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परमाणु करार पर खत्म तकरार
बीएस संवाददाता / नई दिल्ली 01 25, 2015

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ हैदराबाद हाउस में 'चाय पे चर्चा' के बाद कहा कि भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों में नई ऊंचाई आई है। अमेरिका और भारत ने आखिरकार गतिरोध को तोड़ते  भारत-अमेरिकी परमाणु करार पर बातचीत पर सहमति जताई, साथ ही विवादग्रस्त दक्षिण चीन सागर में सुरक्षा और स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की प्रतिबद्घता जताई।

अमेरिका ने भारत को एशिया पैसिफिक इकनॉमिक को-ऑपरेशन (एपेक) का सदस्य बनाने में मदद करने का भी भरोसा जताया। परमाणु करार पर दोनों देशों के बीच बना गतिरोध करीब 10 साल बाद टूटा, जबकि 6 साल पहले ही इस सौदे पर हस्ताक्षर हो चुके थे, लेकिन अब तक कोई प्रगति नहीं हुई है। दोनों देशों के इस पहल से अमेरिकी कंपनियों द्वारा असैन्य परमाणु रिएक्टर स्थापित करने का रास्ता साफ होगा। इसके साथ ही रक्षा तकनीक हस्तांतरण पहल के क्षेत्र में भी दोनों के बीच करार किया गया। इसके तहत जेट इंजन का विकास करने सहित चार परियोजनाओं पर संयुक्त रूप से शोध और विकास पर काम किया जाएगा।

दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय निवेश संधि और लंबे समय से लंबित सामाजिक सुरक्षा समझौते पर भी बातचीत शुरू करने पर सहमति जताई। सामाजिक सुरक्षा समझौते के सिरे चढऩे से अमेरिका में लाखों की संख्या में काम कर रहे भारतीय लाभान्वित होंगे, जो अभी इस समय सामाजिक सुरक्षा करों की अदायगी कर रहे हैं। द्विपक्षीय निवेश संधि का लक्ष्य एक द्वारा दूसरे देश में निवेश को सुरक्षा प्रदान करना है। दोनों राष्ट्र इस बारे में वर्ष 2008 से भी बातचीत कर रहे हैं।

संयुक्त रूप से मीडिया को संबोधित करते हुए ओबामा ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार बढ़कर 100 अरब डॉलर हो गया है लेकिन इसमें और इजाफा होना चाहिए। ओबामा ने मोदी द्वारा भारत में कारोबार को आसान बनाने और उनके सुधार के प्रयासों की सराहना की। अमेरिका ने भारत के महत्त्वाकांक्षी 100 गीगा वॉट सौर ऊर्जा उत्पादन के लक्ष्य में भी सहयोग करने में दिलचस्पी दिखाई।

ओबामा के दौरे की सबसे अहम बात यह रही कि प्रधानमंत्री मोदी आज स्वयं दिल्ली हवाई अड्डे पर ओबामा और उनकी पत्नी मिशेल के सत्कार के लिए पहुंचे। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच हैदराबाद हाउस में चाय पे चर्चा हुई। भारत की विदेश सचिव सुजाता सिंह ने कहा कि भारत में परमाणु उत्तरदायित्व कानून पर अमेरिका की चिंता दूर करने में राजनीतिक नेतृत्व ने अहम भूमिका अदा की। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय बातचीत में कई मुद्दों पर चर्चा की। इनमें अफगानिस्तान के मौजूदा हालात और इस साल के अंत में पेरिस में जलवायु परिवर्तन पर होने वाले सम्मेलन पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत एक संप्रभु राज्य है और उस पर जलवायु परिवर्तन समझौते पर हस्ताक्षर के लिए कोई दबाव नहीं बना सकता।

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