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देश में चीनी उत्पादन 7% बढ़ा, महाराष्ट्र और कर्नाटक में रिकॉर्ड पैदावार; पर UP में दिखी हल्की गिरावट

भारतीय चीनी एवं जैव-ऊर्जा विनिर्माता संघ (इस्मा) के मुताबिक चालू चीनी सीजन 2025–26 में 30 अप्रैल तक देश में चीनी उत्पादन 275.28 लाख टन रहा

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रामवीर सिंह गुर्जर   
Last Updated- April 30, 2026 | 4:38 PM IST

चालू सीजन में चीनी के उत्पादन में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। इस महीने तक चीनी के उत्पादन में 7 फीसदी इजाफा हुआ है। चीनी सीजन के समाप्ति की ओर बढ़ने के साथ ही गन्ना किसानों का बकाया भी बढ़ रहा है। ऐसे में चीनी उद्योग ने चीनी के न्यूनत बिक्री मूल्य (एमएसपी) बढ़ाने की सरकार से मांग की है।

चालू सीजन में अब तक कितना हुआ चीनी उत्पादन?

भारतीय चीनी एवं जैव-ऊर्जा विनिर्माता संघ (इस्मा) के मुताबिक चालू चीनी सीजन 2025–26 में 30 अप्रैल तक देश में चीनी उत्पादन 275.28 लाख टन रहा, जो पिछले साल की इसी अवधि में 256.49 लाख टन था यानी इस साल इस अवधि में चीनी उत्पादन में करीब 7 फीसदी वृद्धि दर्ज की गई। वर्तमान में केवल 5 चीनी मिलें संचालित हैं, जबकि पिछले वर्ष इसी समय 19 मिलें चल रही थीं। इस्मा के अनुसार 2025-26 के मार्केटिंग सीजन के लिए ‘एथनॉल डायवर्जन’ के बाद कुल चीनी उत्पादन 2.93 करोड़ टन रहने का अनुमान लगाया है, जो 2024-25 के सीजन में 2.61 करोड़ टन उत्पादन से अधिक है।

किस राज्य में कितना हुआ चीनी का उत्पादन?

इस्मा के अनुसार उत्तर प्रदेश में इस वर्ष 30 अप्रैल तक 89.65 लाख टन चीनी उत्पादन हुआ, जबकि पिछले वर्ष इसी तिथि तक 92.40 लाख टन उत्पादन था। जाहिर इस साल उत्तर प्रदेश में चीनी के उत्पादन में कमी आई है। इस सीजन में राज्य की सभी मिलें बंद हो चुकी हैं, जबकि पिछले वर्ष इसी समय 10 मिलें संचालित थीं। उत्तर प्रदेश के उलट महाराष्ट्र और कर्नाटक में चीनी उत्पादन बढ़ा है।

महाराष्ट्र और कर्नाटक में इस वर्ष 30 अप्रैल तक क्रमशः 99.20 लाख टन और 48.01 लाख टन चीनी उत्पादन हुआ, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 80.93 लाख टन और 40.40 लाख टन था। दोनों राज्यों में मुख्य सीजन की सभी मिलें बंद हो चुकी हैं। हालांकि कर्नाटक की कुछ मिलें जून/जुलाई 2026 से विशेष सीजन में संचालित होंगी। तमिलनाडु की कुछ मिलें भी विशेष सीजन में संचालन जारी रखेंगी। कर्नाटक और तमिलनाडु के विशेष सीजन संचालन से मिलकर लगभग 5 लाख टन चीनी उत्पादन होता है।

30 अप्रैल 2026 तक

30 अप्रैल 2025 तक

 

चीनी मिलों की संख्या

चीनी उत्पादन
(लाख टन में)

चीनी मिलों की संख्या

चीनी उत्पादन
(लाख टन में)

राज्य

शुरू

बंद

चालू

शुरू

बंद

चालू

उत्तर प्रदेश

121

121

0

89.65

122

112

10

92.40

महाराष्ट्र

210

210

0

99.20

200

199

1

80.93

कर्नाटक

81

81

0

48.01

80

80

0

40.40

गुजरात

14

14

0

7.20

15

15

0

8.92

तमिलनाडु

30

25

5

5.38

30

22

8

4.76

अन्य

83

83

0

25.84

88

88

0

29.08

कुल

539

534

5

275.28

535

516

19

256.49

नोट: उपरोक्त चीनी उत्पादन के आंकड़े एथनॉल के लिए डायवर्जन के बाद के हैं।

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चीनी उद्योग की न्यूनतम बिक्री मूल्य संशोधन की मांग

जैसे-जैसे चीनी सीजन समाप्ति की ओर बढ़ रहा है, उद्योग चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) में शीघ्र संशोधन की मांग कर रहा है। इस्मा का कहना है कि बढ़ती उत्पादन लागत और एक्स-मिल स्तर पर कम प्राप्ति के कारण मिलों की नकदी स्थिति पर दबाव बढ़ रहा है, जिससे गन्ना भुगतान बकाया भी बढ़ रहा है।

केवल महाराष्ट्र में ही अप्रैल मध्य तक गन्ना बकाया 2,130 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले सीजन में इसी तिथि पर 752 करोड़ रुपये था। वर्तमान लागत संरचना के अनुरूप एमएसपी में समय पर वृद्धि मिलों की वित्तीय स्थिति सुधारने, किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने और बाजार स्थिरता बनाए रखने के लिए आवश्यक है, वह भी सरकार पर किसी अतिरिक्त वित्तीय बोझ के बिना।

एथनॉल मिश्रण को बढ़ावा देने की जरूरत

इस्मा के मुताबिक कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियां एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम को तेज करने की आवश्यकता हैं। देश में (अनाज आधारित एथनॉल सहित) लगभग 2,000 करोड़ लीटर की उत्पादन क्षमता मौजूद है। ऐसे में E20 से आगे बढ़कर E22, E25, E27 और E85/E100 जैसे उच्च मिश्रण स्तरों की दिशा में स्पष्ट रोडमैप बनाने की आवश्यकता है। इसके साथ फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों (FFVs) के तेजी से विस्तार और जीएसटी के तार्किककरण की भी जरूरत है, ताकि मांग और उपयोग को बढ़ावा मिल सके।

एथनॉल खरीद मूल्य में भी संशोधन की आवश्यकता

इस्मा का कहना है कि गन्ना आधारित फीडस्टॉक से बनने वाले एथनॉल के खरीद मूल्य में समय पर संशोधन न होने और क्षेत्र को कम आवंटन मिलने के कारण डिस्टिलेशन क्षमता और घरेलू मांग के बीच असंतुलन पैदा हो गया है। इससे स्थापित क्षमताओं का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा, जिससे उद्योग की आय पर असर पड़ रहा है। खरीद मूल्य में शीघ्र संशोधन फीडस्टॉक समानता बनाए रखने, क्षमता उपयोग बढ़ाने और उद्योग को दीर्घकालिक नीतिगत स्थिरता देने के लिए आवश्यक है।

इससे मिलें किसानों का बकाया समय पर चुका सकेंगी। इन मुद्दों पर समय पर और संतुलित नीतिगत हस्तक्षेप से मिलों की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी और किसानों के हित सुरक्षित रहेंगे। साथ ही घरेलू चीनी बाजार स्थिर रहेगा।

First Published : April 30, 2026 | 4:26 PM IST