जुलाई में पीएमआई विनिर्माण तीन महीनों में सबसे अधिक

लॉकडाउन के कारण मई और जून में लडख़ड़ाया विनिर्माण एक बार फिर पटरी पर आ गया और जुलाई में कारखानों में जमकर काम हुआ। आईएचएस मार्किट परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) के मुताबिक इसी कारण जुलाई में विनिर्माण गतिविधियां तीन महीनों के सर्वोच्च स्तर पर रहीं। यह सूचकांक जुलाई में बढ़कर 55.3 पर पहुंच गया, जो जून में 48.1 पर था। जून में विनिर्माण 11 महीनों में पहली बार 50 से नीचे गया था।

पीएमआई से दूसरे पैमानों में दिख रहे सुधार की पुष्टि होती है। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह जुलाई में बढ़कर 1.16 लाख करोड़ रुपये रहा, जो जून में 92,849 करोड़ रुपये रहा था। जून में जीएसटी संग्रह आठ महीनों में पहली बार एक लाख करोड़ रुपये से नीचे गया था।

पीएमआई सर्वेक्षण करने वाली वित्तीय सूचना कंपनी आईएचएस मार्किट की अर्थव्यवस्था की सह निदेशक पॉलियाना डी लीमा ने कहा, 'भारतीय विनिर्माण उद्योग को जून के झटके से उबरकर रफ्तार पकड़ते देखना उत्साहजनक है। उत्पादन तेज रफ्तार से बढ़ा है और लॉकडाउन की बंदिशें ढीली पडऩे के बाद जुलाई महीने में एक-तिहाई से अधिक कंपनियों के उत्पादन में बढ़ोतरी दिखी है।'

मांग सुधरने और प्रतिबंधों में ढील की खबरों से कारखानों के ऑर्डर बढ़ गए। अंतरराष्ट्रीय मांग में इजाफे ने भी ऑर्डर बुक बढ़ा दी। जून में नए निर्यात ऑर्डर घटे थे मगर जुलाई में उनमेें खासी बढ़ोतरी हुई।

डी लीमा ने कहा कि महामारी का असर और घटा तो चालू कैलेंडर वर्ष का औद्योगिक उत्पादन पिछले साल के मुकाबले 9.7 फीसदी बढ़ जाएगा। उत्पादन, नए ऑर्डरों, निर्यात, खरीद एवं कच्चे माल का स्ऑक बढऩे से रोजगार में मामूली बढ़ोतरी हुई और उसमें 15 महीनों से गिरावट का सिलसिला खत्म हो गया।

डी लीमा ने कहा, 'पीएमआई भी विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार पैदा होने की सकारात्मक खबरें लेकर आया है। मामूली ही सही, रोजगार में कोविड-19 शुरू होने के बाद पहली बार बढ़ोतरी हुई है। हालांकि कंपनियों का लागत का बोझ लगातार बढ़ रहा है और अब भी अनुपयोगी क्षमता के संकेत दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में यह कहना जल्दबाजी होगी कि यह रुझान आगामी महीनों में भी बना रहेगा।'

बार्कलेज के भारत में मुख्य अर्थशास्त्री राहुल बाजोरिया ने कहा कि रोजगार पीएमआई 16 महीनों में पहली बार 50 से ऊपर पहुंचा है, जो सेवा क्षेत्र के लिए सकारात्मक परिदृश्य का संकेत है। इनपुट लागत में इजाफा हुआ है, उत्पादों पर शुल्कों में बढ़ोतरी हुई है। हालांकि बहुत सी कंपनियों ने बिक्री बढ़ाने की कोशिशों के बीच अतिरिक्त लागत का बोझ खुद ही उठा लिया है। महंगाई का दबाव कम होने लगा है, इसलिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) इस महीने की नीतिगत समीक्षा में दरें यथावत रख सकता है।

डी लीमा ने कहा कि नीति निर्माता महंगाई का दबाव कम होने के संकेतों का स्वागत करेंगे। कंपनियों ने इनपुट लागत और उत्पादों पर शुल्कों में सात महीनों में सबसे कम बढ़ोतरी का संकेत दिया है। उन्होंने कहा, 'इसलिए हमारा अनुमान है कि आरबीआई अपनी अगस्त की बैठक में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा क्योंकि वह लगातार वृद्धि को सहारा दे रहा है।' मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की समीक्षा बैठक 4 अगस्त से तीन दिन चलेगी।