तेजी बरकरार, बीएसई सेंसेक्स 54 हजार के पार

प्रमुख सूचकांकों में तीसरे दिन भी तेजी दर्ज की गई, क्योंकि डॉलर में कमजोरी और अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में गिरावट के बाद निवेशकों में जोखिम सहन करने की क्षमता को बढ़ावा मिला। निर्माण पीएमआई, जीएसटी संग्रह और गूगल मोबिलिटी डेटा जैसे संकेतकों में सुधार के बाद घरेलू आर्थिक परिदृश्य को लेकर उत्साह बढ़ा है।

सेंसेक्स नई ऊंचाई पर पहुंचा और सत्र के आखिर में 546 अंक या 1.02 प्रतिशत तेजी के साथ  54,369 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी में 128 अंकों की तेजी आई और यह आखिर में 0.8 प्रतिशत की बढ़त के साथ 16,259 पर बंद हुआ।

10 वर्षीय अमेरिकी बॉन्ड पर प्रतिफल 1.18 प्रतिशत के आसपास रहा, जबकि डॉलर में प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले तीसने दिन भी गिरावट बनी रही।

ऐक्सिस सिक्योरिटीज के मुख्य निवेश अधिकारी नवीन कुलकर्णी ने कहा, 'प्रमुख वृहद डेटा में सुधार की वजह से वैश्विक निवेशक पिछले महीने शुद्घ बिकवाल बने रहने के बाद इक्विटी बाजार में अब खरीदार बन गए हैं। इसके अलावा, आईपीओ की ताजा बहार और उनकी सफलता से मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में उनकी बढ़ती दिलचस्पी का संकेत मिलता है। कुल मिलाकर, हम बाजार पर आशान्वित बने हुए हैं।'

जुलाई में करीब 14,000 करोड़ रुपये की बिकवाली के बाद, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) अब घरेलू इक्विटी के शुद्घ खरीदार बन गए हैं।

वेटरफील्ड एडवायजर्स के मुख्य निवेश अधिकारी निमीष शाह ने कहा कि जहां न्यून आधार प्रभाव बड़ी कंपनियों द्वारा दर्ज सालाना प्रतिफल को प्रभावित कर रहा है, वहीं अर्थव्यवस्था में संपूर्ण सकारात्मक बदलाव आशाजनक हो रहा है।

बुधवार को वित्तीय क्षेत्र के शेयरों से बाजार को ताकत मिली। देश की सबसे बड़ी मॉर्गेज ऋणदाता आवास विकास वित्त निगम (एचडीएफसी) का शेयर 4.8 प्रतिशत चढ़ा और उसमें चार दिन की तेजी बढ़कर 11 प्रतिशत पर पहुंच गई। कोटक महिंद्रा बैंक 3.74 प्रतिशत, आईसीआईसीआई बैंक 3.6 प्रतिशत और एचडीएफसी बैंक में 2 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी आई। सेंसेक्स की तेजी में खासकर अकेले इन चार शेयरों का 543 अंक का योगदान रहा।

वित्तीय शेयरों में तेजी आरबीआई की मौद्रिक नीति बैठक से कुछ दिन पहले आई है। केंद्रीय बैंक द्वारा दरें नीचे बनाए रखने की उम्मीद है। वहीं स्थानीय फंडों और निवेशकों से लगातार खरीदारी की वजह से भी धारणा को मजबूती मिली है।