7.5 करोड़ रुपये की कार की सवारी करेंगे!

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 10, 2022 | 7:06 PM IST

कभी आपने सोचा है कि मंदी का सबसे ज्यादा असर किस शख्स पर पड़ा है? मुश्किल सवाल है न!
इस सवाल के जवाब में अलासडेयर एम. स्टुअर्ट हल्की सी मुस्कुराहट के साथ अपना नाम खुद लेते हैं। आप पूछेंगे कि अब ये भाई साहब कौन हैं?
स्टुअर्ट, बुगाती ऑटोमोबाइल्स एसएएस के निदेशक (मार्केटिंग ऐंड सेल्स) हैं। अब ये कौन सी कंपनी है? बुगाती मोल्सियम, फ्रांस की एक बहुत पुरानी ऑटो कंपनी है, जिसकी मालिक अब फॉक्सवैगन है।
अगर सीधे-सीधे शब्दों में कहें, तो बुगाती दुनिया की सबसे तेज कार ‘वेरॉन’ को बनाती है। आप उनके इस साल के बिक्री लक्ष्य को जानकार हैरत में पड़ जाएंगे, सिर्फ 50 कारें। आपको लगेगा कि यह क्या बचपना है? लेकिन आपको बता दें कि इस कार की कीमत 12 लाख डॉलर हैं।
स्टुअर्ट का कहना है, ‘हमारी कंपनी सिर्फ दो मॉडलें बनाती है। मंदी के इस दौर में इससे काफी राहत मिलती है।’ दूसरी कार भी कंपनी ने अभी ही लॉन्च की है। इस मॉडल का नाम है ग्रांड स्पोर्ट। इससे स्टुअर्ट को काफी फायदा हुआ है।
दरअसल, दुनिया में ऐसे लोगों की कमी कतई नहीं है, जो इतने जबरदस्त और तेज रफ्तार कार के लिए मोटी से मोटी रकम खर्च करने के लिए तैयार हैं। उनकी टीम को 300 कारों को बेचने का लक्ष्य रखा है। इसमें से 250 कारों को वह पहले से ही बेच चुके हैं। तो कितना मु्श्किल था इन कारों को बेच पाना?
स्टुअर्ट बताते हैं, ‘तब वक्त अच्छा था। कई लोगों ने तो हमसे दुबारा कारें भी खरीदीं हैं।’ तो क्या लोगों ने एक से ज्यादा वेरॉन कारें भी खरीदीं हैं? उनका कहना है, ‘आप हैरान हो गए न। कई लोग तो ऐसे थे, जो अपने पास कूपे और ग्रांड स्पोर्ट दोनों रखना चाहते थे।’
स्टूअर्ट ने जिनेवा ऑटो शो में प्रदर्शित की गई बुगाती की कंवर्टिबल की तरफ इशारा किया, जिसका ऊपर हिस्सा एक छाते की तरह सिमट कर अंदर चली आती है। तो क्या उन पर टीवी और अखबारों में आ रही बुरी खबरों का असर नहीं होता, जो वह इतनी महंगी कार बेच रहे हैं? उनका कहना है, ‘सच कहूं तो असर पड़ता है।
लेकिन यह बात भी उतनी ही बड़ी हकीकत है कि दुनिया में ऐसे लोगों की कोई कमी नहीं है, जिनके पास काफी पैसा है।’ तो कैसे बेचते हैं वह अपनी कार? उनका कहना है कि, ‘हम तो बस निशानों का पीछा करते हैं।’ इसका मतलब उन्हें अपनी 8000 सीसी यानी 1001 बीएचपी की 16 सिलेंडर वाली कारों को खुद ही बेचना पड़ता है। ‘हां, हम अपने ग्राहकों को खुद ही तलाशना पड़ता है।’ तो कितना है उनका बिक्री लक्ष्य? उन्होंने कहा, ‘मंदी के इस दौर में चार-पांच कारें हर बिक जाएं, तो वह भी फायदे का सौदा होगा।’
स्टुअर्ट ने बताया कि कंपनी अपनी 100वीं सालगिरह के दिन 13 सितंबर को एक बहुत बड़ी पार्टी दे रही है। इसमें कंपनी के सभी ग्राहकों (सिर्फ 250) को बुलाया जाएगा और कंपनी कुछ मजेदार उनके सामने पेश करेगी। तो क्या वह नया मॉडल लॉन्च करने के बारे में सोच रही है? 
स्टुअर्ट ने इसके जवाब में सिर्फ मुस्कुरा दिया। अब जाने का वक्त था और मैंने अपना पसंदीदा सवाल उनसे पूछा। मैंने पूछा, ‘देखिए, 1001 बीएचपी की इतनी महंगी कार को बेचना कोई आसान काम नहीं है। तो अगर आपके पास कोई दागदार छवि वाला ऐसा खरीदार आता है, जो नकद देकर आपकी कार खरीदना चाहता है तो आप क्या करेंगे?’
उनका जवाब काफी जबरदस्त था। उनका कहना था, ‘वे मेरे पास सीधे नहीं आएंगे। हम आम तौर पर ब्रोकरों या रिसेलरों के जरिये कारोबार नहीं करते, लेकिन हम उनकी अनदेखी भी नहीं कर सकते। उन्हीं की तो ‘अच्छे खरीदारों’ से जान-पहचान होती है।’ तो क्या किसी भारतीय ने ‘वेरॉन’ की सवारी की है?
मुझे उम्मीद थी कि अगर स्टुअर्ट चाहें तो वह शख्स मैं बन सकता था। लेकिन उनका जवाब था, ‘अभी कुछ दिनों पहले एक प्रवासी भारतीय कारोबारी ने इस कार की सवारी की थी। आप इसकी सवारी नहीं कर सकते, क्योंकि हमने पत्रकारों को टेस्ट राइड करवाना बंद कर दिया है।’ मेरी फूटी किस्मत।
आखिरी में स्टुअर्ट ने एक सवाल किया, ‘आप जानते हैं कि हम भारत में अपनी कारों को नहीं बेच सकते। दरअसल, हम राइट हैंड ड्राइव कारों को नहीं बनाते और भारत में लेफ्ट हैंड ड्राइव कारों को बेचना गैरकानूनी है। खैर आप यह बताइए कि वहां ऐसी कारों का कैसा बाजार है?’ मुश्किल, बहुत मुश्किल सवाल था। 

First Published : March 6, 2009 | 1:10 PM IST