डीटीएच में 74 फीसदी एफडीआई चिंता की बात

Published by
बीएस संवाददाता
Last Updated- December 09, 2022 | 3:48 PM IST

डीटीएच कारोबार की अग्रणी कंपनी डिश टीवी के प्रबंध निदेशक जवाहर गोयल डीटीएच कारोबार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को 49 फीसदी से बढ़ाकर 74 फीसदी करने का विरोध कर रहे हैं।


शुचि बंसल से बातचीत में उन्होंने अपनी चिंताएं जाहिर कीं। मुख्य अंश:

आप डीटीएच में एफडीआई को बढ़ाने का विरोध क्यों कर रहे हैं?

डीटीएच नीति में साफ है, ‘डीटीएच कारोबार में अगर डीटीएच लाइसेंस प्राप्त कंपनी की तरफ से विदेशी लोगों को करार और सलाहकार के तहत नियुक्त किया जाता है तो उन सभी को भारतीय सरकार से सुरक्षा संबंधी अनुमति लेनी पड़ती है।’

सरकार ने यह फैसला इसीलिए किया था कि जिससे ब्रॉडकास्टिंग और अपलिंकिंग स्टेशन सुरक्षित रहें। लेकिन अब सरकार डीटीएच के प्रबंधन का अधिकारी भी विदेशी कंपनियों को देने की बात कर रही है। अगर सरकार इस बात पर कायम रहती है तो फिर उसे नीति में से वह मानक हटा देना चाहिए।

हमने पहले भी सुरक्षा से संबंधित सवाल उठाए थे। दरअसल पहले भी सरकार डीटीएच कारोबार में विदेशी निवेश को बढ़ाने की अनुमति देने वाली थी। हम सरकार से सिर्फ सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कोई भी फैसला लेने की बात कह रहे हैं।

क्या आपने हाल में मंत्रालय के सामने अपनी बात रखी थी?

हां, मंत्रालय के अधिकारियों ने हमें डीटीएच की सिंगल मैसेजिंग सिस्टम तकनीक दिखाने के लिए कहा था।

इस तकनीक की मदद से कोई भी डीटीएच ऑपरेटर अपने किसी भी सब्सक्राइबर की टीवी स्क्रीन पर सीधे तौर पर कोई भी मैसेज भेज सकता है।

आप सोच सकते हैं कि अगर इस व्यवस्था पर ठीक से निगाह नहीं रखी गई तो यह कितनी मुसीबतों का सबब बन सकती है। फिलहाल सरकार ने इस व्यवस्था पर रोक लगा दी है ।

यह सुरक्षा के लिहाज से चिंता की बात है, क्योंकि इस तकनीक के जरिए भेजे जाने वाले संदेशों को बीच में पढ़ा नहीं जा सकता है।

लेकिन क्या विदेशी निवेश बढ़ाने से घाटा झेल रहे डीटीएच क्षेत्र को फायदा नहीं होगा?

फिलहाल 49 फीसदी विदेशी निवेश की ही मंजूरी है। लेकिन इसके बाद भी किसी भी डीटीएच कंपनी में 20 फीसदी से ज्यादा विदेशी निवेश नहीं है।

बाकी 29 फीसदी निवेश प्रवासी भारतीय, विदेशी संस्थागत निवेशक और ओसीबी के जरिए ही आता है। हो सकता है कि विदेशी प्रत्यक्ष निवेश को बढ़ाने के लिए इस विभाजन को समाप्त कर दिया जाए।

अगर रूपर्ट मर्डोक टाटा स्काई में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 74 फीसदी करते हैं, तो क्या यह डिश के लिए चिंता की बात होगी?

मुझे लगता है कि हर भारतीय को रूपर्ट मर्डोक के  बारे में सोचना चाहिए। हमने देखा है कि वह बाकी देशों में किस तरह कारोबार करते हैं।

हम टाटा स्काई को लेकर चिंतित नहीं हैं। हम अब भी रोज टाटा स्काई से करीब 5,000 बॉक्स ज्यादा बेच रहे हैं। डीटीएच कंपनियों के लिए चिंता की बात है सन डायरेक्ट, जो रोज लगभग 12,000 नए ग्राहक बना रहा है।

First Published : December 29, 2008 | 10:45 PM IST