‘ठोस बुनियाद पर टिकी है एबीआरएल की इमारत’

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 10, 2022 | 1:10 AM IST

आदित्य बिड़ला रिटेल की योजना 2013 तक अपने कारोबार को बढ़ाकर 20,000 करोड़ रुपये तक करने की है। इस समय अन्य रिटेल कंपनियां जहां खर्चों में कटौती कर रही हैं, वहीं इस कंपनी की योजना नए स्टोर खोलने और क्षमता बढ़ाने पर है।
 
इस बारे में कंपनी के मुख्य कार्य अधिकारी थॉमस वर्गीज ने राघवेन्द्र कामत से बात की। प्रस्तुत है बातचीत के मुख्य अंश :
आर्थिक मंदी के चलते जहां कई रिटेल कंपनियां खर्चे घटाने को लेकर जूझ रही हैं, वहीं आपकी कंपनी का ध्यान विस्तार करने पर लगा है। इस काम को कंपनी किस तरह अंजाम दे रही है?

ऐसा नहीं कि मंदी से हमारी कंपनी नहीं जूझ रही।
सभी इससे जूझ रहे हैं , फर्क केवल परिमाण का है। रिटेल का कारोबार जटिल है। हमने बगैर किसी अनुभव के इस क्षेत्र में कदम रखा। हमारी कंपनी का तो किसी अंतरराष्ट्रीय समूह के साथ कोई संयुक्त उपक्रम भी नहीं है।हमें हमारी कंपनी की रणनीति पर पूरा विश्वास है।
तो आपका मानना है कि रिटेल में अकेले चलने का आपकी कंपनी का फैसला कामयाब रहा?

नहीं, हम यह कहना नहीं चाहते कि क्या कामयाब रहा और क्या नहीं! मुझे लगता है कि इस बारे में कुछ भी कहना लंबे समय बाद ही मुनासिब होगा। एबीआरएल इस बात की पड़ताल कर रही है कि किस दिशा में जाना मुनासिब होगा ताकि कंपनी की नींव मजबूत हो सके।
हमें हमारी कंपनी की रणनीति और टीम पर पूरा विश्वास है। हम सही रास्ते पर हैं। हमारे फैसले सही साबित हुए। कंपनी के स्टोर उचित जगह पर स्थापित किए गए। हर स्टोर खोलने से पहले कंपनी अध्ययन कराती है।
हमारी कंपनी कोई डमी स्टोर नहीं खोलेगी। दूसरी कंपनियां तो केवल संख्या गिनवाने में लगी रहीं। हमलोग अब वास्तविकता देख रहे हैं। ज्यादातर कंपनियां अब अपनी दुकानें बेच रही हैं।
वजह क्या रही इसकी? कंपनी की बिक्री घटी या रियल एस्टेट की बढ़ती लागत के चलते परियोजनाएं अव्यावहारिक साबित हुईं।

मेरी व्यक्तिगत राय है कि घटती बिक्री को रोकने के लिए अभी काफी कुछ किया जाना शेष है। बिानेस मॉडल में भी काफी सुधार की जरूरत है। जैसे कि एबीआरएल ने तय किया हुआ है कि वह किसी भी सूरत में राजस्व का 4 फीसदी से अधिक किराया नहीं देगी।
यदि हमारा कोई स्टोर प्रति वर्ग फुट 1,000 रुपये का राजस्व अर्जित कर रहा है तो हम किराया में 40 रुपये प्रति वर्ग फुट से ज्यादा खर्च नहीं करेंगे। यदि खर्च करेंगे तो कंपनी का राजस्व भी उसी अनुपात में आना चाहिए।
फिच की रेटिंग के मुताबिक, बिक्री में कमी के चलते रिटेलरों के मुनाफे में कमी आई है। इसके अलावा, कई तरह के ऑफरों और कर छूट की वजह से मुनाफा मार्जिन में और गिरावट हुई। आपकी कंपनी पर किस चीज की मार पड़ी?

हमारे मुनाफे पर इसका कोई असर नहीं दिखा है न ही कारोबारी मात्रा में कोई कमी हुई। खाद्य पदार्थों का कारोबार तो वास्तव में इससे पूरी तरह अछूता रहा है। बल्कि हमारा राजस्व तो बढ़ा ही है।
दूसरे रिटेलरों की तरह आपकी कंपनी कई तरह की छूट और ब्रांड प्रमोशन क्यों नहीं कर रही?

क्या होगा, जब कोई कंपनी केवल छूट के समय ही अपने उत्पाद बेच पाए? बाकी समय यदि दुकान खाली रहे और कोई खास बिक्री न हो पाए तो कोई कब तक ऑफर दे सकती है! कुछ समय बाद कर्मचारी और ग्राहक दोनों ऊब जाएंगे। 

दुनिया में कहीं भी ऑफरों के जरिए लंबे समय तक बिक्री नहीं बढ़ाई जा सकती। इसलिए हमारी कंपनी ऑफरों में यकीन नहीं रखती।
2007 में बिड़ला समूह ने रिटेल कारोबार में 9,000 करोड़ रुपये निवेश करने को कहा था। तो क्या विस्तार की यह योजना मौजूदा दौर में भी जारी रहेगी? 

हमारी योजना कमोबेश उसी दिशा में आगे बढ़ेगी। हमारी कारोबारी योजना 5 साल की है। 2013 तक हम कंपनी को 20,000 करोड़ रुपये की कंपनी बनाना चाहते हैं।

First Published : February 15, 2009 | 11:50 PM IST