देसी निवेशकों के दम पर निफ्टी 16 हजार के पार

वैश्विक संकेतों और एचडीएफसी जैसे शेयरों में तेजी के दम पर बेंचमार्क सेंसेक्स और निफ्टी सूचकांक आज रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए। देसी अर्थव्यवस्था के वृहद आंकड़ों में सुधार और लॉकडाउन में ढील से अर्थव्यवस्था तेजी से सुधरने की उम्मीद ने भी निवेशकों का मनोबल बढ़ाया है।

निवेशकों के बढ़े हौसले के कारण सेंसेक्स 872 अंक (1.65 फीसदी) चढ़कर 53,823 के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर बंद हुआ। 21 मई के बाद सेंसेक्स की यह सबसे बड़ी छलांग है। निफ्टी भी 238 अंक (1.55 फीसदी) की बढ़त के साथ पहली बार 16,000 के पार बंद हुआ। कारोबार की समाप्ति पर निफ्टी 16,123 के सर्वकालिक उच्च स्तर पर बंद हुआ। दिलचस्प है कि विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के बावजूद सूचकांकों में तेजी आई है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने पिछले 12 कारोबारी सत्रों में से 11 में करीब 10,000 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं। हालांकि आज उन्होंने 2,117 करोड़ रुपये की लिवाली की। बाजार के जानकारों का कहना है कि बाजार में हालिया तेजी देसी संस्थागत निवेशकों और खुदरा निवेशकों के दम पर आई है।

एलकेपी सिक्योरिटीज में शोध प्रमुख एस रंगनाथन ने कहा कि वस्तु एवं सेवा कर संग्रह तथा निर्यात के आंकड़े बेहतर रहने से बाजार में तेजी आई है। निफ्टी के 16,000 के सफर में खुदरा निवेशकों का अहम योगदान रहा है।

जुलाई में एफपीआई ने 14,088 करोड़ रुपये की बिकवाली की थी, जो मार्च 2020 के बाद सबसे अधिक है। मगर म्युचुअल फंडों ने 12,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर खरीदकर इसकी भरपाई कर दी।

अवेंडस कैपिटल पब्लिक मार्केट ऑल्टरनेट स्ट्रैटजीज के मुख्य कार्याधिकारी एंड्रयू हॉलैंड ने कहा, 'एफपीओ की बिकवाली से कहीं ज्यादा स्थानीय निवेशकों ने बाजार में निवेश किया है। जुलाई में वृद्घि में नरमी की आशंका से अमेरिकी बॉन्ड का प्रतिफल कम रहा। लेकिन यूरोपीय अर्थव्यवस्था में सुधार देखा जा रहा है और निवेशकों का इससे मनोबल बढ़ा है।' जुलाई में सेवा पीएमआई का आंकड़ा 55.3 फीसदी रहा, जो तीन महीने में सबसे अधिक बढ़ा है। इसके साथ ही जुलाई में वस्तु एवं सेवा कर का संग्रह भी 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा। सभी आंकड़े अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत दे रहे हैं।

यूरोपीय बाजार में अच्छी तेजी रही। मगर कोरोना की डेल्टा किस्म फैलने की चिंता से अमेरिकी और अन्य एशियाई बाजारों में वृद्घि नरम रही। कोरोना के डर और चीन में सुधार की धीमी रफ्तार से तेल के दाम में भी गिरावट आई। ब्रेंट क्रूड 73.31 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। निवेशक अमेरिका में रोजगार के आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं। इससे अर्थव्यवस्था में सुधार और फेडरल रिजर्व के रुख का पता चलेगा।

अल्फाक्वेस्ट के फंड मैनेजर रौनक गाला ने कहा, 'वैश्विक स्तर पर तरलता, परिचालन में सुधार और सरकार की सहायता योजनाओं जैसे विभिन्न कारकों की वजह से बाजार सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंचा है। मगर बाजार में थोड़ा जोखिम भी बना हुआ है। अधिकांश बैंकों ने वित्त वर्ष 2022 की पहली तिमाही में ज्यादा प्रावधान किया है। ऐसे में निवेशकों को उन क्षेत्रों पर ध्यान देना चाहिए जिनमें वास्तविक वजहों से तेजी आई है और कीमत भी वाजिब है।'