सी और ग्लैक्सोस्मिथलाइन इंडिया (जीएसके) को पीछे छोड़ा था। इसके बाद कंपनियां बिक्री के आधार पर एक दूसरे को इस स्थान से हटाती रही, लेकिन कुछ महीनों बाद ही रैनबैक्सी ने वापस नंबर वन की इस कुर्सी पर कब्जा कर लिया था।

इसके बाद जनवरी-अगस्त 2008 तक रैनबैक्सी इस कुर्सी पर 5.08 फीसदी हिस्सेदारी के साथ काबिज रही। विश्लेषकों के अनुसार इन आंकड़ों को उत्पादों की संख्या, परिचालन का स्तर और 2,500 मैडिकल रिप्रजेंटेटिव,बाजार पर कंपनी की पकड़ के आधार पर तय किया जाता है।

एंजेल ब्रोकिंग के उपाध्यक्ष सरबजीत कौर नागरा ने बताया, ‘सिप्ला और रैनबैक्सी जीवनशैली संबंधित बीमारियों के अलावा संक्रमण प्रतिरोधी दवाओं की मार्केटिंग बड़े स्तर पर कर रही हैं। दोनों ही कंपनियों के पास अच्छी मार्केटिंग टीम और विकसित मार्केटिंग तंत्र है।’

लेकिन दिलचस्प बात यह है कि देश में सबसे ज्यादा बिकने वाली दवाइयां इन दोनों ही कंपनियों की नहीं है। अगर रैनबैक्सी की मॉक्स को छोड़ दिया जाए तो दोनों में से किसी भी कंपनी की दवा की 100 करोड़ रुपये क ी सालाना बिक्री होती है।

उद्योग सूत्रों के मुताबिक साल भर में रैनबैक्सी की पांच शीर्ष दवाएं – एमोक्सीलिन एंटीबायोटिक मॉक्स (103 करोड़ रुपये), रिवाइटल (88 करोड़ रुपये), सेफैलेक्सीन स्पोरिडैक्स (82.1 करोड़ रुपये),

सिप्रोफ्लोक्सेसीन सिफ्रान (76.9 करोड़ रुपये) और स्टोरवास (72.8 करोड़ रुपये) का कारोबार करती हैं। इन दवाओं की बिक्री से कंपनी ने नवंबर 2008 तक कुल 429 करोड़ रुपये की बिक्री की थी।

जबकि सिप्ला की पांच शीर्ष दवाओं- एस्थेलीन (94.7 करोड़ रुपये), सेरोफ्लो (82.9 करोड़ रुपये), नोवामोक्स (73.3 करोड़ रुपये), गर्भपात की दवा एमटी पिल (60.2 करोड़ रुपये), अस्थमा की दवा एरोकोर्ट (58.3 करोड़ रुपये) की बिक्री से इसी समयावधि में 369.4 करोड़ रुपये की बिक्री की थी।

First Published : January 1, 2009 | 11:30 PM IST