सत्यम कंप्यूटर सर्विसेज के मुखिया राम लिंग राजू की कारगुजारी ने प्राइसवाटरहाउस के नाम पर तो बट्टा लगा ही दिया, उन्होंने नामी सलाहकार कंपनी अर्न्स्ट ऐंड यंग की साख पर धब्बा लगाने का भी पूरा इंतजाम कर दिया था।
सत्यम ने मायटास प्रॉपर्टीज के उस मूल्यांकन को अधिग्रहण के लिए आधार बनाया था, जो अर्न्स्ट ऐंड यंग ने किया था, लेकिन सलाहकार फर्म का कहना है कि उसने अधिग्रहण के लिए मूल्यांकन किया ही नहीं था।
सत्यम के पूर्व सीएफओ वी. श्रीनिवासन, जो फिलहाल जेल में हैं, उन्होंने 16 दिसंबर को सत्यम की बोर्ड बैठक में कहा था कि अर्न्स्ट ऐंड यंग ने मायटास प्रॉपर्टीज का मूल्यांकन करीब 6,523 करोड़ रुपये किया है, लेकिन सत्यम इस कंपनी का अधिग्रहण 6,410 करोड़ रुपये में कर रही है।
अब अर्न्स्ट ऐंड यंग ने सत्यम पर आरोप लगाया है कि सॉफ्टवेयर कंपनी ने अधिग्रहण की योजना को अमली जामा पहनाने के लिए इस मूल्यांकन का गलत तरीके से इस्तेमाल किया है। उसने तो मायटास का मूल्यांकन शेयरों के हस्तांतरण की प्रस्तावित योजना के लिए किया था।
कंपनी के प्रवक्ता ने ई-मेल के जरिए बिानेस स्टैंडर्ड को बताया कि मायटास का मूल्यांकन करते समय उसे इस बात का पता तक नहीं था कि सत्यम इस कंपनी का अधिग्रहण करने की योजना बना रही है। इसलिए उसने सत्यम के नजरिये से मायटास का मूल्यांकन नहीं किया है।
प्रवक्ता ने कहा कि उनकी कंपनी एक लॉ फर्म है और सत्यम की ओर से कंपनी को मायटास का मूल्यांकन करने को नहीं कहा गया था।
अर्न्स्ट ऐंड यंग की ऑडिट संस्था के एस.आर. बाटलीबॉय ने बताया कि कंपनी के मूल्यांकन में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं है और यह नियामक (भारतीय रिजर्व बैंक) के दिशा-निर्देश के तहत किया गया है। सत्यम, मायटास ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
उल्लेखनीय है कि निवेशकों के विरोध के बाद सत्यम की ओर से मायटास के प्रस्तावित अधिग्रहण को रद्द कर दिया गया था।
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