राज्यों ने ली बाजार से कम उधारी

राज्य सरकारों ने बाजार से कम उधारी ली है। वित्त आयोग द्वारा सुझाए गई गई वित्तीय सावधानी का पालन करते हुए राज्यों ने ऐसा किया है, भले ही कोविड संबंधी आर्थिक सुस्ती के कारण उनका राजस्व कम हो गया है। अब तक राज्यों की ओर से इस वित्त वर्ष में ली गई उधारी उनके द्वारा पिछले साल ली गई उधारी की तुलना में 11 प्रतिशत कम है। केयर रेटिंग्स के मुताबिक उन्होंने इस कैलेंडर वर्ष में उधारी की जो योजना बनाई थी, उसकी तुलना में अब तक ली गई उधारी 12 प्रतिशत कम है।

अब तक इस वित्त वर्ष में 25 राज्यों व एक केंद्र शासित प्रदेश (यूटी) ने 2.92 लाख करोड़ रुपये उधारी ली है। वहीं पिछले साल की समान अवधि में राज्यों व केद्र शासित प्रदेशों ने 3.27 लाख करोड़ रुपये उधारी ली थी।

केयर रेटिंग ने एक रिपोर्ट में कहा है, 'इस साल राज्यों ने बाजार उधारी से दीर्घावधि फंड जुटाने में कम दिलचस्पी दिखाई है और अपनी देनदारी कम की है, वहीं वित्त वर्ष 21 में राज्यों ने भारी उधारी (करीब 8 लाख करोड़ रुपये) ली थी। वित्तीय समेकन पर नजर रखते हुए और अपना राजकोषीय घाटा वित्त आयोग द्वारा तय लक्ष्य में रखने के लिए ऐसा किया गया है।'  

वित्त आयोग ने वित्त वर्ष 22 में राज्यों के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के 4 प्रतिशत राजकोषीय घाटे का लक्ष्य रखा है।

बाजार से उधारी लेने के बजाय राज्य अपने राजस्व की भरपाई विशेष निकासी सुविधा (एसडीएफ) जैसी कम अवधि की उधारी की सुविधा और वेज ऐंड मींस एडवांस (डब्ल्यूएमए) के माध्यम से कर रहे हैं। ये दोनों सुविधाएं भारतीय रिजर्व बैंक ने मुहैया कराई हैं। राज्य विकास ऋण (एसडीएल) या राज्यों द्वारा जारी किए जाने वाले बॉन्ड बहुत लंबी अवधि के होते हैं। राज्यों की डब्ल्यूएमए उधारी 9 अप्रैल और 9 जुलाई के बीच 35 प्रतिशत ज्यादा, 0.92 लाख करोड़ रुपये थी, लेकिन जुलाई के मध्य और अगस्त में इसमें सुधार हुआ, जब केंद्र सरकार ने  राज्यों को वस्तु एवं सेवा कर मुआवजे की भरपाई के लिए 0.75 लाख करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया। लॉकडाउन के प्रतिबंध कम होने से भी राज्यों को ज्यादा राजस्व जुटाने में मदद मिली है। बहरहाल सितंबर के पहले दो महीने के दौरान डब्ल्यूएमए उधारी एक बार फिर बढ़ी, जब राज्यों ने रिजर्व बैंक से 22,810 करोड़ रुपये लिए। राज्यों को अभी भी अपने एसडीएल उधारी पर तुलनात्मक रूप से कम दरों से भुगतान करना पड़ रहा है। मंगलवार को 8 राज्यों ने 8,910 करोड़ रुपये जुटाए हैं जो 3 सप्ताह की न्यूनतम उधारी लागत है। रेटिंग एजेंसी इक्रा ने पाया कि 4700 करोड़ रुपये शुरुआती गाइडेंस की तुलना में उधारी 91 प्रतिशत ज्यादा है, लेकिन यह इस सप्ताह के एक साल के 14,300 करोड़ रुपये  की तुलना में अभी 37 प्रतिशत कम है।